देश में जगह जगह आंदोलन हो रहे हैं। पुलिस बलों को दिल्ली बुला लिया है। डर कायम है। लेकिन मीडिया नहीं दिखा रहा। इन्हें पाकिस्तान में हो रहे आंदोलन दिखाई दे रहे हैं। अपनी नाक के नीचे हो रहे प्रदर्शन, भूख हड़ताल नहीं दिख रहे। रात को सोते कैसे होंगे? धर्मेंद्र प्रधान का वीडियो आया छप्पन भोग खाते हुए। सत्रह बच्चे मरे हैं। और बाकि बारिश, धूप में हड़ताल पर हैं। गले से नीचे खाना कैसे जा रहा है? इतनी बेशर्मी, इतना घमंड तो रावण का भी नहीं रहा। मेरी आंख भर आ रही है बार बार। गुस्सा दुख सब एक साथ हैं। कहीं पेड़ कट रहे हैं, कहीं बच्चे मर रहे हैं। उनके मां बाप, छात्र सब गद्दार हैं आई टी सैल के अनुसार। अरे शर्म करो। कुछ तो शर्म करो। बच्चे तुम्हारे भी हैं। क्या मुंह दिखाओगे उन्हें? एक बूढ़े अय्याश आदमी की अय्याशी के लिए बच्चों को मरने दोगे?