सोशल मीडिया और समाज में लगातार यह देखा और महसूस किया जा रहा है कि जिन गरीब, संसाधन-विहीन और कम शिक्षित परिवारों की कानूनी जानकारी सीमित है, जिनकी राजनीतिक पहुंच कमजोर है और जिनके सामाजिक संगठन मजबूत नहीं हैं, उन परिवारों, कुणबो के युवाओं को नशे, अपराध, हिंसा और षड्यंत्रों के जाल में फंसाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर युवाओं को इस हद तक धकेला जा रहा है कि जिंदा जलाने, जिंदा काटने और सामूहिक हिंसा जैसी भयावह घटनाएं समाज के सामने आ रही हैं।
जब पीड़ित परिवारों के पक्ष में सामाजिक कार्यकर्ता, जागरूक युवा या समाज के जिम्मेदार लोग आवाज उठाते हैं, तब कई बार अपराधियों तक कानून का शिकंजा पहुंचाने के बजाय आवाज…
