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19 हजार वर्गमीटर में आकार ले रहा शिक्षा का नया केंद्र, बदल जाएगी बागपत की तस्वीर

स्मार्ट क्लास से रोबोटिक लैब तक, बागपत में बन रहा भविष्य का स्कूल

पढ़ाई, खेल और तकनीक एक साथ, शिक्षा में बड़ा निवेश, बागपत में बन रहा 19 हजार वर्गमीटर का मेगा कैंपस

बागपत 29 अप्रैल 2026 — अब बागपत के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दिल्ली की बस पकड़ने की मजबूरी धीरे-धीरे खत्म होने जा रही है। जिले में एक ऐसा शैक्षिक परिसर आकार ले रहा है, जो न सिर्फ सुविधाओं के मामले में बड़े शहरों को टक्कर देगा, बल्कि गांव-कस्बों के बच्चों के सपनों को भी यहीं पंख देगा। करीब 19,460 वर्गमीटर में विकसित हो रहा यह अत्याधुनिक संस्थान शिक्षा के उस मॉडल की झलक दे रहा है, जिसकी कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। लगभग 6,100 वर्गमीटर में बन रहा मुख्य भवन, तीन मंजिला संरचना और एक ही परिसर में पढ़ाई से लेकर खेल और तकनीक तक की पूरी व्यवस्था—यह सब मिलकर बागपत के शैक्षिक नक्शे को बदलने की तैयारी कर रहे हैं।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने आज 25.33 करोड रुपए से निर्माणाधीन परियोजना कंपोजिट विद्यालय बालैनी का निरीक्षण किया और कार्यदाई संस्था को समय अंतर्गत कार्य गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।

अभी तक जिले के सैकड़ों परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए बाहर भेजने को मजबूर रहे हैं। समय, पैसा और सुरक्षा—तीनों की चिंता अलग। ऐसे में यह संस्थान एक बड़े समाधान के रूप में सामने आ रहा है, जहां 16 से अधिक आधुनिक कक्षाएं स्मार्ट क्लास के रूप में तैयार की जा रही हैं। यहां पढ़ाई सिर्फ ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल स्क्रीन, इंटरैक्टिव लर्निंग और प्रैक्टिकल अप्रोच के जरिए बच्चों को सिखाया जाएगा। फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, मैथ्स और आईसीटी की अलग-अलग लैब इस बात का संकेत हैं कि अब शिक्षा रटने से आगे बढ़कर समझने और करने की दिशा में जाएगी।

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे दिलचस्प कड़ी है प्रस्तावित रोबोटिक लैब, जो बागपत जैसे जिले में तकनीकी शिक्षा के नए दरवाजे खोलेगी। आज के दौर में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां यह सुविधा छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यानी जो बच्चे अब तक किताबों में विज्ञान पढ़ते थे, वे अब उसे अपने हाथों से बना और समझ भी सकेंगे।

संस्थान की योजना सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखी गई है। यहां आर्ट एंड क्राफ्ट, म्यूजिक, डांस और योगा के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए जा रहे हैं, जिससे बच्चों को अपनी रुचियों के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। खेल सुविधाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। ओपन जिम, रेस ट्रैक, वॉलीबॉल और बैडमिंटन कोर्ट यह बताते हैं कि शिक्षा के साथ फिटनेस और अनुशासन को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है।

छात्रों की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मिड-डे मील के लिए किचन और डाइनिंग हॉल की व्यवस्था की जा रही है, जहां एक साथ 150 से अधिक छात्र भोजन कर सकेंगे। इसके साथ ही बाल वाटिका की स्थापना छोटे बच्चों के लिए मजबूत शुरुआत का आधार बनेगी। छात्रावास (डॉर्मिटरी) और स्टाफ आवास की व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले बच्चों को भी किसी तरह की असुविधा न हो।

सुरक्षा और सुगमता के मोर्चे पर भी यह संस्थान पीछे नहीं है। पूरे परिसर को सीसीटीवी निगरानी में रखा जाएगा, वहीं दिव्यांगजनों के लिए रैंप और आसान पहुंच की व्यवस्था इसे समावेशी बनाती है। अलग-अलग स्टाफ रूम, टॉयलेट्स और कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाएं यह संकेत देती हैं कि संचालन को व्यवस्थित और आधुनिक तरीके से डिजाइन किया गया है।

परिसर का विकास सिर्फ भवनों तक सीमित नहीं है। इंटरलॉकिंग रोड, सीसी रोड, ड्रेनेज सिस्टम, ट्यूबवेल जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ इसे एक पूर्ण विकसित कैंपस के रूप में तैयार किया जा रहा है। वहीं सोलर प्लांट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और आरओ सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं इसे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार भी बनाती हैं। यानी यह संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि सतत विकास का भी उदाहरण बनने की ओर बढ़ रहा है।

इस परियोजना का असर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और जिले में एक सकारात्मक विकास का माहौल बनेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अब अभिभावकों को अपने बच्चों को दूर भेजने की चिंता से राहत मिलेगी और बच्चे अपने ही जिले में बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर पा सकेंगे। आने वाले वर्षों में यही परिसर उन बच्चों की कहानियां गढ़ेगा, जो कभी बेहतर शिक्षा के लिए शहरों की ओर देखते थे, और अब अपने ही जिले से आगे बढ़कर देश-दुनिया में पहचान बनाएंगे।

सूचना विभाग बागपत

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