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देख लीजिए पूरी जिंदगी Congress के सबसे बड़े नेताओं मतलब प्रधान मंत्रियों तक, उस लेवल के नेताओं के जूठे घोटाले उजागर किए और Congress के किसी भी नेता ने इन्हें आज तक परेशान नहीं किया ! उनका नाम है प्रशांत भूषण वो और उनके पिता Congress के घोर विरोधी रहे हर प्रकार के आरोप लगाए, चाहें राजीव गांधी जी हो या सोनिया जी, आज उन्होंने खुद साक्षात्कार किया है, माना है की आज पूरे देश में एक ही नेता है Rahul Gandhi जी, जिन्हें मैं सही माइनॉ में एक सच्चा जन#नायक मानता हूं !

प्रशांत भूषण जेसे लोग जिन्होंने Congress की सरकारों में बिना डर हर Congress के पी#एम के ख़िलाफ़ देश की SC के अंदर हर इल्ज़ाम लगाए कभी भी इन लोगों को कोई डर नहीं लगा, ना कॉंग्रेस से, ना प्रधानमंत्रियों से, ना गुं#डों से, ना SC से !

आज प्रशांत भूषण खुद हार चुके हैं और राहुल को आज का सर्वोत्तम निडर और मर्द के साथ#आज जितने भी नेता है उसमें पुरुषोत्तम बताया, जो खुद किसी से नहीं डरते और हमेशा लड़ते रहे है !

मैंने कहा था मोदी सरकार खुद साबित करेगी और कॉंग्रेस को सर्टिफिकेट देगी, की कॉंग्रेस ही हर तरह से बेस्ट थी, हैं और रहेगी ! Prashant Bhushan

दूसरे योगेन्द्र यादव, वो आज भी अपने Character के साथ जुड़े हुए है और बिल्कुल Respected है, उन्हें क्या मिला ये महत्व पूर्ण नहीं, लेकिन इन गिद्धों के बीच वो भटके नहीं !
Yogendra Yadav ये उनकी जीत है !

तीसरे आशुतोष औऱ चौथी Alka Lamba

अब ये चार भी कब#तक अपने उसूलों पर कायम रहते है ये वक्त तय करेगा पर आज की तारीख में, जब मैं ये लिख रहा हूँ इनकी वैल्यू अभी भी बरकरार है, क्योंकि ये कंही अंदर ही अंदर मान चुके है की कॉंग्रेस ही देश का सर्वोत्तम विकल्प है !

बाकी जितने भी है वो सारे ग़द्दार, लालची साबित हो चुके हैं या अगर एक#दो अच्छे भी हो, तो भी इतने सालों में अपनी पहचान नहीं बना पाए हैं, ये सारे, Including Dr. Kumar Vishwas भी, दोगला साबित हो चुका है क्योंकि वो भी बिन पेंदी का लोटा है, कभी इधर तो कभी उधर !

सागर शाह ( चिराग )
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“आरक्षण चोर, गद्दी छोड़” के नारों के साथ 69 हजार शिक्षक भर्ती में हुए आरक्षण घोटाले के पीड़ित दलित एवं पिछड़े समाज के युवाओं ने मुख्यमंत्री आवास, लखनऊ का घेराव किया।प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि इस भर्ती में आरक्षण के नियमों का उल्लंघन किया गया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का हक मारा गया। इस मामले को स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा भी स्वीकार किया गया था, जिसके बाद 6800 पदों की एक नई सूची जारी की गई।इसके बावजूद आज तक पीड़ित अभ्यर्थियों को न तो न्याय मिला है और न ही नियुक्ति (जॉइनिंग) दी गई है। साथ ही, कोर्ट में भी सरकार द्वारा मजबूत पैरवी नहीं की जा रही है, जिससे मामला लगातार लंबित बना हुआ है।

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