डीएम अस्मिता लाल की पहल से स्कूलों में बढ़ेगा आराम, पढ़ाई में आएगी रफ्तार, हीटवेव से बच्चों को मिलेगी सुरक्षा
बागपत 22 मई 2026 — दोपहर के समय सरकारी स्कूलों की गर्म होती छतें, कक्षाओं में बढ़ता तापमान और पसीने के बीच पढ़ाई करते बच्चे— गर्मियों में यह दृश्य अक्सर देखने को मिलता है। लेकिन अब बागपत इस तस्वीर को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। जिले के विद्यालयों में शुरू की जा रही ‘कूल रूफिंग पहल’ बच्चों को गर्मी से राहत देने के साथ शिक्षा के माहौल को भी नया रूप देगी।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में जिले में हीटवेव को लेकर तैयारियों को अब नई सोच से जोड़ा जा रहा है। लक्ष्य यह है कि सरकारी विद्यालय केवल पढ़ाई की जगह न रहें, बल्कि ऐसे परिसर बनें जहां बच्चे सुरक्षित, सहज और बेहतर वातावरण में सीख सकें।
इसके तहत विद्यालयों की कंक्रीट छतों पर विशेष सफेद परावर्तक सतह विकसित की जाएगी ताकि धूप की गर्मी सीधे भवन के अंदर न पहुंचे। इसका असर सबसे पहले बच्चों पर दिखाई देगा। कक्षाएं पहले की तुलना में कम गर्म रहेंगी, बच्चों को बैठने में आसानी होगी और पढ़ाई का माहौल अधिक अनुकूल बनेगा।
गर्मी के दिनों में अक्सर बच्चे जल्दी थक जाते हैं, बार-बार पानी पीते हैं और उनका ध्यान पढ़ाई से हटने लगता है। ऐसे में यह पहल बच्चों को राहत देने के साथ उनकी सीखने की क्षमता को भी मजबूती देगी। शिक्षक भी बेहतर वातावरण में पढ़ा सकेंगे और कक्षाओं में सक्रियता बढ़ेगी।
इस अभियान की सोच केवल दीवारों और छतों तक सीमित नहीं रहेगी। स्कूल परिसरों में हरियाली बढ़ाई जाएगी, छायादार स्थान विकसित होंगे और प्राकृतिक ठंडक को बढ़ावा दिया जाएगा। जहां संभव होगा वहां सौर ऊर्जा और कूल रूफ को जोड़कर विद्यालयों को ऊर्जा बचत के मॉडल के रूप में भी आगे बढ़ाया जाएगा।
कूल रूफ तकनीक की खासियत यह है कि इसमें ऐसी सतह विकसित की जाती है जो धूप की गर्मी को कम सोखे और अधिक वापस परावर्तित करे। इसके लिए सफेद परावर्तक परत, विशेष पेंट, चूना आधारित सतह, विशेष टाइल्स या ताप नियंत्रित करने वाली सामग्री का उपयोग किया जाता है। इससे छत कम गर्म होती है और उसका सीधा लाभ कक्षाओं के अंदर महसूस होता है।
देश में किए गए कई अध्ययनों और विभिन्न सरकारी प्रयोगों में सामने आया है कि कूल रूफ व्यवस्था से भवनों के अंदर का तापमान सामान्य स्थिति की तुलना में लगभग 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है। स्कूलों के संदर्भ में इसका अर्थ केवल ठंडी कक्षा नहीं बल्कि बच्चों के लिए अधिक आरामदायक माहौल, बेहतर ध्यान और गर्मियों में भी नियमित पढ़ाई से है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रहेगी कि शुरुआत उन बच्चों से होगी जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। प्राथमिक विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता देकर छोटे बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और आरामदायक वातावरण तैयार किया जाएगा।
इस पहल से गर्मी के दिनों में विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बेहतर होगी, अभिभावकों का भरोसा मजबूत होगा और सरकारी स्कूलों की नई पहचान बनेगी। बिजली की खपत कम होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा।
सूचना विभाग बागपत
