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नितिन कुमार सिंह/अंजू कश्यप/मनोज कश्यप/अंकित कश्यप/एजेंसी, नोएडा/मैनपुरी/बागपत/सोनीपत। मनीषा 19 वर्ष हरयाणा के बाद उत्तर प्रदेश में भी बेटियों के साथ बर्बरता और हत्याएं होने के समाचार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। मैनपुरी में कश्यप बेटी तो नोयडा में भाटी बेटी की हत्याएं के समाचार भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। बताया जाता है कि जो इन बेटियों को इंसाफ की आवाज उठता उसको सरकार हिरासत में ले लेती। जनता सोशल मीडिया पर जबरदस्त भड़ास सरकार पर निकाल रही है।

बताया जाता है कि हरियाणा में मनीषा बेटी की आवाज बुलंद करने वाले यूटूबर पत्रकारों को हिरासत में ले लिया। एक सोशल मीडिया पत्रकार श्री करमू को हिरासत में ले गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया। अब जनता बेटियों को इंसाफ दिलाने के साथ पत्रकारों को रिहा करने के लिए आंदोलन कर रही है। सरकार जनता के आंदोलनों को सिर्फ बिन की धुन समझ नजर अंदाज कर रही है।

शुक्रवार को जनपद बागपत कांग्रेस ने बड़ौत शहर में लगभग 5 किलोमीटर तक पैदल कैंडल मार्च बेटियों को इंसाफ दिलाने के लिए निकाला। जिसमे सैकड़ो युवा # टैग मनीषा को इंसाफ दो। सीबीआई से जाँच और दोषी को फांसी देने की मांग के नारे लगा रहे थे। पुलिस स्कॉर्ट का भी भारी बंदोबस्त था। बागपत कांग्रेस जिलाध्यक्ष लव कश्यप ने कहा कि भाजपा राज में देश भर में बेटियों का जीना दूभर हो चूका है। बेटियों नोचने के लिए हवस के भेड़िये ताक में बैठे रहते है।

सुभाष चंद कश्यप ने कहा कि यदि बेटी के साथ इस प्रकार की घटना उत्तर प्रदेश में होती, दोषी गले में तख्ती डाल माफ़ करदो का नारा लगते हुए सीधे थाने में मिलते या सीधे भगवान के द्वार मिलते। बागपत कांग्रेस महामंत्री आशु पंडित ने कहा कि भाजपा सरकार की मनसा का ही नहीं पता कि बेटियों के पक्ष में या बेटियों के विरोध में काम कर रही है? पवन कश्यप, आदेश कश्यप, पृथ्वी तोमर, दीपक पाँहवा, वंश वर्मा, मयंक वशिष्ठ, साहिल कुमार, वंशु काकड़ा, समीर कुरैशी, सुभाष चंद कश्यप प्रतिनिधि बागपत कांग्रेस जिलायध्यक्ष रूबी कश्यप, कदीर शाह आदि रहे।

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राखी कश्यप ने किसका मर्डर किया यहां पर यह बात में नहीं कहना चाहूंगा लेकिन एक बात जरूर कहूंगा जो महिला अपने मां-बाप के कंट्रोल में नहीं है अपने सास ससुर के पति के खाने में नहीं है जिसे अपने परिवार की महिला पुरुषों की कोई परवाह नहीं है जो अपने हुकुम चलाना चाहती है जो अपने आप को सक्षम समझने लगे और अपनी नौकरी अपने व्यापार अपने रंग रूप आदि का घमंड करने लगे उसको कोई सुधार नहीं सकता एक दिन कहते हैं समय बड़ा बलवान होता है किसी न किसी दिन समय उसको समझा देता है यही बात पुरुषों पर भी लागू होती है जो पुरुष अपने बड़े बुजुर्गों का मान सम्मान नहीं करता और न जाने किस घमंड में जीना चाहता है एक दूसरे की बात नहीं मानता एक न एक दिन उसका भी हर्ष बुरा होता है। उसे भी अगर कोई समझ सकता है तो वह समय है समय एक न एक दिन उसे पुरुष को भी समझा देता है।

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