मुख्यमंत्री से मिला सर्वोच्च युवा सम्मान समाज को समर्पित करने की अनूठी पहल, कैलाश सत्यार्थी और माय भारत से मिली प्रेरणा
दुर्लभ मिसाल गढ़ने की राह पर आगे बढ़ा बागपत, देशभर में बनेगी उदाहरण, युवाओं के नाम दर्ज होगा राज्य युवा पुरस्कार
राज्य युवा पुरस्कार से तैयार होंगे नए विवेकानंद, युवाओं को नई दिशा दिखाने में जुटे अमन
बागपत, 17 जून 2026 – उत्तर प्रदेश में हर वर्ष अनेक युवा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित होते हैं। सम्मान प्राप्त करने के बाद उसे सहेजकर रखना स्वाभाविक भी माना जाता है। लेकिन बागपत के एक युवा ने अपने जीवन के सबसे बड़े सम्मान को लेकर ऐसा विचार सामने रखा है, जिसकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्राप्त उत्तर प्रदेश सरकार के सर्वोच्च युवा सम्मान स्वामी विवेकानंद राज्य युवा पुरस्कार को अब अमन एक प्रेरणा का रूप देने में जुटे है। उनकी इच्छा है कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बने और हजारों युवा इसे देखकर बड़े सपने देखने का साहस जुटा सकें।
इसी सोच के साथ बागपत के युवा आइकॉन एवं राज्य युवा पुरस्कार विजेता अमन कुमार ने जिलाधिकारी बागपत के समक्ष एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, जिसमें उन्होंने पुरस्कार के अंतर्गत प्राप्त स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को किसी सार्वजनिक स्थान पर स्थापित किए जाने का अनुरोध किया है, जहां जिले के युवा उसे देखकर प्रेरणा प्राप्त कर सकें। विशेष बात यह है कि यह सम्मान बागपत के इतिहास में प्राप्त पहला राज्य युवा पुरस्कार माना जाता है। ऐसे में अमन कुमार का मानना है कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे जनपद की युवा शक्ति, उनके संघर्ष, सपनों और संभावनाओं का प्रतीक है। अमन कहते हैं कि यदि कोई ग्रामीण युवा इस प्रतिमा को देखकर स्वयं पर यह विश्वास कर सके कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी वह आगे बढ़ सकते है तो यही इस सम्मान की सबसे बड़ी सार्थकता होगी।
संघर्ष से शुरू हुई यात्रा, जानकारी ने बदली जिंदगी
बागपत के गांव ट्यौढ़ी निवासी अमन कुमार की कहानी स्वयं इस बात का उदाहरण है कि सही जानकारी और अवसर किसी भी युवा का जीवन बदल सकते हैं। आर्थिक तंगी के बीच बचपन में उन्होंने गांव-गांव साइकिल पर अखबार बेचने का कार्य किया। उस समय यह केवल परिवार की मदद का माध्यम था, लेकिन धीरे-धीरे वही अखबार उनके जीवन के सबसे बड़े शिक्षक बन गए।
अखबार पढ़ते-पढ़ते उन्हें छात्रवृत्तियों, प्रतियोगिताओं, युवा कार्यक्रमों और सरकारी अवसरों के बारे में जानकारी मिली। उन्हें एहसास हुआ कि गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन जानकारी का अभाव अनेक युवाओं को पीछे छोड़ देता है। यहीं से उनके भीतर यह संकल्प पैदा हुआ कि अवसरों और जानकारी के अभाव में कोई युवा पीछे नहीं रहना चाहिए।
माय भारत ने दिखाई नई दिशा
अमन कुमार बताते हैं कि उनकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वह युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की इकाई माय भारत से जुड़े। माय भारत ने उन्हें स्वयंसेवा, नेतृत्व विकास, जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अनेक अवसर प्रदान किए।
गांव से शुरू हुई उनकी यात्रा जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में उन्होंने टीम उत्तर प्रदेश के ग्रुप कैप्टन के रूप में राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश के 75 जनपदों के युवाओं का नेतृत्व किया था। उनके अनुसार माय भारत ने केवल उन्हें मंच नहीं दिया, बल्कि यह विश्वास भी दिया कि गांव का युवा भी राष्ट्रीय मंचों पर अपनी सार्थक भूमिका निभा सकता है। यही कारण है कि वह आज भी युवाओं को माय भारत से जुड़कर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
एक वाक्य जिसने बदल दी पुरस्कार की परिभाषा
राष्ट्रीय युवा दिवस 2025 पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित किए जाने के बाद अमन भी अन्य लोगों की तरह इस सम्मान को अपनी उपलब्धियों का प्रतीक मान रहे थे। लेकिन माय भारत के डिप्टी डायरेक्टर अरुण तिवारी की एक बात ने उनकी सोच को नई दिशा दे दी। एक मार्गदर्शक की भूमिका में डिप्टी डायरेक्टर अरुण तिवारी ने उनसे कहा था, “किसी भी सम्मान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि उससे कितने नए विवेकानंद तैयार होते हैं।”
अमन बताते हैं कि यह वाक्य उनके मन में गहराई से बैठ गया। उन्होंने महसूस किया कि स्वामी विवेकानंद के नाम पर मिला सम्मान तभी सार्थक होगा, जब वह दूसरे युवाओं को भी समाज सेवा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित कर सके।
कैलाश सत्यार्थी से मिली प्रेरणा ने दिया अंतिम स्वरूप
इस विचार को और मजबूती तब मिली जब अमन कुमार को सत्यार्थी समर स्कूल में भाग लेने का अवसर मिला। यहां उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से सीखने और संवाद करने का अवसर प्राप्त किया। इसी दौरान उन्हें यह जानने का अवसर मिला कि कैलाश सत्यार्थी ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार राष्ट्र को समर्पित कर दिया था और आज वह राष्ट्रपति भवन में सुरक्षित है। वहां पहुंचने वाले लाखों लोग उस सम्मान को देखकर प्रेरणा प्राप्त करते हैं। वहीं हाल ही में माय भारत के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने देशभर के माय भारत से जुड़े युवाओं का पुरस्कार बताया था जिस समारोह में यूपी से अमन कुमार भी हिस्सा बने थे।
अमन बताते हैं कि इन अनुभवों से उनके मन में एक नया विचार जन्मा। यदि विश्व का सर्वोच्च सम्मान समाज और राष्ट्र की प्रेरणा बन सकता है, तो राज्य युवा पुरस्कार भी बागपत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत क्यों नहीं बन सकता। इसी विचार ने उनके प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया।
पुरस्कार ही नहीं, पुरस्कार राशि भी युवाओं के नाम
अमन कुमार की पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं है। उन्होंने पुरस्कार के साथ प्राप्त प्रोत्साहन राशि का उपयोग भी युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचार पहुंचाने में किया है। पिछले डेढ़ वर्ष में वह हजारों युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित पुस्तकें और प्रेरणादायक साहित्य पहुंचा चुके हैं। उनका मानना है कि किसी भी समाज का भविष्य उसके युवाओं के चरित्र, विचार और नेतृत्व क्षमता से तय होता है। इसलिए युवाओं को प्रेरणा के साथ-साथ सही वैचारिक दिशा मिलना भी आवश्यक है।
लाखों युवाओं तक पहुंचा अवसरों का संदेश
अमन कुमार पिछले कई वर्षों से युवाओं को शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रतियोगिता, इंटर्नशिप, नेतृत्व और करियर अवसरों से जोड़ने के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके द्वारा शुरू की गई पहल के माध्यम से देशभर के लाखों युवाओं तक विभिन्न अवसरों की जानकारी पहुंच चुकी है। तकनीक आधारित सामाजिक नवाचारों, स्वयंसेवा गतिविधियों और युवा नेतृत्व कार्यक्रमों के माध्यम से भी वह लगातार युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहचान और सम्मान प्राप्त हुए हैं।
एक सम्मान से कहीं बड़ी है यह सोच, देशभर में बनेगी मिसाल
सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं, जहां कोई युवा अपने व्यक्तिगत सम्मान को समाज और आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा के लिए समर्पित करने की पहल करे। यही कारण है कि अमन कुमार का यह प्रस्ताव समाजिक जिम्मेदारी का एक अद्भुत उदाहरण माना जा रहा है।
अमन का सपना है कि आने वाले वर्षों में जब कोई युवा इस सम्मान को देखे तो उसके मन में यह विश्वास पैदा हो कि उसकी पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसके सपने और प्रयास उसका भविष्य तय करते हैं। कभी गांव-गांव अखबार पहुंचाने वाला यह युवा आज प्रेरणा पहुंचाने के मिशन पर निकला है। उनके खुद के शब्दों में अवसरों की तरह सम्मान भी तब सबसे अधिक मूल्यवान होते हैं, जब वे दूसरों के काम आएं। शायद यही कारण है कि वह अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि को अपने पास रखने के बजाय आने वाली पीढ़ियों के सपनों को सौंप देना चाहता है।
सूचना विभाग बागपत
