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बागपत ने देश को दिया जीरो वेस्ट मॉडल, अब देश का हर जिला आसानी से अपना सकेगा मॉडल

नए यूपी की नई पहचान बना बागपत, जिलाधिकारी की सोच और विजन से निखर रहा बागपत

तकनीक से बदली तस्वीर, सर्कुलर इकोनॉमी हेतु बागपत ने प्रस्तुत किया स्पेशल रोडमैप

Zero Waste Mahotsav: बागपत ने कर दिखाया, अब देश की बारी

बागपत, 20 मार्च 2026। जनपद बागपत ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में नवाचार और सुशासन की नई पहचान स्थापित की है। पुरा महादेव महाशिवरात्रि मेले को “जीरो वेस्ट महोत्सव” के रूप में सफलतापूर्वक आयोजित करने के बाद अब जिला प्रशासन ने इसकी 19 पृष्ठों की विस्तृत ‘पुरा महादेव मॉडल’ रिपोर्ट लॉन्च कर दी है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वच्छ, सुरक्षित, डिजिटल और पर्यावरण अनुकूल धार्मिक आयोजनों के विजन को बढ़ावा देने हेतु एक एक मजबूत ब्लूप्रिंट है।

पुरा महादेव पर आयोजित महाशिवरात्रि मेले को मंदिर के इतिहास में पहली बार जीरो वेस्ट महोत्सव का स्वरूप दिया गया जिसमें बागपत प्रशासन ने भक्ति के साथ साथ प्रकृति का भी संदेश दिया। इस मेले की गूंज पूरे प्रदेश एवं देश के कई कोनों तक पहुंची। अब बागपत प्रशासन द्वारा इस महोत्सव को लेकर एक विस्तृत ब्लूप्रिंट बनाया है ताकि किसी भी कार्यक्रम में अन्य जनपद अथवा मंदिर आदि इस मॉडल को अपना सके और जीरो वेस्ट महोत्सव को पूरे देश में बढ़ावा मिले।

इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें आस्था के साथ साथ मेले से उत्पन्न कूड़े कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन किया गया। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार मेले में प्राप्त फूल, दूध, प्रसाद और प्लास्टिक जैसी सामग्री को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनका पुनः उपयोग सुनिश्चित किया गया। सर्कुलर इकोनॉमी की तर्ज पर इस कूड़े कचरे से निकली चप्पल रबर आदि से बच्चों के बैठने के लिए आंगनवाड़ी में मैट, प्लास्टिक बोतलों से नन्ही कली देसी गुड़िया, फूल सामग्री से अगरबत्ती, अन्य कूड़े कचरे से सेल्फी स्टैंड आदि बनाकर बागपत ने पूरे स्वच्छ भारत मिशन, मिशन लाइफ, सतत विकास लक्ष्यों को एक नई राह दिखाई।

आंकड़ों के रूप में इस पहल की सफलता और प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मेले के दौरान लगभग 450 किलोग्राम फूलों का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया गया, जिससे 43.5 किलोग्राम प्रीमियम उत्पाद तैयार हुए। वहीं 4563 लीटर दूध को पुनर्वितरित किया गया और लगभग 1000 किलोग्राम जैविक सामग्री को कंपोस्टिंग के लिए उपयोग में लाया गया।

इस पहल में महिला सशक्तिकरण भी प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। प्रशिक्षित महिलाओं ने पूरे प्रोसेस में सक्रिय भागीदारी निभाई—चाहे वह फूलों की छंटाई हो, प्रसंस्करण हो या उत्पाद निर्माण। इससे यह मॉडल “मिशन शक्ति” के उद्देश्यों के अनुरूप महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन गया। इसके साथ ही महिलाओं द्वारा इन कार्यों में सहयोग कर कुल मिलाकर लगभग 24 हजार रुपये की आय भी अर्जित की।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह मॉडल तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—वैज्ञानिक प्रोसेसिंग, कूड़े कचरे की रीसाइक्लिंग और जन भागीदारी। यही तीनों पहलू मिलकर इसे एक स्थायी और व्यवहारिक मॉडल बनाते हैं जिसे किसी भी जिले में आसानी से लागू किया जा सकता है।

इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका रिप्लीकेशन पहलू है, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि अन्य जनपद किस प्रकार इस मॉडल को अपनाकर अपने धार्मिक आयोजनों को जीरो वेस्ट महोत्सव में परिवर्तित कर सकते हैं। इसमें प्रशासन, तकनीकी संस्थानों और समुदाय की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे यह मॉडल केवल एक प्रयोग न रहकर एक नीति स्तर का व्यावहारिक समाधान बन जाता है।

पुरा महादेव मेला इस बार भक्ति, स्वच्छता और तकनीक का त्रिवेणी संगम बनकर सामने आया। मेले में प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था, कपड़े के थैलों का वितरण, पौधों का उपहार, डिजिटल तकनीकी का उपयोग कर बनाया गया कांवड़ यात्रा क्यूआर कोड आधारित एप, आकर्षक डस्टबिन, मोबाइल टॉयलेट, पेयजल और मेडिकल कैंप, स्वयंसेवकों की भागीदारी जैसी व्यवस्थाओं ने इसे एक आदर्श आयोजन का स्वरूप दिया। वहीं सूचना विभाग के डिजिटल सेल्फी अभियान के माध्यम से यह आयोजन सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से छाया रहा और सैकड़ों पोस्ट इंटरनेट मीडिया पर ज़ीरो वेस्ट महोत्सव हैशटैग के साथ दिखाई दी।

श्रद्धालुओं ने भी इस बदलाव को खुले मन से स्वीकार किया। कपड़े का थैला और पौधा पाकर उनके चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली और उन्होंने प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे एक अलग और प्रेरणादायक मेला बताया। यह बदलाव केवल व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों के व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला जिसके संस्कार स्वच्छता, स्वभाव स्वच्छता को बढ़ावा मिला।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की जो परंपरा विकसित हुई है, इस वर्ष जीरो वेस्ट महोत्सव से पुरा महादेव मेला उसका जीवंत उदाहरण बन गया है। बागपत प्रशासन ने मुख्यमंत्री के विजन को जमीनी स्तर पर उतारते हुए यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही दिशा और प्रतिबद्धता हो, तो परंपरा और तकनीक साथ-साथ चल सकते हैं।

पुरा महादेव मॉडल अब केवल बागपत की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है। यह मॉडल यह दर्शाता है कि आस्था के साथ जिम्मेदारी को जोड़कर न केवल पर्यावरण संरक्षण किया जा सकता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास की नई राह भी बनाई जा सकती है।

बागपत से निकली यह पहल अब देशभर के लिए एक संदेश है जहां भक्ति भी है, प्रकृति भी है और भविष्य के प्रति जिम्मेदारी भी। यही “नया उत्तर प्रदेश” है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को साकार करते हुए विकास और संस्कृति के संतुलन का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

सूचना विभाग, बागपत

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