Spread the love

दशम आयुर्वेद दिवस पर औषधीय पौधे लगाए, जागरूकता रैली एवं संगोष्ठी का हुआ आयोजन

बागपत, 23 सितंबर 2025 – मा० जनपद प्रभारी मंत्री एवं उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी ने आज ग्राम रमाला में आयोजित जन चौपाल में ग्रामवासियों से रूबरू होकर उनकी समस्याएं सुनी एवं निर्देश दिए कि प्रत्येक प्राप्त शिकायत का निस्तारण केवल कागज़ी औपचारिकता न रहकर, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाए।

ग्रामीणों की रोज़मर्रा की परेशानियों जैसे सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और खेती से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सरकार की प्रतिबद्धता है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और किसी भी नागरिक को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।

इसी क्रम में प्रभारी मंत्री ने सांकरौद में दशम आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भी भाग लिया। “आयुर्वेद: जन-जन के लिए” थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में आयुष चिकित्सालय परिसर में औषधीय पौधों का रोपण कर जीवन और प्रकृति के संरक्षण के प्रति संकल्प दोहराया गया। मंत्री जी ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार का माध्यम नहीं बल्कि जीवन शैली और प्राकृतिक स्वास्थ्य जागरूकता का प्रतीक है।

कार्यक्रम में जागरूकता रैली और संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें ग्रामीणों और युवाओं को आयुर्वेदिक स्वास्थ्य, पोषण और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। प्रभारी मंत्री जी ने निर्देश दिया कि इस प्रकार के जागरूकता अभियानों को निरंतर चलाया जाए ताकि ग्राम और नगर दोनों क्षेत्रों में लोग स्वास्थ्य और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति सचेत हों।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी नीरज कुमार श्रीवास्तव ,परियोजना निदेशक राहुल वर्मा ,क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी मोनिका गुप्ता जिला अध्यक्ष वेदपाल उपाध्याय सहित आदि उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

sbobet88

×