इनके हलक में हाथ डाल कर सरकार मांझी समाज ही बदल डालेगा 80 सीट 100 वोट से 2000 हजार वोटो से जीता है भाजपा
उन सभी का सर्वे किए जा रहे हैं
मध्यप्रदेश में मांझी समाज अब जाग चुका हैं साहब आनंद निषाद जी ने 17 में तीन विधानसभा उप चुनाव मुंगावली कोलारस चित्रकूट में अपने नाव छाप से अपनी पार्टी से उपचुनाव लड़वा कर दिखा दिए थे लाख शिवराज सिंह चौहान और नरेन्द्र सिंह तोमर दोनों के मनाने पड़ नहीं माने थे चुनाव लड़कर कर दिखा दिए थे कैसे चुनाव हराया जाता है ये दोनों नेता साहब आनंद निषाद जी के भोपाल निवास पर रात में गए थे बोले थे चुनाव हार जायेगे तो नाक कट जाएगा कुर्सी चले जाने की दुहाई दे रहा था लेकिन साहब आनंद निषाद जी नहीं माने अंत में मुंगावली के प्रत्याशी राज कुमार नागर को किडनैप करवा लिया था ज्योति सिंधिया ने उस वक्त सिंधिया कांग्रेस में था साहब आनन्द निषाद जी का मुंगावली स्टेशन रोड पर किराए के दो रूम लिए थे रात में चुनाव से 7 दिन पहले SP को भेज कर दोनों रुम जबरन खाली करवा दिया था रात भर कड़ाके की ठंड में मुंगावली स्टेशन पर 12 साथियों के साथ गुजरे सुबह को स्टेशन के पास वाले गांव में जाकर समाज के यहां रुक कर पार्टी का प्रचार किया अंत में परिणाम आया तीनों सीटों पर भाजपा व शिवराज सिंह चौहान और नरेन्द्र सिंह तोमर की हार हुआ था
तीनों उपचुनाव में कांग्रेस की जीत हुआ था
बदहवास हो चुकी कांग्रेस में जान आ गया और साल भर में पासा ही पलट गया था कांग्रेस की सरकार बन गई थी लेकिन आपसी लड़ाई में सिंधिया ने गद्दारी किया था आज क्या मिला बाबा जी का ठुल्ला CM का सपना सपना ही रह गया
गद्दारों को यही सजा मिलता है भाजपा के गुणगान करने वाले सिंधिया जैसे होगा उसने तो मंत्री पद ले कर आठ आठ आसू अंदर अंदर रो रहा है
लेकिन आपको क्या मिला है और ना मिलेगा क्योंकि भाजपा में जो हैं उनका जमीर की मौत हो चुका है वे गुलाम हैं वे अपने लिए मांगते भी हैं लेकिन उनका मालिक देता ही नहीं है क्योंकि एक अनार सौ बीमार वाली बात है
उपचुनाव के हार के बाद शिवराज सिंह चौहान ने साहब आनंद निषाद जी को बुलाया था उस वक्त भी ही साहब आनंद निषाद जी को प्रलोभन दिए गए थे लेकिन जमीर जिंदा हैं साथियों अगर वे अपने जमीर को मार दिए होते तो आज राज सभा चले गए होते लेकिन जमीर जिंदा रखे हुए हैं और अंत तक जमीर समाज के लिए जिंदा रखेंगे
साहब आनंद निषाद जी के प्रयास से 1•1•18 का आदेश हुआ था तो हजारों मांझी समाज के फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मुद्दा को हल निकाल कर आदेश जारी करवाए थे साहब आनंद निषाद जी ने एक कप चाय भी समाज का नहीं पीए थे लेकिन मौका मिला तो काम कर के दिखाए है
फिर वही वक्त और माहौल बनता जा रहा है
साहब आनंद निषाद जी करने वाले में से हैं
सिर्फ समाज के नौटकीवाज फर्जी नेताओं को देख रहे हैं
आकलन कर रहे हैं
करने के लिए तेल पानी लगता हैं साहब आनंद निषाद जी ने अपने दम पर उपचुनाव लड़वाए थे किसी से चंदा नहीं लिए थे
अपना घर फूक कर तमाशा देखे हैं और करते भी है
अगर ग्वालियर में उस दिन साहब आनंद निषाद जी होते तो विच भीड़ में ही नरेन्द्र सिंह तोमर मुर्दाबाद बोलते इतनी ताकत रखते हैं मंच मांझी समाज का और एक विधायक बोल कर चला जाता है तुम्हारा आरक्षण मांगना नजायज है
ये तो सरासर गलत हैं अनुचित है
ये बात सुनने वाले भी गलत और नामर्द थे जो विरोध नहीं कर सके
लानत हैं ऐसे ग्वालियर के मांझी समाज को जो सुन लिया
वहीं ग्वालियर हैं जहां फूलन देवी की नाम सुनते ही 81 से 12 फरवरी 83 तक ठाकुरों ब्राह्मणों के पेंट गिले हो जाते थे फूलन के नाम सुनते ही उनके घर के दरवाजे बन्द हो जाते थे रोड सुना हो जाता था हमलोग उन्हीं के खून के हैं
इसका बदला लेकर रहेंगे सत्ता से बेदखल कर के
निषादों के खून में जब उबाल आया था तो नवंबर 2011 में बांदा DM को गिरेबान पकड़ कर शीलू निषाद बलात्कार कांड के न्याय के लिए पटक कर साहब आनंद निषाद जी ने मारे थे और जेल चले गए वहां आमरण अनशन किए CBI बहाल करवाए 23 दिन बाद जेल से निकले थे तो निषाद कश्यप वंशज से हाथ जोड़े थे मायावती को सरकार से बेदखल किए थे बेटी शीलू निषाद को न्याय मिला DM SP व मंत्री पुरषोत्तम द्विवेदी को उम्र कैद मिला मंत्री ग्लानि से आत्महत्या कर लिए लेकिन DM SP SHO आज भी उम्रकैद भुगत रहा है
निषादों का खून है नरेन्द्र सिंह तोमर की सरकार से बदला लिया जाएगा बेदखल कर के
लेकिन इस बार सरकार बदलेगा उसमें हिस्सेदारी भी रहेगा भीख नहीं मांगते है अपना अधिकार मांगते है
ग्वालियर के मंच में सभा में कोई मर्द नहीं था जो एक ठाकुड़ के बेतुकी बात सुन लिए साहब आनंद निषाद जी होते तो दिखा देते की निषादों के खून कैसे उबाल मरता है
जय निषाद राज जय मांझी जय सम्राट अशोक जय भारत सुरेश निषाद के कलम से