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राजनीति में गठबंधन और समझौते कभी-कभी ऐसे मोड़ ले लेते हैं, जहाँ अपनी पहचान और ताकत कमजोर पड़ने लगती है। आज हालात ऐसे दिख रहे हैं कि निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी सीमित हो गई है।
नीतीश ने सबसे पहले ब्राह्मणवादी /समान्तवादी गठबंधन से मिलकर दलितों को दो भागों में बाटकर कमजोर किया /नरसंहारों के दोषियों के लिए जो आयोग बने थे , उनका फण्ड रोककर उसे खत्म होने पर मजबूर किये।
यह समय केवल व्यक्तियों को देखने का नहीं, बल्कि नीतियों, रणनीतियों और जनता की भागीदारी को समझने का है।
राजनीति में टिके रहने के लिए केवल सत्ता नहीं, बल्कि मजबूत जनसमर्थन और स्पष्ट रुख भी जरूरी होता है। बिहार की राजनीति पर एक नजर

२.बिहार की राजनीति में गठबंधन की राजनीति ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। Nitish Kumar के नेतृत्व में भी कई बार राजनीतिक समीकरण बदले।
नीतीश ने ब्राह्मणवादी /सामंती ताकतों को हमेश मजबूत करते रहे।
उन्होंने अपने कार्यकाल में नरसंहारों के दोषियों को जेलों से मुक्त कराया / अपराधी प्रविर्ती के लोगों को हमेशा बढ़ाया।
दलित /पिछड़ों के नाम पर राजनीती ही नहीं किया बल्कि उन्हें कमजोर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा।

यह सच है कि गठबंधन में बड़ी पार्टियों का प्रभाव ज्यादा दिखता है, और छोटे या क्षेत्रीय नेतृत्व को अपने फैसलों में समझौते करने पड़ते हैं। इसी कारण अक्सर यह धारणा बनती है कि सत्ता संतुलन पूरी तरह बराबर नहीं है।

राजनीति में डर या दबाव की बातें भी सामने आती हैं, लेकिन लोकतंत्र में सबसे मजबूत ताकत जनता का जनादेश होता है।
अगर जनता जागरूक रहे और सवाल पूछे, तो कोई भी नेता या पार्टी पूरी तरह मनमानी नहीं कर सकती।
३. .बिहार की राजनीति पर विचार

बिहार में चुनावी राजनीति में चेहरों की बड़ी भूमिका रहती है। Nitish Kumar लंबे समय तक एक प्रमुख चेहरा रहे हैं, और कई चुनावों में उनकी छवि ने वोटरों को प्रभावित किया है।

लेकिन गठबंधन की राजनीति में अक्सर यह सवाल उठता है कि जनादेश किसके नाम पर था और सत्ता का संतुलन किसके हाथ में है। यही वजह है कि जनता के बीच यह धारणा बनती है कि वोट एक नाम पर पड़ता है, जबकि फैसलों पर किसी और का प्रभाव बढ़ जाता है।

लोकतंत्र में सबसे ज़रूरी है कि —
स्पष्ट नीति व नेतृत्व की अपेक्षा रखे

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दोस्तो मोदी सरकार के साथ BJP की प्रदेश सरकारों को क्या हो गया है अब एक 6 साल के बच्चे नें बिहार के मुख्यमंत्री का स्तीफा मांग लिया तो उसे पुलिस नें गिरफ्तार कर लियाक्या सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति भवन को कुछ भी दिखाई नहीं देता कि सरकारों और पुलिस प्रशासन का यह केसा गठजोड़ बन गया हैदोस्तो हमारे संविधान में बच्चों को छोड़ो हमें भी यह आजादी मिली हुई है कि हम अपनी सरकारों का विरोध कर सकते हैं यह तो मात्र 6 साल का बच्चा हैदोस्तो अभी शायद हमारी सरकारों को यह पता नहीं है कि उ.प्र. के संभल कलेक्ट्रेट पर देश के सम्पूर्ण सिस्टम के विरुद्ध प्रदर्शन शुरू हो चुका है और यह प्रदर्शन मोदी सरकार के विरुद्ध आंदोलन में बदलेगा इस आंदोलन की शुरुआत संभल कलेक्ट्रेट से होगीदोस्तो अब तो ऐसा लगता है मोदी सरकार हो या BJP की प्रदेश सरकारें इनका संबंध आम जनता से पुरी तरह कट गया है इन्होंने सोच लिया है कि चुनाव आयोग हमारी सरकार बनबा देगा अगर कोई भी हमारा विरोध करेगा तो ED CBI और पुलिस प्रशासन है यह सब कुछ ठीक कर देगा क्या सरकारें अब इसी प्रकार से कार्य करेंगी हमारे संविधान में सरकारों के कार्य करने का यही तरीका लिखा हैदोस्तो अब इन नेताओं में देश चलाने की छमता के साथ योग्यता भी नहीं है अब इन नेताओं को देश की राजनीती से बाहर करना होगा इन नेताओं से देश और देश की जनता को आजादी दिलानी होगीइसके लिए उ.प्र. के संभल कलेक्ट्रेट पर संघर्ष शुरू हो चुका है यही संघर्ष देश की सम्पूर्ण व्यवस्था को बदलेगाधन्यवादआपका अपना विनोद साथीजिला उपाध्यक्षसंभल कांग्रेस8791674785 9720026990 wजय हिन्द जय भारत जय कांग्रेस

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