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👉🏿 जब बच्चों का विवाह
25 साल में होता था, तो
एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 अब बच्चों का विवाह
30 साल में होता है, तो
एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं.

👉🏿 सोचने वाली बात है.
क्या हमारा समाज
अगली सदी तक जीवित रहेगा ?
आज एक अजीब सा
अंधेरा फैलता जा रहा है ?

🏚️ गली-मोहल्ले वीरान हैं,
आस-पास के घर खाली हैं.
आज घरों में बच्चों की आवाज कम
पति-पत्नी की आवाज
ज्यादा सुनाई देती है.

★ लड़कियाँ 30-35 साल तक कुंवारी हैं. फिर लड़कियों को 40 के बाद मेडिकल समस्या
★ लड़के 35 साल के बाद भी कुँवारें घूम रहे हैं.
★ देर से शादी …
फिर सम्बंध विच्छेद (तलाक) टूटते परिवार …
दुखी माँ-बाप.
अकेले..
पूरी पीढ़ी खालीपन अनुभव करती है.

🤷🏻‍♀️ क्या हम इसे
“पढ़ा-लिखा समाज” कहें या
“स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाला आत्मघाती समाज”

💁🏻‍♂️ (यह तो हिंदू की जनसंख्या कम करने की
एक खामोश साज़िश थी. मुझे जहां तक याद है तानाशाह प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी ने 1970 के दशक में एक नारा दिया था “हम दो हमारे दो” जिसे बेवकूफ हिंदु ने अपना लिया और मुसलमान ने इसका गुप्त विरोध किया जो आज प्रत्यक्ष मे दिख रहा है।))

★ अगर 50 जोड़ों में
सिर्फ़ एक एक बच्चा हो
तो अगली पीढ़ी में
सिर्फ़ नाममात्र के बच्चे होंगे.

👉 अगर ऐसा ही चलता रहा,
तो तीसरी पीढ़ी लगभग
गायब हो जाएगी.

👉 मोहल्ले,गलियाँ खाली पड़ी हैं.
सब लोग मोबाइल पर हैं.
जीवन का आधा समय तो
मोबाइल पर ही बीत जाता है.

★ गाँव के गाँव खत्म हो रहे हैं.

★ शहरों में ऊँची इमारतें हैं, लेकिन
संयुक्त परिवार प्रथा समाप्त हो गयी है.

👉 नई बहुएं
“सिर्फ़ एक ही बच्चा” चाहती हैं.
🤷🏻‍♀️ क्या यही समाज है ?
❓ क्या यही हमारे पुरखों की
विरासत है ?

👉 सच तो यह है, कि ….
बच्चे अब प्यार की निशानी नहीं रहे.
बल्कि एक बच्चा पैदा करना …
(एक मजबूरी सी है ताकि कोई बांझ ना कहे.)

⚖️ सबसे बड़ी गलती —
लड़की के पिता की है,
वही पिता जिसने
20-22 साल की उम्र में विवाह करके
परिवार बसाया था. अब वही पिता 30/35 साल की उम्र तक अपनी बेटी का विवाह न करके बहादुरी दिखा रहे हैं.

👉 परिणाम ????

लड़के लड़कियाँ डिप्रेशन में जा रहे हैं.

👉 आज बच्चों का सही समय पर विवाह नहीं हो रहा है, और यदी हो रहा है तो बच्चा पैदा करने में देरी या एक ही कर रहा है.

👉 समाज धीरे-धीरे
समाप्त होता जा रहा है.

👉 इसी कारण बच्चे समाज के साथ नहीं
अकेले रहना पसंद करते हैं.
यानी एकल परिवार
यहाँ तक कि बच्चे भी नहीं चाहिए.

★ देर से शादी करना
★ देर से बच्चा करना, फिर
एक बच्चे के बाद
मेडिकल और लालन-पालन का
बहाना करना.
💁🏻‍♀️ यह आम बात हो गई है.
हजारों जवान लड़के लड़कियाँ
उम्र अधिक के कारण कुंवारे घूम रहे हैं.
समाज के समझदार लोग
चुप्पी साधे हुए हैं.

★ विवाह, परिवार, बच्चे –
इन सब को बोझ समझा जा रहा है.

🎈 विवाह … कोई दुनियावी बंधन नहीं
यह घर परिवार और समाज का
स्तम्भ है.

🎈 प्रजाति, सभ्यता और संस्कार को
आगे बढ़ाने का एक सभ्य समाज की पहचान है है.

💥 अब हम सब को समझने का
समय आ गया है.
🫵 बच्चों को ‘हद से ज्यादा’
आजादी दे कर हमने उनकी समझ छीन ली.
★ विवाह टलता रहा, और जब हुआ,
तब तक बहुत देर हो चुकी थी. फिर वही अकेलापन

🫵
🔹 लड़कों के लिए 25/28 साल
🔸 लड़कियों की 22/25 साल.

🚩 वर्ना इतिहास लिखेगा …
“वह हिंदू समाज, जिसने चुपचाप
स्वयं को खत्म कर लिया.”
सोचो और समझदारी दिखाओ. अपने बच्चों का विवाह
समय पर कीजिये.
🙏
क्योंकि … परिवार नहीं बचा, तो
समाज को भी देर सवेर ध्वस्त होते देर नहीं लगनी है.

यही कारण है …डेविड सेलबॉर्न और
बिल वार्नर जैसे लेखक
यह कहने पर मजबूर हो जाते हैं , कि “इस्लाम” के मज़बूत फैमिली सिस्टम की वजह से ..देर सवेर …अधिकांश देश
◆ इस्लाम से हार जायेंगे. ◆

भारत में भी हिन्दू परिवार परम्परा का
पतन होना प्रारम्भ हो चुका है.
रक्त के 5 रिश्ते
समाप्त होने की कगार पर हैं.
ताऊ, चाचा, बुआ, मामा
मौसी जैसे रिश्ते
आने वाले समय मे देखने-सुनने को नहीं मिलने वाले हैं। इसे इस तरह 👇🏽
समझा जा सकता है-

पुत्र       पुत्री
 2         1        (मौसी X)
 1         2      (चाचा, ताऊ X)
 1         1   (चाचा, ताऊ, मौसी X)
 1         0          X
 0         1          X

परिणाम
0 0

सिंगल चाइल्ड फैमिली को
उनका निर्णय तीसरी पीढ़ी याने
जिनके आप … दादा-दादी होंगे
बुरी तरह प्रभावित करेगा.
जिस दादा को मूल से अधिक ब्याज प्यारा होता है,
उसका तो ….
मूलधन भी समाप्त हो जाएगा.
इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है.

      इसलिए दम्पत्ति को 
  सिंगल चाइल्ड के निर्णय पर
 गंभीरता से विचार करना होगा.

यह घटती आबादी के आँकड़े बोल रहे हैं.

यह विश्लेषण सरकारी आँकड़ों के
अध्ययन से आ रहा है.

    आपका पौत्र या प्रपौत्र इस संसार में 
       अकेला खड़ा होगा.
   उसे अपने रक्त के रिश्ते की आवश्यकता होगी तो 
 इस पूरे ब्रह्मांड में उसका अपना 
कोई नहीं होगा.

  यह अत्यंत सोचनीय विषय है.

  ये न केवल हमारे बच्चों को
   एकाकी जीवन जीने को 
  मजबूर करेगा बल्कि हमारी 
   हिंदू परिवार सभ्यता को ही 

नष्ट कर देगा.

हम जो हिन्दू एकता की बात करते हैं
ये तो सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी.
और इन सबके लिए हमारी
वर्तमान पीढ़ी उत्तरदायी होगी.

अगर आप इस विषय को गंभीर समझते हैं तो
इस समस्या पर विचार करें,

घर परिवार में, पति पत्नी के बीच,
रिश्तेदारों में, दोस्तो में एवं
विभिन्न बैठकों एवं आयोजनों में
इस विषय पर मंत्रणा करें.
अपनी सभ्यता, संस्कार औऱ
आने वाली पीढ़ियों को बचाये.

         👫  💁🏻‍♀️ 👬 *समाज हित मे समाज की बैठक में इस पर एक संगोष्ठी का आयोजन कर विचार जरूर करें।* 🙏🏻

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#शास्त्रों_और_ऋषि_मुनियों की सुंदर खोज…. #मघा_नक्षत्र का वर्षाजल सूर्य का प्रवेश मघा नक्षत्र magha nakshatra में हो, और मघा नक्षत्र magha nakshatra वर्षा हो तो वह वर्षा का पानी तोला सोना है । जैसे सोना एक तोला कितना किमती होता है ऐसा ! उसको भर के रख दो बस 2-2 बूंद आँखों में डालो । आंखों की सभी बीमारियों में लाभदायी है। मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी पीने में आए तो बच्चों के पेट की कृमि की समस्या गायब हो जाएगी और बच्चे हृष्टता पुष्टता आएगी। magha nakshatra मघा नक्षत्र का पानी पीने में काम लाओ, भोजन आदि बनाओ तो बहुत-बहुत फायदा होगा । औषधियों का सार-सार है मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी। Magha nakshatra मघा नक्षत्र के पानी की महीमा बहुत बड़ी, लंबी-चौड़ी है । अब मघा नक्षत्र magha nakshatra के पानी को इकट्ठा करने के लिए 17/08/2026 से 31/08/2026 तक मघा नक्षत्र magha nakshatra के 16 दिनों में ताँबा, पीतल, काँसा या स्टील के बर्तन हो। 17 अगस्त से 31 अगस्त तक का जो पानी है उसे संग्रहित करो। इन 16 दिनों में जब भी बारिश हो, जितना हो सके मघा नक्षत्र के magha nakshatra बारिश का पानी इकट्ठा कर लें । इन 16 दिनों में खुले मैदान में ताँबा, पीतल, काँसा या स्टील के पात्र इस प्रकार रखें कि वर्षा का जल सीधे हमारे द्वारा रखे गए पात्रों में भर जाए । 12 महिने मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी पड़ा रहे , कुछ नहीं होता जैसे गंगाजल। मघा नक्षत्र magha nakshatra का पानी गंगा जल माना जाता है। 17 अगस्त से 31 अगस्त तक मघा नक्षत्र magha nakshatra का जो पानी है उसे संग्रहित करो । बड़ा कीमती काम करेगा । और उसके लिए तो बोलते है माँ का परोसा तृप्ति देता है। माँ जब बच्चे को अच्छी तरह से परोसती है तो वह बच्चे को तृप्ति देता है । ऐसे ही मघा नक्षत्र magha nakshatra की वर्षा का जल धरती माँ और जीवन को तृप्त करता है । मघा के बरसे, माता के परसे । जैसे माता परोसती है, ऐसे ही मघा नक्षत्र magha nakshatra का जल तृप्त करता है लोगों को। इसका फायदा उठाओ । पड़ोसी को भी बताओ । बिना औषधि के घर के लोग तंदुरुस्त रहे । ऐसा कीमती है मघा नक्षत्र magha nakshatra के दिनों की वर्षा का पानी ! मघा बरसा, सोना बरसा।

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