
ग्राम जसाला जनपद शामली के मोनू कश्यप हत्याकांड को लेकर कल जो घटनाक्रम सहारनपुर कमिश्नरी DIG कार्यालय में हुआ, उसने पूरे क्षेत्र में गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में पहले कैराना क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर पीड़ित पक्ष लगातार सवाल उठा रहा था। पीड़ित पक्ष का आरोप था कि कांधला थाना स्तर पर जांच को प्रभावित किया जा रहा है तथा उस समय कैराना क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों की भूमिका निष्पक्ष नहीं दिखाई दे रही थी। बाद में जांच को थाना भवन क्षेत्राधिकार में दिए जाने की बात सामने आई, जिससे पीड़ित पक्ष को कुछ उम्मीद जगी थी। लेकिन बाद में पुनः वही प्रशासनिक ढांचा सक्रिय होता दिखाई दिया, जिस पर पहले सवाल उठाए गए थे।
कल इसी संदर्भ में सहारनपुर अजय मेहरा, अनुज कश्यप (प्रदेश उपाध्यक्ष, कश्यप एकता क्रांति मिशन) तथा उनके कई साथी सहारनपुर कमिश्नरी कार्यालय मृतक मोनू कश्यप की मां को लेकर पहुंचे थे।
उनका उद्देश्य केस की जांच की प्रगति, पारदर्शिता और निष्पक्षता के संबंध में जानकारी लेना तथा पीड़ित परिवार की ओर से अपनी बात रखना था।
पीड़ित पक्ष और वहां मौजूद लोगों का कहना है कि मृतक की मां के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।
जब जांच की प्रगति और कार्यशैली पर सवाल उठाए गए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिले।
आरोप यह भी है कि अपनी बात रखने वाले लोगों को कार्यालय से बाहर निकल जाने के लिए कहा गया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया।
इसके बाद हालात बिगड़ गए और वहां मौजूद लोगों पर रास्ता अवरुद्ध करने जैसे आरोप लगाए गए।
शाम तक स्थिति यह रही कि महिला को थाने में बैठाया गया तथा पूर्व मंत्री श्री मांगेराम कश्यप, अजय मेहरा,अनुज कश्यप और उनके कई साथियों को जेल भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि देर रात तक हजारों लोग वहां मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम को लेकर भारी आक्रोश दिखाई दिया।
समाज के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि न्याय की मांग करने वालों के खिलाफ इतनी त्वरित कार्रवाई क्यों दिखाई?, जबकि मूल अपराध और उससे जुड़े लोगों के विरुद्ध वैसी कठोरता और पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई?
लोग यह भी कह रहे हैं कि जब भी कोई व्यक्ति या संगठन पीड़ित पक्ष के समर्थन में मजबूती से खड़ा होता है, तब उसके पुराने वक्तव्य, भावनात्मक प्रतिक्रियाएं या शाब्दिक त्रुटियां निकालकर उसे विवादों में घेर दिया जाता है।
फिर जातीय माहौल बनाया जाता है, सामाजिक दबाव खड़ा किया जाता है, और पीड़ित पक्ष का समर्थन करने वालों को अलग-थलग करने का प्रयास किया जाता है। कुछ समाज के हराम टाइप के लोग सामंतियों, हत्यारो के साथ भाईचारे की बात करते हैं।
यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पीड़ित पक्ष की महिलाओं, बुजुर्गों और रिश्तेदारों को माध्यम बनाकर दबाव तैयार किया जाता है, ताकि न्याय की आवाज कमजोर पड़ जाए और अंततः वही समझौता हो जो प्रभावशाली लोग चाहते हैं।
आज जनपद सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग यह महसूस कर रहे हैं कि न्याय की मांग करने वालों को “कानूनी व्यवस्था का खतरा” बताकर दबाया जा रहा है, जबकि अपराधी नेटवर्कों के विरुद्ध समाज वैसी दृढ़ता महसूस नहीं कर पा रहा।
यदि सांसद इकरा हसन, पूर्व राज्य मंत्री मांगेराम कश्यप जनपद सहारनपुर में ग्राम जसाला मोनू कश्यप हत्याकांड को लेकर कल जो घटनाक्रम सहारनपुर कमिश्नरी DIG कार्यालय में हुआ, उसने पूरे क्षेत्र में गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
लोग यह भी कह रहे हैं कि जब भी कोई व्यक्ति या संगठन पीड़ित पक्ष के समर्थन में मजबूती से खड़ा होता है, तब उसके पुराने वक्तव्य, भावनात्मक प्रतिक्रियाएं या शाब्दिक त्रुटियां निकालकर उसे विवादों में घेर दिया जाता है।
फिर जातीय माहौल बनाया जाता है, सामाजिक दबाव खड़ा किया जाता है, और पीड़ित पक्ष का समर्थन करने वालों को अलग-थलग करने का प्रयास किया जाता है।
आज जनपद सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग यह महसूस कर रहे हैं कि न्याय की मांग करने वालों को “कानून व्यवस्था का खतरा” बताकर दबाया जा रहा है, जबकि अपराधी नेटवर्कों के विरुद्ध समाज वैसी दृढ़ता महसूस नहीं कर पा रहा।
यदि सांसद, पूर्व राज्य मंत्री, सामाजिक संगठन और पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े रिश्तेदार तथा समाज के लोग भी इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तो सामान्य गरीब और संसाधन-विहीन परिवार अपने आपको कितना असुरक्षित महसूस करते होंगे — यह स्वयं एक बड़ा प्रश्न है।
समाज की मांग केवल इतनी है कि ग्राम जसाला मोनू कश्यप हत्याकांड की निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावमुक्त जांच हो, पीड़ित परिवार को न्याय मिले, और न्याय की मांग उठाने वालों को अपराधी की तरह न देखा जाए।, सामाजिक संगठन और पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े लोग भी इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तो सामान्य गरीब और संसाधन-विहीन परिवार अपने आपको कितना असुरक्षित महसूस करते होंगे — यह स्वयं एक बड़ा प्रश्न है।
महिला नारी शक्ति सांसद इकरा हसन को बहुत बहुत धन्यवाद इसी प्रकार के नेता अगर जिले में हो तो देश सुधार जायेगा। प्रशासन की कार्यशैली बहुत ही निंदनीय, तानाशाही है मृतक मोनू कश्यप की तरफ से पैरावाई कर रहे श्री मांगेराम कश्यप पूर्व मंत्री तथा अन्य चार कश्यप समाज के नौजवान युवको को ही जेल में डाल दिया ये कौन सा कानून है।
✍️AKS
