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डॉ. वाडा की 44 समझदारी भरी बातें, जो पढ़ने और खासकर अपने बुजुर्ग अपनों के साथ शेयर करने लायक हैं:

  1. हर दिन चलते रहें, भले ही धीरे-धीरे।
  2. परेशान हों तो गहरी सांस लें और शांत हो जाएं।
  3. हल्की-फुल्की कसरत करें ताकि शरीर अकड़े नहीं।
  4. गर्मी में AC चला रहे हैं तो खूब पानी पिएं।
  5. जरूरत पड़े तो डायपर पहनने में शर्म न करें — ये हमें ज्यादा आज़ादी से चलने-फिरने देते हैं।
  6. खूब चबाकर खाने से दिमाग और शरीर दोनों एक्टिव रहते हैं।
  7. भूलने की वजह उम्र नहीं, दिमाग का कम इस्तेमाल है।
  8. हर समस्या का इलाज ढेर सारी दवाओं से करना जरूरी नहीं।
  9. जबरदस्ती ब्लड प्रेशर और शुगर कम करने के पीछे न पड़ें।
  10. अकेले होना अकेलापन नहीं है; ये आराम करने का समय भी हो सकता है।
  11. आलसी होना सामान्य है, खासकर जब थके हों।
  12. अगर सुरक्षित ड्राइव नहीं कर सकते, तो चोट खाने से बेहतर है गाड़ी चलाना बंद कर दें।
  13. वो काम करें जो पसंद हों, तनाव देने वाले कामों से बचें।
  14. उम्र हो गई है, पर स्वाभाविक इच्छाएं अब भी महसूस हो सकती हैं।
  15. सिर्फ घर में न बैठे रहें – बाहर निकलें, ताज़ी हवा लें और दुनिया देखें।
  16. जो पसंद हो वो खाएं, बस ज्यादा न खाएं। थोड़ा वजन भी ठीक है।
  17. हर काम आराम से और ध्यान से करें।
  18. उन लोगों से दूर रहें जो आपको असहज करते हैं।
  19. टीवी और मोबाइल के सामने कम समय बिताएं।
  20. कभी-कभी बीमारी से जबरदस्ती लड़ने से बेहतर है उसके साथ समझौता कर लेना।
  21. “कोई न कोई रास्ता हमेशा होता है” – जब फंसा हुआ महसूस करें तो ये बात हिम्मत दे सकती है।
  22. ताजे फल और सब्जियां खाना जरूरी है।
  23. नहाना लंबा होना जरूरी नहीं, सिर्फ 10 मिनट काफी हैं।
  24. नींद न आए तो जबरदस्ती न करें।
  25. जो चीजें आपको खुश करती हैं, वो दिमाग को एक्टिव रखती हैं।
  26. मन की बात दबाएं नहीं; जो कहना है कह दें।
  27. शुरू में ही एक भरोसेमंद फैमिली डॉक्टर ढूंढ लें।
  28. हमेशा झुकना जरूरी नहीं। कभी-कभी “बुरे माता-पिता” बनना भी सेहतमंद है।
  29. हमारी राय बदल जाए तो कोई बात नहीं।
  30. बुढ़ापे में डिमेंशिया शायद भगवान का हमें शांत करने का तरीका हो।
  31. अगर हमने सीखना बंद कर दिया, तो हम बहुत जल्दी बूढ़े हो जाते हैं।
  32. सम्मान के पीछे भागने की जरूरत नहीं — जो अभी हमारे पास है वही काफी है।
  33. मासूमियत माता-पिता का विशेषाधिकार है।
  34. जिंदगी झंझट वाली हो सकती है, पर यही तो इसे दिलचस्प बनाती है।
  35. धूप सेंकने से खुशी मिलती है।
  36. दूसरों का भला करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा होगा।
  37. हर दिन आराम से जिएं।
  38. इच्छाएं होना इस बात का संकेत है कि आप अभी जिंदा हैं और प्रेरित हैं।
  39. हमेशा सकारात्मक सोचें।
  40. राहत की सांस लें; जिंदगी में जल्दी करने की जरूरत नहीं।
  41. आप तय करें कि आपको अपनी जिंदगी कैसे जीनी है।
  42. जो भी हो रहा है उसे शांतn मन से स्वीकार करें।
  43. खुशमिजाज लोग आमतौर पर सबको पसंद आते हैं।
  44. एक मुस्कान कई आशीर्वाद ला सकती है।

कृपया यह फारवर्डेड संदेश बुजुर्ग साथियों के साथ शेयर करें।
शुभप्रभात

🙏🏻🙏🏻

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#शास्त्रों_और_ऋषि_मुनियों की सुंदर खोज…. #मघा_नक्षत्र का वर्षाजल सूर्य का प्रवेश मघा नक्षत्र magha nakshatra में हो, और मघा नक्षत्र magha nakshatra वर्षा हो तो वह वर्षा का पानी तोला सोना है । जैसे सोना एक तोला कितना किमती होता है ऐसा ! उसको भर के रख दो बस 2-2 बूंद आँखों में डालो । आंखों की सभी बीमारियों में लाभदायी है। मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी पीने में आए तो बच्चों के पेट की कृमि की समस्या गायब हो जाएगी और बच्चे हृष्टता पुष्टता आएगी। magha nakshatra मघा नक्षत्र का पानी पीने में काम लाओ, भोजन आदि बनाओ तो बहुत-बहुत फायदा होगा । औषधियों का सार-सार है मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी। Magha nakshatra मघा नक्षत्र के पानी की महीमा बहुत बड़ी, लंबी-चौड़ी है । अब मघा नक्षत्र magha nakshatra के पानी को इकट्ठा करने के लिए 17/08/2026 से 31/08/2026 तक मघा नक्षत्र magha nakshatra के 16 दिनों में ताँबा, पीतल, काँसा या स्टील के बर्तन हो। 17 अगस्त से 31 अगस्त तक का जो पानी है उसे संग्रहित करो। इन 16 दिनों में जब भी बारिश हो, जितना हो सके मघा नक्षत्र के magha nakshatra बारिश का पानी इकट्ठा कर लें । इन 16 दिनों में खुले मैदान में ताँबा, पीतल, काँसा या स्टील के पात्र इस प्रकार रखें कि वर्षा का जल सीधे हमारे द्वारा रखे गए पात्रों में भर जाए । 12 महिने मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी पड़ा रहे , कुछ नहीं होता जैसे गंगाजल। मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी गंगा जल माना जाता है। 17 अगस्त से 31 अगस्त तक मघा नक्षत्र magha nakshatra का जो पानी है उसे संग्रहित करो । बड़ा कीमती काम करेगा । और उसके लिए तो बोलते है माँ का परोसा तृप्ति देता है। माँ जब बच्चे को अच्छी तरह से परोसती है तो वह बच्चे को तृप्ति देता है । ऐसे ही मघा नक्षत्र magha nakshatra की वर्षा का जल धरती माँ और जीवन को तृप्त करता है । मघा के बरसे, माता के परसे । जैसे माता परोसती है, ऐसे ही मघा नक्षत्र magha nakshatra का जल तृप्त करता है लोगों को। इसका फायदा उठाओ । पड़ोसी को भी बताओ । बिना औषधि के घर के लोग तंदुरुस्त रहे । ऐसा कीमती है मघा नक्षत्र magha nakshatra के दिनों की वर्षा का पानी ! मघा बरसा, सोना बरसा।

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