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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने मार्च 2025 में एक 11 साल की नाबालिग बच्ची से जुड़े मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्तनों को पकड़ना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना और खींच कर ले जाने की कोशिश करना गंभीर यौन हमला (Serious Sexual Assault) और कपड़े उतारने के इरादे से बल प्रयोग के दायरे में आता है। लेकिन अदालत का तर्क था कि इसे कानूनी रूप से बलात्कार के प्रयास (Attempt to Rape- धारा 376/511) या बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने धाराएं हल्की करते हुए आरोपियों परपॉक्सो एक्ट की धारा 9/10 और आईपीसी की धारा 354-B के तहत मुकदमा चलाने को कहा था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित फैसले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया।
