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मेरी जानकारी के अनुसार प्राचार्य पदों पर नियुक्तियां करते समय शोध अनुभव के रूप में किसी शोध प्रोजेक्ट में काम करने एवं लघु शोध प्रबंध पर्यवेक्षक के रूप में किए गए कार्य को भी शोध अनुभव के रूप में मान्य किया गया था।

उक्त के संबंध में दी गई अनुमति संबंधी मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन बताया जाता है।

केवल पीएचडी करने संबंधी अनुभव को ही शोध अनुभव मानना मेरी दृष्टि से न्यायोचित नहीं है।

अतः अनावश्यक रूप से अपने ही शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को संदेह की दृष्टि से देखना प्राचार्य पद पर नियुक्ति हेतु प्रयास करने की हिम्मत करने वाले योद्धाओं के साथ और वह भी शासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज में, जहां हर कोई जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, मेरी नजर से इनके साथ अन्याय करना होगा।
डॉ. प्रवीण कुमार
चांद सी नगरी, चंदौसी।

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