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[16/06, 6:02 pm] LIU sharma: राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़ी एक और बड़ी खबर-

राम मंदिर में दान राशि गबन का लंबे समय से चल रहा था खेल,

वर्चस्व की लड़ाई में खुला बड़ा राज।

यानि ये सब एक Organised Crime का हिस्सा था और पाप का घड़ा वर्चस्व की लड़ाई यानि आसान भाषा में कहे तो गैंगवार में फूट गया!!

और इस सबके बावजूद अब तक एफआईआर नहीं!

ट्रस्टियों की गिरफ़्तारी नही!

संघ वाले “भाईसाहब” लोगों से पूछताछ नही!!

मतलब जाँच की दिशा और दशा भी आप ही तय करोगे?

राम पर क़ब्ज़े की इस जंग में और कितना पाप करोगे?
[16/06, 6:02 pm] LIU sharma: वही कातिल, वही मुद्दई और वही मुंसिफ वाली कहावत इन दिनों श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में हुई हेराफेरी की जांच में साबित हो रही है। यहां चढ़ावे में हेरफेर व गबन के मामले में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी सवालों के घेरे में हैं। कई पर सीधे आरोप हैं तो कइयों की लापरवाही उजागर हुई है। जिनकी नाक के नीचे ये सब हुआ और उनको भनक तक नहीं लगी। अब सवाल है कि ट्रस्ट में इनके रहते हुए क्या निष्पक्ष जांच मुमकिन है। क्योंकि ट्रस्ट के पदाधिकारी पॉवरफुल और ऊंची पहुंच वाले भी हैं।

ट्रस्ट में कई बड़े पदाधिकारी हैं, जिनकी जिम्मेदारी मंदिर की व्यवस्थाओं से लेकर चढ़ावे की राशि की गिनती कराने तक रहती है। इसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत कई पदाधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद चढ़ावे की रकम का गबन होना कई सवाल खड़े कर रहा है। जिम्मेदार भी सवालों के घेरे में हैं। ये सभी जिम्मेदार घटना के उजागर होने के बाद से खामोश हैं। एक भी पदाधिकारी की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

अब सवाल है कि जिन पर सवाल हैं, क्या उनके रहते एसआईटी निष्पक्षता से जांच कर पाएगी। क्योंकि ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सवाल-जवाब करना इतना आसान नहीं होगा। वहीं जिन लोगों पर सीधे आरोप हैं, वे भी कहीं न कहीं किसी पदाधिकारी या उनके करीबी लोगों से जुड़े हुए हैं। एसआईटी के सामने इस तरह की कई बड़ी चुनौतियां भी हैं।

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