बड़ौत में औद्योगिक इकाई के बाहर ऑफ-साइट ड्रिल, खेकड़ा के स्कूल में सुरक्षित निकासी का अभ्यास; विकास भवन में भूकंप-अग्नि और जिला अस्पताल में फील्ड अस्पताल से जांची गई पूरी व्यवस्था
सायरन से शुरू हुआ अभ्यास, घटनास्थल से अस्पताल तक दौड़ीं टीमें; मॉकड्रिल में बागपत ने परखी कमांड से रेस्क्यू तक की तैयारी
बागपत, 18 सितंबर 2026। भूकंप के झटकों से भवन में फंसे लोग… कहीं आग का जोर तो कहीं औद्योगिक इकाई में हादसे के बाद रासायनिक आपात स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीमें सक्रिय हुईं और सुरक्षित निकासी से लेकर राहत-बचाव व चिकित्सा व्यवस्था तक कार्रवाई शुरू हो गई। आज जिले में कुछ ऐसा ही नजारा मॉकड्रिल के दौरान देखने को मिला। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर जिलाधिकारी अस्मिता लाल के मार्गदर्शन एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) राजीव कुमार राय के निर्देशन में बागपत, बड़ौत और खेकड़ा तहसील क्षेत्र में राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज कराई गई।
बड़ौत तहसील के सराय रोड स्थित एमएस जेपीएस प्लास्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड में औद्योगिक हादसे का सीन बनाकर ऑफ-साइट मॉकड्रिल कराई गई। हादसे की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था सक्रिय करने, प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करने और कर्मचारियों को जोखिम वाले हिस्से से बाहर निकालने की कार्रवाई का अभ्यास हुआ। आग अथवा रासायनिक रिसाव की स्थिति मानकर अग्निशमन और रेस्क्यू टीमों की कार्रवाई के साथ पुलिस द्वारा सुरक्षा घेरा बनाने, आवाजाही नियंत्रित करने और आसपास के लोगों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को भी देखा गया। औद्योगिक हादसे में फायर, पुलिस, स्वास्थ्य और प्रशासन की टीमों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और मौके पर उपलब्ध संसाधनों को एक साथ इस्तेमाल करने की क्षमता की परीक्षा हुई। रासायनिक आपात स्थिति के परिदृश्य में प्रभावित क्षेत्र को अलग रखने और सुरक्षित क्षेत्र निर्धारित करने पर भी जोर रहा। संभावित रिसाव की स्थिति में शुरुआती सूचना, जोखिम वाले क्षेत्र की निगरानी, जरूरत पड़ने पर निकासी और सूचना को जिला आपातकालीन संचालन केंद्र तक पहुंचाने की कड़ी को अभ्यास से जोड़ा गया।
वहीं खेकड़ा तहसील के काठा स्थित आदर्श पब्लिक स्कूल में भूकंप का परिदृश्य बनाकर मॉकड्रिल कराई गई। भवन में भूकंप की स्थिति मानकर विद्यार्थियों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके साथ ही भवन में लोगों के फंसे होने की स्थिति मानकर रेस्क्यू टीम के पहुंचने, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कार्रवाई का अभ्यास किया गया। स्कूल परिसर में एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बाहर निकलने के दौरान भीड़ को व्यवस्थित रखने और अफरातफरी से बचने की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया। भूकंप के बाद स्कूल, अस्पताल और प्रशासनिक भवनों की स्थिति में सुरक्षित निकासी, खुले स्थान पर लोगों को पहुंचाने तथा जरूरत के अनुसार रेस्क्यू और चिकित्सा संसाधन लगाने को मॉक एक्सरसाइज की प्रमुख कसौटियों में रखा गया।
इसके साथ ही बागपत के विकास भवन में दो अलग-अलग ड्रिल आयोजित की गईं। एक में भूकंप के बाद भवन में लोगों के फंसने और सुरक्षित निकासी का परिदृश्य बनाया गया, जबकि दूसरी में अग्नि सुरक्षा को केंद्र में रखकर बचाव एवं अग्निशमन व्यवस्था का अभ्यास हुआ। रेस्क्यू टीमों की कार्रवाई, भवन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, आग की स्थिति में प्रतिक्रिया और पुलिस-फायर-प्रशासन के बीच सूचना के आदान-प्रदान को मौके पर देखा गया। भूकंप जैसे परिदृश्य में फंसे लोगों तक पहुंचने, क्षतिग्रस्त हिस्से की सुरक्षा देखते हुए बचाव करने और घायलों को चिकित्सा सहायता तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी आपदा प्रतिक्रिया की अहम कड़ी रही। विकास भवन में आपदा की सूचना से लेकर जिला स्तर के नियंत्रण तंत्र तक पूरी कड़ी को भी अभ्यास से जोड़ा गया। फील्ड से घटना की जानकारी लेने, संबंधित टीमों को सक्रिय करने और लगातार स्थिति की सूचना जिला आपातकालीन संचालन केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया देखी गई। अधिकारियों ने यह भी देखा कि घटनास्थल पर कमान स्पष्ट रहे और पुलिस, फायर, स्वास्थ्य तथा रेस्क्यू टीमों के बीच सूचना में कोई कड़ी न टूटे। मॉक एक्सरसाइज की तैयारियों में फील्ड टीमों और नियंत्रण कक्ष के बीच रेडियो, मोबाइल, वैकल्पिक संचार माध्यम तथा विभागीय संचार समूहों से संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था को भी शामिल किया गया।
जिला अस्पताल बागपत में फील्ड अस्पताल की व्यवस्था के जरिए आपदा के बाद की चिकित्सा प्रतिक्रिया को परखा गया। रेस्क्यू के बाद घायलों को चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने, मरीजों की स्थिति के अनुसार प्राथमिकता तय करने, प्राथमिक उपचार देने और गंभीर मामलों को आगे रेफर करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। मरीजों का रिकॉर्ड रखने तथा एंबुलेंस, फील्ड चिकित्सा टीम और अस्पताल के बीच समन्वय बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया। आपदा के बाद सभी घायलों को एक ही तरह की चिकित्सा सहायता देने के बजाय उनकी स्थिति के अनुसार प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। गंभीर मरीजों को पहले उपचार और रेफरल, जबकि कम गंभीर मरीजों को अलग व्यवस्था देने की ट्रायेज प्रणाली को आपदा चिकित्सा की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रखा गया।
मॉकड्रिल की निगरानी के लिए एनडीआरएफ गाजियाबाद से पर्यवेक्षक यशपाल तोमर मौजूद रहे। तीनों तहसीलों में एसडीएम ने अपने-अपने क्षेत्रों में समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। मौके पर अधिकारियों की नजर केवल टीमों की मौजूदगी पर नहीं, बल्कि सूचना मिलने के बाद कार्रवाई शुरू होने, संसाधनों के पहुंचने, विभागों के बीच तालमेल और रेस्क्यू के बाद चिकित्सा सहायता तक पूरी प्रक्रिया पर रही। मॉकड्रिल के दौरान रेस्क्यू और आपदा प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और तकनीकों की कार्यप्रणाली का भी प्रदर्शन किया गया। भूकंप वाले परिदृश्य में खोज एवं बचाव, फंसे लोगों तक पहुंचने और सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया को देखा गया, जबकि अग्नि वाले परिदृश्य में अग्निशमन टीम की कार्रवाई पर ध्यान रहा।
इस मॉक एक्सरसाइज में यूथ लीडर अमन कुमार के नेतृत्व में सिविल डिफेन्स, एनसीसी, आपदा मित्र, स्काउट एवं गाइड, माय भारत के स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राहत कार्य, घायलों की सहायता और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में प्रशासन का सहयोग किया एवं जनपद में किसी भी आपदा में बचाव एवं अन्य विषयों का अनुभवात्मक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अभ्यास में पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, विद्युत, नगर निकाय, आपदा प्रबंधन टीम सहित सभी विभागों ने सक्रिय सहभागिता की।
मॉकड्रिल के दौरान इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम के तहत कमान और समन्वय की व्यवस्था को भी मौके पर जांचा गया। घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारी की भूमिका, फील्ड टीमों को निर्देश, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र तक सूचना और वापस फील्ड से स्थिति रिपोर्ट लेने की प्रक्रिया को एक साथ देखा गया। अभ्यास में सूचना तंत्र की भी परीक्षा हुई। घटनास्थल से मिली जानकारी को नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाने, संबंधित विभागों को अपडेट देने और फील्ड से लगातार स्थिति की रिपोर्ट लेने की प्रक्रिया को देखा गया। आपदा के दौरान बिजली, इंटरनेट या सामान्य संचार व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक संचार साधनों की उपयोगिता भी तैयारी का हिस्सा रही।
अभ्यास के दौरान अधिकारियों और पर्यवेक्षक ने व्यवस्थाओं को मौके पर देखा और फील्ड टीमों से प्रतिक्रिया भी ली। कहां सूचना और तेजी से पहुंचनी चाहिए, किस स्तर पर अतिरिक्त समन्वय की जरूरत है, कौन से संसाधन तत्काल उपलब्ध होने चाहिए और किन व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाना है—इन बिंदुओं को आगे की तैयारी से जोड़ने पर जोर रहा। प्रदेश में आयोजित इस राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज में 34 जिलों की 157 तहसीलों को शामिल किया गया। बागपत में चार अलग-अलग सीन के माध्यम से प्रशासन ने आपदा प्रतिक्रिया की पूरी कड़ी को अभ्यास में उतारा। औद्योगिक इकाई से लेकर स्कूल, प्रशासनिक भवन और अस्पताल तक चली इस ड्रिल का फोकस यही रहा कि वास्तविक आपदा की घड़ी में सूचना मिलने से रेस्क्यू, रेस्क्यू से चिकित्सा और चिकित्सा से आगे की सहायता तक कोई कड़ी कमजोर न पड़े।
एसडीएम बागपत दिग्विजय सिंह, खेकड़ा सुरभि शर्मा, बड़ौत बाल कृष्ण सिंह, एनडीआरएफ गाजियाबाद से पर्यवेक्षक यशपाल तोमर, सीएफओ अमरेन्द्र प्रताप सिंह, आपदा विशेषज्ञ अश्वनी कुमार, सहित समेत प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर सक्रिय रहे।
सूचना विभाग बागपत