जिन हाथों में कभी सुबह-सुबह अखबारों का बंडल होता था, उन्हीं हाथों में आज हजारों युवाओं के सुझावों की सूची थी। कभी गांव की गलियों में साइकिल चलाकर घर-घर खबर पहुंचाने वाला बागपत का एक युवा आज देश के बड़े मंचों पर युवाओं के भविष्य, अवसरों और भागीदारी की बात कर रहा है।
यह कहानी है बागपत के अमन कुमार की।
बचपन में आर्थिक परिस्थितियों के बीच अमन ने वह समय भी देखा, जब जिम्मेदारियां उम्र से पहले सामने आ गईं। गांव-गांव साइकिल पर अखबार पहुंचाना उस दौर की जरूरत था। लेकिन उस सफर ने उन्हें एक ऐसी चीज दी, जिसने आगे चलकर उनकी सोच बदल दी— जानकारी की ताकत।
अमन बताते हैं कि अखबार बांटना एक काम था, लेकिन उन्हें पढ़ना एक आदत बन गया। खबरों के बीच योजनाएं दिखीं, छात्रवृत्तियां दिखीं, ऐसे युवाओं की कहानियां दिखीं जिन्होंने हालात से आगे बढ़कर अपनी पहचान बनाई। धीरे-धीरे उनके मन में एक सवाल पैदा हुआ— अगर जानकारी किसी की जिंदगी बदल सकती है, तो यह हर युवा तक क्यों नहीं पहुंचती?

यहीं से एक सोच जन्मी— जो मैंने सहा, कोई और न सहे… और कोई युवा सिर्फ जानकारी, अवसर या मार्गदर्शन के अभाव में पीछे न रह जाए।
अमन की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वे युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के माय भारत मंच से जुड़े। इसी दौरान डिप्टी डायरेक्टर अरुण तिवारी ने उनके काम और क्षमता को पहचानते हुए उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। अमन कहते हैं कि माय भारत ने उन्हें यह भरोसा दिया कि छोटे गांव का युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर असर पैदा कर सकता है।
इसके बाद उन्होंने अपने सफर को व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखा। प्रोजेक्ट कॉन्टेस्ट 360 के माध्यम से उन्होंने देशभर के 84 लाख युवाओं तक शिक्षा, करियर और विभिन्न अवसरों की जानकारी पहुंचाने का प्रयास शुरू किया। उनका मानना है कि कई बार युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं होती, जानकारी और पहुंच की कमी उन्हें पीछे कर देती है।
बागपत में भी अमन ने प्रशासन के साथ स्वैच्छिक रूप से जुड़कर कई तकनीकी समाधान विकसित करने में योगदान दिया। कांवड़ यात्रा ऐप, स्वीप बागपत ऐप और सूचना सेतु ऐप जैसी पहलों के जरिए उन्होंने तकनीक को लोगों के करीब लाने का प्रयास किया। ई-गवर्नेंस और जनभागीदारी के क्षेत्र में उनके काम को स्थानीय स्तर पर भी सराहना मिली।

हाल ही में अमन कुमार को विशेष आमंत्रण पर केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के साथ संवाद का अवसर मिला। लेकिन दिल्ली पहुंचकर उन्होंने सिर्फ अपनी कहानी नहीं सुनाई।
उन्होंने पहले गांव, जनपद और प्रदेशभर के हजारों युवाओं से बातचीत की, उनके विचार और सुझाव जुटाए और करीब 40 सुझावों का संकलन तैयार कर मंत्री के सामने रखा। इन सुझावों में युवाओं के अवसर, नेतृत्व, भागीदारी और विकसित भारत में उनकी भूमिका जैसे विषय शामिल रहे।
डॉ. मनसुख मांडविया ने इन प्रयासों की सराहना की और युवाओं को विकसित भारत के लिए पंच प्रण अपनाकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस दौरान अमन ने बागपत के युवाओं के लिए मंत्री से एक विशेष ऑटोग्राफ भी प्राप्त किया।
पिछले पांच वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय अमन, माय भारत से संबद्ध उड़ान यूथ क्लब के अध्यक्ष भी हैं। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में उन्होंने उत्तर प्रदेश के ग्रुप कैप्टन के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के समक्ष प्रदेश के युवाओं के दल का नेतृत्व भी किया।
उनकी यात्रा को कई मंचों पर पहचान मिली। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के सर्वोच्च युवा सम्मान स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2025 में उन्हें स्वयंसेवा क्षेत्र में राष्ट्रीय आई वॉलंटियर यूथ चैंपियन पुरस्कार भी मिला। हाल ही में उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी उन्हें 75 जिलों के युवाओं के बीच यूथ आइकॉन के रूप में सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर अमन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहे हैं। वे यूनेस्को, हंड्रेड सहित विभिन्न संस्थानों के साथ युवाओं, नेतृत्व और अवसरों से जुड़े विषयों पर काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी भी सम्मानित कर चुके हैं।

दिल्ली से लौटने के बाद अमन ने बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल और जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी के साथ अपने अनुभव साझा किए और युवाओं को आगे बढ़ाने में प्रशासन की भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया।
लेकिन अमन की कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा यह है कि जिस बच्चे ने कभी घर-घर खबर पहुंचाई, आज वह चाहता है कि देश के किसी गांव का कोई युवा सिर्फ इसलिए पीछे न रह जाए क्योंकि उसे समय पर यह पता ही नहीं चला कि आगे बढ़ने का रास्ता भी मौजूद था।
