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केशरी दर्पण (Keshari Darpan)

Editor Subhash Chand 9837749557

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आप सब जानते हैं भारत त्योहारों का देश है l त्योहार हमारे जीवन में किसी न किसी रूप में हर्षोल्लास, उमंग, उत्साह लेकर आते हैं l अभी अभी भारतीयों नारियों ने अपने पति के स्वास्थ्य और उनकी लंबी आयु की कामना करते हुए करवाचौथ का उपवास रखा था l और आज फिर वहीं नारी सन्तान की सुख समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य,दीर्घ आयु और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए अहोई माता का व्रत रख रही है l

By Keshari Darpan
November 1, 2026 3 Min Read
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आप कहेंगे सारे व्रत उपवास एक स्त्री के हिस्से में ही क्यों आते है l कई साथी इन्हें निरर्थक समझते है l जहां तक नारी का व्रत अथवा उपवास रखने का कारण है ये उसे पुरुष से आगे कर देते है किसी नारी का व्रत रखना, ये बताता है कि परिवार का केंद्र पुरुष नहीं बल्कि नारी है वह धर्मिक अस्था, सामाजिक परंपरा, और पारावारिक मूल्यों को निभाने में पुरूष से आगे है l
किसी भी व्रत अथवा त्योहार के पीछे धार्मिक आस्था, सामाजिक परंपरा और पारिवारिक मूल्य होते है और इन्हें निभाने मे परिवार की नारी सदैव पुरूष से आगे रहती है l

अहोई अष्टमी के संबंध में प्रचलित लोककथाओं का आधार एक ऐसी माता की कथा है, जो अनजाने में हुई एक भूल के कारण गहरे पश्चात्ताप से भर जाती है। लोकमान्यता के अनुसार, एक साहूकार की पत्नी दीपावली से पूर्व घर की मरम्मत के लिए मिट्टी लेने जंगल गई थी। मिट्टी खोदते समय उससे अनजाने में साही के बच्चों को चोट पहुँच गई। इस घटना के बाद उसके बच्चों पर संकट आया। दुःखी माता ने अहोई माता की श्रद्धापूर्वक आराधना और प्रार्थना की। उसकी भक्ति और पश्चात्ताप से प्रसन्न होकर माता ने उसे आशीर्वाद दिया। तभी से संतान की मंगलकामना के लिए अहोई माता का व्रत रखने की परंपरा प्रचलित होने की मान्यता है।

कोई भी नारी ममता और नारीत्व के बिना अधूरी है यह व्रत उसकी पूर्णता का प्रतीक है l अहोई का व्रत समस्त समाज को संदेश देता है कि प्रत्येक जीव के प्रति दया, करुणा और संवेदनशीलता का भाव रखना चाहिए।

अहोई का व्रत अधिकतर उत्तर भारत में मनाया जाता है l माताएँ प्रातःकाल से व्रत रखती हैं और संध्या के समय अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। घर की दीवार पर गेरू अथवा अन्य रंगों से अहोई माता का चित्र बनाती है। चित्र में माता के साथ साही और उसके बच्चों की आकृतियाँ भी बनाई जाती हैं। पूजा के समय दीप प्रज्वलित किया जाता है, पुष्प अर्पित किए जाते हैं तथा अहोई माता की व्रत कथा सुनी जाती है। संध्या के समय आकाश में तारों के दर्शन करने के बाद अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करने की परंपरा है। चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है।

धार्मिक मान्यताओं में अहोई माता को संतान की रक्षक और मातृत्व की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। अनेक परिवारों में उन्हें माता पार्वती का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। माताएँ अपनी संतान के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना से यह व्रत करती हैं। जिन दंपतियों को संतान की अभिलाषा होती है, वे भी श्रद्धापूर्वक अहोई माता की आराधना करती हैं।

इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें माता और संतान के बीच के निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण की भावना दिखाई देती है। यह केवल उपवास या पूजा का दिन नहीं, बल्कि परिवार के प्रति उत्तरदायित्व और संतान को अच्छे संस्कार देने के संकल्प का अवसर भी है।

अहोई अष्टमी हमें स्मरण कराती है कि माता का प्रेम संसार की सबसे पवित्र भावनाओं में से एक है। संतान के प्रति उसका समर्पण किसी स्वार्थ से प्रेरित नहीं होता, बल्कि उसमें केवल अपने बच्चों के सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना निहित रहती है।

माता अहोई आपके परिवारजनों पर अपनी कृपा बनाए रखें l

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सुप्रभात 🙏

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Keshari Darpan

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🍃Arogya🍃मोटापा हाय रे मोटापा——————–मोटापे को लेकर कई लोग परेशान रहतें हैं और इससे छुटकारा पाना चाहतें हैं ! कुछ उपाय ढूंढकर उनको प्रयोग में लातें हैं लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि हर उपाय हर आदमी के लिएफायदेमंदनहीं हो पाता है जिसके कारण उनको निराश होने कि आवश्यकता नहीं है और उनको दुसरा उपाय अपनाना चाहिए !आज में आपके सामनें मोटापे को दूर भगाने के लिए कुछ सामान्य आयुर्वेदिक नुस्खेँ लेकर आया हूँ! जिनका प्रयोग करके फायदा उठाया जा सकता है !

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