अंध भक्तों के लिए स्पष्ट संदेश जिस भारत की अर्थव्यवस्था पर आज तुम खड़े हो, उसकी रीढ़ कांग्रेस ने बनाई थी, वो भी दशकों तक लगातार काम करके। जब जवाहरलाल नेहरू ने शुरुआत की, तब देश में भारी उद्योग जीरो थे।
उन्होंने IIT, AIIMS, BHEL, SAIL जैसे संस्थान खड़े किए, भाखड़ा नंगल जैसे बांध बनाए ये वही नींव है जिस पर आज का “डिजिटल इंडिया” खड़ा है।
मतलब घर किसी और ने बनाया, और नाम की प्लेट तुम बदलकर खुद को मालिक बता रहे हो।
फिर इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, जिससे गांव के आदमी को पहली बार बैंक का दरवाजा दिखा। 1971 में अमेरिका की धमकियों के बावजूद पाकिस्तान को तोड़कर बांग्लादेश बना दिया
तब भारत “ग्लोबल लीडर” बोलकर नहीं, करके दिखाता था।
2004–2014 का दौर मनमोहन सिंह का टाइम जिसे तुम लोग मजाक में “कमजोर” कहते हो, उसी समय भारत की GDP ग्रोथ 8–9% तक पहुंची थी। क्योंकि देश का प्रधानमंत्री अर्थशास्त्री था पढ़ा लिखा
2008 की ग्लोबल मंदी में अमेरिका-यूरोप की हालत खराब हो गई थी, लेकिन भारत मजबूती के साथ टिका रहा ये कोई WhatsApp यूनिवर्सिटी ज्ञान नहीं है, असली डेटा है।
2004–2014 में भारत दुनिया की fastest growing major economies में था Inflation कंट्रोल में, खाने-पीने की चीजें आम आदमी की पहुंच में थीं NREGA से करोड़ों गरीबों को रोजगार मिला RTI से सरकार की जवाबदेही तय हुई Telecom revolution उसी दौर में फैला, और सस्ते इंटरनेट की नींव पड़ी
फिर 2014 के बाद का “अमृतकाल” आया और रुपया 60 से गिरकर 94+ चला गया पेट्रोल-डीजल 100 पार हो गए गैस सिलेंडर 1500 के आसपास मिल रहा है बेरोजगारी 45 साल के हाई तक पहुंच चुकी मैन्युफैक्चरिंग PMI गिरकर 4.5 साल के लो पर खड़ा है और ऊपर से मीडिया का नारा “विश्वगुरु… ग्लोबल लीडर का चल रहा है
मतलब जेब खाली हो गई, नौकरी गायब हो गई, उद्योग ठंडे पड़े हैं लेकिन टीवी पर भारत सुपरपावर बन चुका के सपने दिखाए जा रहे हैं
कांग्रेस ने देश बनाया, संस्थान बनाए, सिस्टम खड़ा किया, गरीब को सहारा दिया। आज जो बना हुआ था उसी को बेचो, उसका नाम बदलो, और कैमरे के सामने फीता काट दो।
देश भाषण से नहीं चलता, देश चलता है आंकड़ों से, फैसलों से और जमीन पर दिखने वाले काम से।
बाकी जो लोग हर बात पर “पहले कुछ नहीं था” चिल्लाते हैं उनको इतिहास पढ़ना शुरू कर देना चाहिए, वरना कल को ये भी बोल दोगे कि सूरज भी 2014 के बाद ही उगा है।
सुरेन्द्र पहलवान
