19 मार्च को होगा भव्य शुभारंभ, विश्व चैंपियन मैरी कॉम की मौजूदगी में बागपत लिखेगा प्रेरणा की नई कहानी
कचरे से सृजन की मिसाल: प्लास्टिक बोतलों के रेशों से बनी गुड़िया, गांव की महिलाओं के हाथों से तैयार
गांव की महिलाओं के हुनर को मिलेगा मंच: ‘नन्ही कली’ बनेगी मिशन शक्ति और वोकल फॉर लोकल की प्रतीक
देसी गुड़िया से दुनिया तक पहुंचेगी बागपत की कहानी, ज़ीरो वेस्ट के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा बागपत
बागपत, 16 मार्च 2026 — पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बागपत जिला एक बार फिर सकारात्मक पहल और नवाचार की मिसाल बनकर उभर रहा है। इस बार पहचान बन रही है एक अनोखी देसी गुड़िया ‘नन्ही कली’ से, जो केवल बच्चों का खिलौना नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय हुनर का प्रेरक प्रतीक बनकर सामने आ रही है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के ज़ीरो वेस्ट विजन के तहत वेस्ट प्लास्टिक से तैयार यह रैग डॉल अब बागपत की नई पहचान बनने की ओर बढ़ रही है।
इस पहल का भव्य शुभारंभ 19 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे द हरी कैसल, बागपत में आयोजित समारोह में किया जाएगा। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें मुख्य अतिथि के रूप में विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज़ और ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम उपस्थित रहेंगी। उनका आगमन न केवल इस पहल को राष्ट्रीय स्तर की पहचान देगा बल्कि जिले के युवाओं, खिलाड़ियों और बेटियों के लिए प्रेरणा का बड़ा अवसर भी बनेगा।
‘नन्ही कली’ गुड़िया की सबसे अनोखी बात यह है कि इसे बनाने में पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखा गया है। आमतौर पर गुड़ियों के अंदर भराव के लिए रुई का उपयोग किया जाता है, लेकिन बागपत की इस देसी गुड़िया में रुई की जगह वेस्ट प्लास्टिक बोतलों से बने रुई जैसे बारीक रेशों का इस्तेमाल किया गया है। यह प्रयोग कचरे को संसाधन में बदलने की सोच को दर्शाता है। प्लास्टिक बोतलों को विशेष प्रक्रिया से बारीक फाइबर में बदलकर मुलायम कपास जैसी सामग्री बनाई जाती है और वही गुड़िया के अंदर भरी जाती है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला प्लास्टिक अब बच्चों की मुस्कान का कारण बन रहा है।
आज जब दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, तब बागपत की यह पहल एक प्रेरक समाधान बनकर सामने आई है। इस पहल का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि ‘नन्ही कली’ को बनाने का काम ग्रामीण महिलाएं कर रही हैं। जिले के गांवों की महिलाएं अपने हाथों से इन गुड़ियों को तैयार कर रही हैं। कपड़े के टुकड़े, पुराने फैब्रिक और पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग कर वे इस गुड़िया को सुंदर रूप देती हैं। यह केवल हस्तशिल्प नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी है।
भारत के गांवों में पहले कपड़े से बनी गुड़िया यानी रैग डॉल की परंपरा बहुत आम थी। दादी-नानी अपने हाथों से बच्चों के लिए गुड़िया बनाती थीं और बच्चे उन्हें बड़े प्यार से संभालकर रखते थे। समय के साथ बाजार में मशीन से बने खिलौनों का चलन बढ़ा और यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म होने लगी। बागपत की ‘नन्ही कली’ पहल इस पुरानी परंपरा को फिर से जीवित करने का प्रयास भी है।
यह गुड़िया बच्चों को भारतीय संस्कृति और स्थानीय पहचान से जोड़ने का माध्यम बनेगी। इसका डिजाइन सरल और आकर्षक है, जिससे बच्चे आसानी से इससे जुड़ाव महसूस कर सकें। आज के समय में अधिकतर खिलौने विदेशी संस्कृति से प्रभावित होते हैं, लेकिन ‘नन्ही कली’ बच्चों को अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपनी पहचान से जोड़ने का संदेश देती है।
‘नन्ही कली’ नाम भी अपने आप में एक गहरा सामाजिक संदेश देता है। यह नाम बेटियों की मासूमियत, उनकी क्षमता और उनके उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि हर बेटी एक नन्ही कली की तरह होती है, जिसे सही अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वह बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती है।
इस पहल को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और मिशन शक्ति के संदेश से भी जोड़ा गया है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और समाज में उनकी भूमिका को मजबूत करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल अभियान की भावना भी इस परियोजना में साफ दिखाई देती है। ‘नन्ही कली’ पूरी तरह स्थानीय संसाधनों और स्थानीय श्रम से तैयार की जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का अवसर मिल रहा है और स्थानीय कला को भी नया जीवन मिल रहा है।
इस कार्यक्रम की एक और खास बात यह है कि इसमें मुख्य अतिथि के रूप में आने वाली मैरी कॉम जिले के खिलाड़ियों को भी प्रेरित करेंगी। बागपत जिला कुश्ती, बॉक्सिंग, जूडो और अन्य खेलों के लिए जाना जाता है। यहां के कई युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। मैरी कॉम का जीवन संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा किया और विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया। उनकी उपस्थिति बागपत के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आएगी। विशेष रूप से बेटियों के लिए यह अवसर बहुत महत्वपूर्ण होगा। जब वे विश्व चैंपियन खिलाड़ी को अपने बीच देखेंगी तो उनके मन में भी बड़े सपने देखने की प्रेरणा जागेगी।
वेस्ट प्लास्टिक से बनी यह देसी गुड़िया केवल एक उत्पाद नहीं बल्कि कई संदेशों की प्रतीक है—पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय हुनर का सम्मान और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद। यह देसी गुड़िया बागपत की पहचान बनकर पूरे प्रदेश और देश में प्रेरणा की नई कहानी लिखेगी।
सूचना विभाग बागपत