
अगरतला: आज के दौर की राजनीति में जहां नेता अपनी गाड़ियों के काफिले और आलीशान बंगलों से पहचाने जाते हैं, वहीं त्रिपुरा से आई एक बेहद भावुक कर देने वाली तस्वीर ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता कॉमरेड माणिक सरकार के सामने एक बेघर और परेशान छात्रा फुटपाथ पर ही उनके पैरों में झुक गई।
सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था से त्रस्त इस छात्रा का परिवार कथित तौर पर बेघर हो चुका है और शिक्षा व रोजगार के साधन छिन जाने के बाद वह बेहद हताश थी। पूर्व मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर वह खुद को रोक नहीं सकी और रोते हुए उनके पैर छूकर कहा, “आपसे बेहतर कोई नहीं है, आप ही हमारे भगवान हैं। हमारे दादा-दादी और माता-पिता हमेशा कहते हैं कि आपकी जैसी बेदाग और ईमानदार छवि अब मिलना मुश्किल है। आपने अपनी पूरी जिंदगी जनता के लिए लगा दी, न घर बनाया न गाड़ी ली। कृपया हमारे त्रिपुरा को बचा लीजिए।”
ईमानदारी का दूसरा नाम: माणिक सरकार
यह दृश्य इस बात का गवाह है कि सत्ता में न होने के बावजूद कॉमरेड माणिक सरकार का राजनीतिक और नैतिक कद आज भी कितना ऊंचा है। देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्रियों में शुमार रहे माणिक सरकार ने अपनी पूरी जिंदगी और वेतन पार्टी व जनता को समर्पित कर दिया। आज जब त्रिपुरा का एक आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है, तो उसे सिर्फ अपने पुराने ‘जनता के मुख्यमंत्री’ में ही उम्मीद की किरण नजर आ रही है।
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माणिक सरकार त्रिपुरा के सबसे लंबे समय तक CM रहने वाले नेता हैं। इन्हें “भारत का सबसे गरीब मुख्यमंत्री” भी कहा जाता था।
मुख्य योगदान और पहचान
1. सबसे गरीब CM की इमेज
CM रहते हुए भी सरकारी आवास में रहते थे। निजी संपत्ति के नाम पर सिर्फ 1520 रुपये बैंक बैलेंस और 1 पुरानी अलमारी थी। वेतन का 90% पार्टी फंड में दे देते थे। पत्नी पांचाली भट्टाचार्जी सेंट्रल गवर्नमेंट की रिटायर्ड कर्मचारी हैं।
2. उग्रवाद खत्म किया
1990s में त्रिपुरा में NLFT, ATTF जैसे उग्रवादी संगठन बहुत एक्टिव थे। माणिक सरकार ने पुलिस + विकास का मॉडल चलाया। सड़क, स्कूल, रोजगार दिया और साथ में ऑपरेशन चलाए। 2015 तक त्रिपुरा लगभग उग्रवाद मुक्त हो गया।
3. साक्षरता और HDI
इनके कार्यकाल में त्रिपुरा की साक्षरता दर 87.75% पहुंची – भारत में केरल के बाद दूसरे नंबर पर। स्वास्थ्य, शिक्षा में त्रिपुरा टॉप राज्यों में आया।
4. साफ राजनीति
20 साल CM रहने के बाद भी भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा। चुनाव हारने के बाद सरकारी बंगला तुरंत खाली करके पार्टी ऑफिस में शिफ्ट हो गए।
5. 2018 में हार
2018 विधानसभा चुनाव में BJP ने 25 साल बाद CPI(M) को हराया। बिप्लब देब CM बने। माणिक सरकार अभी भी विधायक और CPI(M) पोलित ब्यूरो मेंबर हैं।
एक लाइन में
माणिक सरकार ने गरीबी, सादगी और ईमानदारी से 20 साल त्रिपुरा चलाया। उग्रवाद खत्म किया और शिक्षा में राज्य को टॉप पर पहुंचाया।
त्रिपुरा में इन्हें लोग आज भी “कॉमरेड” बोलते हैं।
