जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन आज, स्थापना के श्रेय का वास्तविक हकदार कौन?
शिलान्यास के ठीक चार वर्ष चार महीने और तीन दिन बाद होने जा रहे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन आज 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों जेवर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की दशा और दिशा को बदल देने की संभावनाओं वाले इस हवाई अड्डे के प्रथम चरण का औपचारिक उद्घाटन हो जाएगा। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की तैयारियों को जिला प्रशासन गौतमबुद्धनगर ने जहां अंतिम रूप दे दिया है वहीं उद्घाटन के बाद होने वाली प्रधानमंत्री की जनसभा को ऐतिहासिक बनाने के लिए भाजपा संगठन और जनप्रतिनिधियों ने युद्ध स्तर पर तैयारियां की हैं।
पच्चीस वर्ष पहले अतिपिछड़े समझे जाने वाले जनपद गौतमबुद्धनगर के जेवर क्षेत्र को कल हवाई उड़ान जैसे अत्याधुनिक यातायात के एक ठिकाने का उपहार मिल जाएगा। इस हवाई अड्डे के निर्माण में महज चार वर्ष चार महीने और तीन दिन का समय लगा जो देश में बने किसी भी अन्य हवाई अड्डे के मुकाबले बेहद कम है परंतु इसे जेवर में स्थापित होने के लिए पच्चीस छब्बीस साल लग गए।2001 में खुर्जा लोकसभा क्षेत्र जो अब गौतमबुद्धनगर हो गया है, के तत्कालीन भाजपा सांसद अशोक प्रधान दावा करते हैं कि यह हवाई अड्डा उनके आग्रह पर जेवर में बनना तय हुआ था।उस समय गौतमबुद्धनगर जिले का हिस्सा होने के बावजूद नोएडा ग्रेटर नोएडा से जेवर पहुंचने के लिए दिल्ली हरियाणा होकर जाना पड़ता था।बकौल अशोक प्रधान उन्होंने इस क्षेत्र के अति पिछड़ेपन को दूर कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई से यहां एयरपोर्ट बनाने की मांग की थी। प्रधानमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्र को जेवर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि समय की धूल पूर्व में किए गए प्रयासों को धुंधला या अदृश्य कर देती है। इसका एक जीता-जागता उदाहरण नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे भी है जिसका शिलान्यास भी अशोक प्रधान ने किया था जो सरकारी अभिलेखों में दर्ज है परंतु अब वहां पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के नाम का शिलापट्ट लगा है। वर्तमान में जेवर एयरपोर्ट का सर्वाधिक श्रेय कौन ले रहा है? एयरपोर्ट के चारों ओर जेवर विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह के होर्डिंग लगे हैं। कभी इसके लिए वर्तमान सांसद डॉ महेश शर्मा को श्रेय दिया जाता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अवश्य इस हवाई अड्डे की यहां स्थापना के श्रेय के वास्तविक हकदार हैं जिन्होंने पिछली सरकारों के समय कभी टूंडला और कभी आगरा के बीच झूल रहे इस हवाई अड्डे को वापस जेवर में बनाने का न केवल ठोस प्रस्ताव केंद्र को भेजा बल्कि उसे धरातल पर भी उतार दिया। हालांकि कल उद्घाटन होने के बावजूद यहां से उड़ानें शुरू होने में अभी एक से डेढ़ महीने का समय लग सकता है जो प्रत्येक एयरपोर्ट के लिए सामान्य बात है परंतु दिल्ली से मात्र एक घंटे की दूरी पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर स्थापित इस हवाई अड्डे से क्षेत्र के भौतिक विकास को ऊंची उड़ान मिलने की पूरी संभावना है। संभवतः इसीलिए आज सुबह इंद्रदेव ने भी हल्की बौछोरों के साथ अपनी प्रसन्नता प्रकट की।