एआई ने एक महीने में एंटीबॉडी के 35,000 डिजाइन बनाए, अब तेजी से बनेगी दवा
- एंथ्रोपिक का क्लॉड एआई खाने से होने वाली एलर्जी का इलाज ढूंढ रहा
- इसने सात ऐसी समस्याओं को भी पहचाना जिसे विशेषज्ञ नहीं पकड़ पाए
नई दिल्ली। एआई अब दवा बनाने के काम में भी इंसानों को टक्कर दे रहा है। एंथ्रोपिक ने बताया है कि उसने अपने एआई मॉडल क्लॉड की मदद से खाने से होने वाली एलर्जी के इलाज के लिए करीब 35 हजार एंटीबॉडी डिजाइन तैयार किए हैं। इन्हें तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगा।
इस शोध का उद्देश्य दवाएं बनाने की प्रक्रिया को तेज करना और एलर्जी समेत कई बीमारियों के नए इलाज खोजने में एआई का इस्तेमाल करना है। एंथ्रोपिक ने बायोटेक्नोलॉजी कंपनी डाइवर्जेंस लैब्स के साथ मिलकर यह काम किया है। इस शोध में ऐसी दवा बनाने पर ध्यान दिया गया जो एलर्जी पैदा करने वाले एक खास अणु इम्युनोग्लोबुलिन ई (आईजी ई) को इम्यून कोशिकाओं से हटाने में मदद कर सके।
20 में से तीन डिजाइन बेहतर निकले
एंथ्रोपिक के मुताबिक, 20 डिजाइन ऐसे मिले जो इम्यून कोशिकाओं से आईजी ई को हटाने में सक्षम दिखाई दिए। इन 20 में से तीन ने आईजी ई को हटाने के मामले में सामान्य दवाओं दवा से बेहतर प्रदर्शन किया। अब अगला कदम ऐसे डिजाइन बनाना है जिनमें आईजी ई से जुड़ने और उसे इम्यून कोशिकाओं से हटाने जैसी दोनों क्षमताएं एक साथ हों।
कैंसर के इलाज में भी मदद
एंथ्रोपिक दवा विकसित करने वाली छह संस्थाओं के साथ काम कर रही है। कंपनी ने दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए अपने स्तर पर भी रिसर्च प्रोग्राम शुरू किए हैं। एक अन्य प्रोजेक्ट में क्लॉड एआई सीएआर-टी सेल थेरेपी पर बायोटेक कंपनी जेनरेट बायोमेडिसिन्स को मदद दे रही है। इसका इस्तेमाल कैंसर के इलाज में किया जाता है।
जांच का समय 89 फीसदी घटा
- क्लॉड एआई ने दवा निर्माण से जुड़े 1,061 पन्नों के दस्तावेजों की समीक्षा की।
- इसने मानव विशेषज्ञों की ओर से पहचानी गई सभी 11 समस्याओं को पकड़ लिया।
- सात ऐसी समस्याओं को भी पहचाना जिसे विशेषज्ञ नहीं पकड़ पाए।
- एआई से दस्तावेजों की जांच में लगने वाला समय 89 फीसदी कम हुआ।
- जहां पहले इस काम में 25 घंटे से अधिक लगते थे, एआई ने इसे तीन घंटे से भी कम समय में कर दिया।
एआई से दवा निर्माण और ट्रायल में मिलेगी मदद
इंसान जब कोई दवा बनाता है तो उसके परीक्षण से लेकर बाजार में आने तक आमतौर पर 10 साल का समय लग सकता है। वैज्ञानिक कई चरणों में बीमारी का कारण समझकर कोई फॉर्मूला बनाते हैं। पहले जानवरों पर इसके असर का परीक्षण होता है। दवा की सुरक्षा और प्रभाव पर कई दस्तावेजों का आकलन किया जाता है। इंसानों पर दवा के प्रभाव का अलग-अलग चरणों में परीक्षण किया जाता है। स्वास्थ्य नियामकों से मंजूरी और बड़े पैमाने पर उत्पादन में समय लगता है। एआई इन सभी चरणों में लगने वाले समय को घटा सकता है। एआई कम समय में डाटा का विश्लेषण कर दवाओं के हजारों डिजाइन सुझा सकता है। इसके असर का विश्लेषण करने में भी एआई से समय की बचत होती है।