घर-घर शौचालय से बढ़ी स्वच्छता की रफ्तार, बागपत में 1,120 शौचालय पूरे; 1,091 लाभार्थियों को पहली और 838 को दूसरी किस्त मिली
कचरे के खिलाफ गांवों में तैयार हो रहा सिस्टम, 233 आरआरसी बने; बागपत में अब संचालन और उपयोगिता पर बढ़ेगी निगरानी
बागपत, 18 सितंबर 2026 — गांवों को स्वच्छ, सुंदर और बेहतर सुविधाओं से लैस करने की दिशा में चल रहे स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के कार्यों को लेकर बागपत कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण समिति की बैठक हुई। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण, ओडीएफ प्लस मॉडल, आरआरसी निर्माण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, तालाबों की सफाई, रेट्रोफिटिंग, सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, अंत्येष्टि स्थल, वित्तीय प्रगति और पुराने ऑडिट प्रकरणों की बिंदुवार समीक्षा की गई। विभिन्न बिंदुओं पर समीक्षा के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में बागपत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के फेज-2 में नवसृजित पात्र शौचालयविहीन परिवारों के लिए 1,200 व्यक्तिगत शौचालयों का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष 1,120 का निर्माण पूरा हो चुका है। यानी जिले की उपलब्धि 93.33 प्रतिशत पहुंच गई है और अब केवल 80 शौचालय शेष हैं। खेकड़ा और पिलाना ने अपने-अपने 234 और 226 के लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। बागपत में 207 के लक्ष्य के सापेक्ष 185, बिनौली में 155 के सापेक्ष 137, बड़ौत में 162 के सापेक्ष 143 और छपरौली में 216 के सापेक्ष 195 शौचालय पूरे हो चुके हैं। शौचालय निर्माण की प्रगति के साथ लाभार्थियों को किस्तों का भुगतान भी किया जा रहा है। कुल 1,091 लाभार्थियों को प्रथम किस्त और 838 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त उनके खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। 16 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन कुल 4,567 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 1,239 आवेदन स्वीकृत, 3,218 रिजेक्ट और 110 आवेदन लंबित दर्ज किए गए। बैठक में अधिकारियों को पात्र लाभार्थियों को समय से सुविधा उपलब्ध कराने तथा लंबित प्रकरणों का नियमानुसार निस्तारण करने पर जोर दिया गया।
ओडीएफ प्लस मॉडल की समीक्षा में भी जिले की तस्वीर मजबूत रही। जिले की 244 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 233 ग्राम पंचायतों में आरआरसी यानी रिसोर्स रिकवरी सेंटर का निर्माण पूरा हो चुका है। निर्मित आरआरसी के स्तर पर 95.49 प्रतिशत पूर्ति दर्ज है। ओडीएफ प्लस मॉडल के प्रथम सत्यापन के लिए 273 राजस्व ग्राम चयनित/दर्ज हैं और सभी 273 का प्रथम सत्यापन पूरा किया जा चुका है। इनमें 225 ग्राम पंचायतों का द्वितीय सत्यापन भी पूरा हो गया है। शेष ग्राम पंचायतों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रथम सत्यापन के 180 दिन पूरे होने के बाद द्वितीय सत्यापन कराया जाएगा। विकासखंडवार देखें तो बिनौली और छपरौली में आरआरसी की उपलब्धता 100 प्रतिशत, बागपत में 95.45, पिलाना में 95.12, खेकड़ा में 91.67 और बड़ौत में 90.91 प्रतिशत दर्ज है।
तालाबों को स्वच्छ और उपयोगी बनाने पर भी बैठक में विशेष जोर रहा। ‘मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी’ कार्यक्रम के तहत जिले में 100 तालाबों के चयन का लक्ष्य था, जिसमें 85 की सूचना उपलब्ध हो चुकी है और 15 की सूचना अभी शेष है। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने शेष तालाबों की सूचना उपलब्ध कराने और चिन्हित 66 तालाबों पर साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए। इससे तालाबों को केवल अभिलेखों में चिन्हित करने के बजाय उनके वास्तविक स्वच्छता और उपयोग की दिशा में कार्य आगे बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है। तालाबों के दूसरे चरण की प्रगति में 100 तालाबों के लक्ष्य के सापेक्ष 75 तालाबों का चयन कार्यों के लिए किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने इस स्थिति को आगे बढ़ाते हुए तालाबों की साफ-सफाई और संबंधित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों को तालाबों की वास्तविक स्थिति के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
आरआरसी निर्माण के साथ भूमि की उपलब्धता को लेकर भी विस्तार से समीक्षा हुई। कुल 11 ग्राम पंचायतों में आरआरसी के लिए भूमि की स्थिति सामने आई। भूमि विवाद वाले मामलों के समाधान और उपलब्ध भूमि के उपयोग को लेकर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 10 ग्राम पंचायतों को चयनित कर उनके स्थलीय सत्यापन की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है। खेकड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत पूरनपुर नवादा में आरआरसी यूनिट की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित की जा चुकी है, लेकिन भूमि वन विभाग के स्वामित्व में होने के कारण हस्तांतरण/उपलब्धता संबंधी प्रस्ताव अभी प्राप्त नहीं हुआ है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी खेकड़ा को पत्र भेजा जा चुका है। जिलाधिकारी ने लंबित औपचारिकताओं को आगे बढ़ाने तथा स्वच्छता ढांचे के निर्माण में अनावश्यक देरी नहीं होने देने पर जोर दिया। प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिटों के कार्यों की गुणवत्ता और लंबित भुगतान की भी समीक्षा हुई। काठा और जौहड़ी ग्राम पंचायतों के लंबित देयकों के भुगतान की कार्रवाई जिलाधिकारी से अनुमति मिलने के बाद पूरी की जा चुकी है। काठा में विद्युत व्यवस्था के लिए जिला पंचायत को पत्र भेजा गया था और ग्राम पंचायत की ओर से झटपट पोर्टल पर विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन भी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार विद्युत कनेक्शन के लिए एस्टीमेट अभी प्राप्त नहीं हुआ था। अधिकारियों को संबंधित प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए गए।
रेट्रोफिटिंग के जरिए पुराने शौचालयों को बेहतर और उपयोगी बनाने की दिशा में भी जिले ने अच्छी प्रगति की है। 244 ग्राम पंचायतों में कुल 1,43,275 शौचालयों के रेट्रोफिटिंग कार्य का अनुमोदित लक्ष्य है। 15 जुलाई 2026 तक 1,23,842 शौचालयों का कार्य पूरा हो चुका था, जबकि ताजा प्रगति में यह संख्या बढ़कर 1,24,380 यानी 86.81 प्रतिशत हो गई। बड़ौत में 96.71 प्रतिशत, बिनौली में 94.07, छपरौली में 87.41, बागपत में 80.26, खेकड़ा में 77.47 और पिलाना में 75.95 प्रतिशत प्रगति दर्ज है। समीक्षा में पुराने शौचालयों को आवश्यकता के अनुसार उपयोगी बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। सामुदायिक शौचालयों की स्थिति में भी जिले ने पूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। जिले की सभी 244 ग्राम पंचायतों में 244 सामुदायिक शौचालय निर्मित हैं, सभी 244 शौचालय स्वयं सहायता समूहों को हैंडओवर किए जा चुके हैं और सभी 244 को क्रियाशील दर्ज किया गया है। हालांकि केयरटेकर के मानदेय भुगतान में अगस्त 2026 तक 28 का भुगतान दर्ज है। जिलाधिकारी ने संबंधित सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को नियमित भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
स्वच्छता गतिविधियों की निगरानी के लिए जनपद स्तर पर ‘स्वच्छता वार रूम’ भी गठित किया गया है। इसमें आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती कर प्रतिदिन जिले में चलने वाली स्वच्छता गतिविधियों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों की साफ-सफाई, कांवड़ यात्रा मार्गों के दोनों ओर नियमित सफाई तथा संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत होने वाले स्वच्छता कार्यों की सतत समीक्षा पर जोर दिया गया है। जिलाधिकारी ने वार रूम के माध्यम से जमीनी स्थिति की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्वच्छता कार्यों में तेजी के साथ अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया। दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी मोहित उज्जवल और दीपक मान के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए और अभिलेख उपलब्ध न करने पर उन पर एफआईआर दर्ज कराए जाने के भी निर्देश दिए। ग्राम पंचायत अधिकारी जॉनी द्वारा ऑडिट अभिलेख प्रस्तर उपलब्ध नहीं कराए जाने पर डीपीआरओ को एफआईआर कराने समेत नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
वर्ष 2022-23 के ऑडिट प्रकरणों में लुहारी ग्राम पंचायत के मामले में 43,60,951 रुपये और शबगा में 48,37,088.40 रुपये के व्यय का उल्लेख है। संबंधित अभिलेख जिला लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसी प्रकार वर्ष 2023-24 में शबगा ग्राम पंचायत से संबंधित 54,25,898.26 रुपये के व्यय वाले ऑडिट प्रकरण में भी अभिलेख उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई। इस तरह पुराने मामलों के अभिलेख और अनुपालन को व्यवस्थित कराने की कार्रवाई भी समीक्षा का अहम हिस्सा रही।
अंत्येष्टि स्थलों के निर्माण में भी नौ के लक्ष्य के सापेक्ष आठ कार्य पूर्ण हो चुके हैं। खेकड़ा के मुबारिकपुर में ऊपर का शेड शेष है, जिसे एक सप्ताह में पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। पंचायत भवनों की समीक्षा में बड़ौत के ओढापुर का कार्य पूर्ण पाया गया। बिनौली के नंगला रवा, खेकड़ा के फखरपुर और पिलाना के मुपुर ओगटी में निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। बागपत के जाफराबाद नंगला में दीवार स्तर तक कार्य हुआ, लेकिन लेखपाल द्वारा कार्य रोके जाने की स्थिति सामने आई; ग्राम प्रधान ने कार्य शुरू किए जाने की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने शेष कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा कराने को कहा। गांवों के साथ सरकारी विद्यालयों को भी स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्कूलों में टाइल्स आदि के माध्यम से सौंदर्यीकरण कार्य कराने के लिए खंड विकास अधिकारियों से प्रस्ताव मंगाए जाने को कहा।
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के विभिन्न घटकों की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जहां काम पूरा हो चुका है, वहां उसकी गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए तथा जहां कार्य लंबित हैं, वहां निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई पूरी की जाए। व्यक्तिगत शौचालय, ओडीएफ प्लस मॉडल, आरआरसी, रेट्रोफिटिंग, सामुदायिक शौचालय, तालाब, अपशिष्ट प्रबंधन, पंचायत भवन और अंत्येष्टि स्थलों की समीक्षा से स्पष्ट रहा कि जिले में ग्रामीण स्वच्छता को कई स्तरों पर आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है। 244 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों की शत-प्रतिशत उपलब्धता, 273 राजस्व ग्रामों के प्रथम ओडीएफ प्लस सत्यापन की पूर्णता, 233 आरआरसी का निर्माण, व्यक्तिगत शौचालयों में 93.33 प्रतिशत उपलब्धि और रेट्रोफिटिंग में 86.81 प्रतिशत प्रगति बागपत की ग्रामीण स्वच्छता यात्रा के प्रमुख पड़ाव बनकर सामने आए हैं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी, परियोजना निदेशक राहुल वर्मा जिला विकास अधिकारी अरुण कुमार पांडे समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
सूचना विभाग बागपत