सरकार ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। फिर भूख हड़ताल की गई। सरकार ने फिर भी जवाब नहीं दिया। जब सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ने लगी तो सरकार आंदोलन से डर गई और उन्हें जबरदस्ती उठाकर ले गई। हैरानी है कि बात करने तब भी कोई नहीं आया। ऐसा लग रहा है कि मोदी के दो ही काम बचे हैं – चुनावी रैली करना और उसके बाद विदेश भाग जाना। वापस आना, रैली करना और फिर विदेश चले जाना। इस बीच दिल्ली में ही चल रहे आंदोलन स्थल पर जाकर दस मिनट बात करना पीएम को जरूरी नहीं लगा। ये लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है। ये नागरिकों के मुंह पर तमाचा है। कोई सवाल करे तो गद्दार घोषित कर दिया जाता है। खान सर हों या हिंदुओं के सबसे बड़े संत शंकराचार्य, किसी को नहीं बख्शा गया। आईटी सैल एक ऐसा हथियार है जिससे किसी के भी खिलाफ नैरेटिव खड़ा कर दिया जाता है और असली मुद्दे को दबा दिया जाता है।
ये चीन से सपोर्टड है ये अमेरिका की साजिश है ये पाकिस्तान की है। ये बड़ी बिंदी गैंग से है ये बिना बिंदी गैंग से है.. ये सब चल क्या रहा है? यदि वाकई में लोग गद्दार हैं तो कोर्ट में सबूत दिखाकर सजा करवाइए। लेकिन ये भी बताइए कि ये गद्दारी तभी क्यों दिखती है जब कोई सवाल पूछता है? उसके पहले कभी क्यों नहीं दिखाई देती?
आप सब भी इन बातों को समझिए और आवाज उठाइये। दिल्ली जाइए, लिखिए, बोलिए, दूसरों की पोस्ट शेयर कीजिए, लाइक कीजिए। कुछ भी करके दिखाइए कि आप जिंदा हैं। सरकार की जवाबदेही तय कीजिए। मुझे मतलब नहीं कि यही सरकार रहती है या बदलती है। मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि जो भी सरकार हो वो लोकतंत्र का सम्मान करे। लोगों के सवालों का जवाब दे, उनकी परेशानी को संबोधित करे। उनकी समस्या को समझे और उसका समाधान दे। सबसे बढ़कर, सरकार को ये समझ में आ जाए कि वो जनता के प्रति जवाबदेह है। जनता ने उसे बनाया है, वो जनता का सेवक है, मालिक नहीं। और सेवक का काम है मालिक की आवाज को सुनना और उत्तर देना।