कोई कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाने के बाद ये समझने की भूल ना कर बैठना की जो रुतबा, पैसा, पद, गरिमा, शोहरत, सम्मान, तुम्हें मिल रहा है वो सब तुम्हारी मेहनत, योग्यता, काबिलियत व संघर्षों से मिला है? नहीं ये हजारों सालों का तुम्हारे पूर्वजों के बलिदानी के संघर्षों का नतीजा है ! जिसे तथागत महामानव गौतम बुद्धि से लेकर सम्राट अशोक का त्याग तिलका के खून का तिलक निषादराज के पराकर्म जुब्बा साहनी का बलिदान डा जोगेंद्र नाथ मंडल के त्याग तपस्या समर्पण झलकारी बाईं की गोलियों से छलनी की हुई शरीर, एक्लव्य का दान फुले सावित्री बाई के शिक्षा की दान शाहू का आरक्षण का आगाज अंबेडकर संघर्ष राय साहब रामचरण निषाद जी का इंकलाब भगत सिंह हंसता हुआ मौत उद्यम सिंह का लन्दन में बदला लेकर मौत का कबूलनामा रानी राशमती निषाद की त्याग मुंबा देवी कोली की ललकार, विलास देवी निषाद की फिरंगियों से मरते दम तक युद्ध अवनति बाई लोधी की लड़ते लड़ते मौत फूलन देवी की अस्मिता की दुष्टदलन से सांसद तक सफ़र संदेश दिया है झुकना नहीं प्रतिकार करना है सभ्यता व सम्मान के लिए हद पार करना है लाखों लोगों की बलिदानी का फल आज कुछ कुछ मिल रहा है न्याय के लिए लड़ते रहना हैजय निषाद राज महामंत्र से सत्ता पर कब्जा करना है यही हमारे पूर्वजों के शहीदों का संदेश है* जय निषाद राज साहब आनन्द निषाद जी का विचारधारा है सुरेश निषाद के कलम से