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कहानी है कहार समाज के एक गरीब पिता की जो है बालू जी कहार पिता मांगू जी कोटिया निवासी शाहपुरा जो दिन रात अपने पुत्र वह अपने परिवार का भविष्य उज्जवल बनाने के लिए मेहनत करते हुए अपने पुत्र के लिए पाई पाई जोड़ कर अपने पुत्र की शिक्षा पूरी कराई और आज उसी का परिणाम है कि बालू जी कहार के पुत्र कमलेश कहार ने जी जान लगाकर पढ़ाईकर अपनी मंजिल की ओर पहुंचा जो कल के रिजल्ट के अनुसार पशु चिकित्सा विभाग में कंपाउंडर की पोस्ट पर चयन हुए।

कमलेश कहार और उनके माता पिता को पूरी कहार समाज की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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शुभेच्छुक
दुर्गा लाल कहार
पार्षद
नगर पालिका शाहपुरा

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1970 के दशक में पश्चिम बंगाल की छात्र राजनीति में एक लड़की ने कदम रखा। चेहरा साधारण, मगर इरादे बेहद मजबूत। यह थीं ममता बनर्जी। 1975 में नेशनल लेवल के लीडर जय प्रकाश नारायण का विरोध करते हुए ममता ने जब उनकी कार की बोनट पर चढ़कर डांस किया तो वो राष्ट्रीय सुर्खियों में छा गईं। ये वही जेपी थे, जिनसे खुद इंदिरा गांधी भी बात करने में कई बार सोचती थीं। इसी दौर में वह कांग्रेस में शामिल हुईं। मगर, उनके राजनीतिक सफर में बड़ा मोड़ तब आया, जब उन्होंने 10 बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले दिग्गज माकपा नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर सीट से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। यहीं से ममता के बड़े राजनीतिक कदम की शुरुआत हो गई। इसके बाद से ममता ने फिर मुड़कर नहीं देखा। ये वही जादवपुर सीट है, जहां से मौजूदा टीएमसी की सयानी घोष भी सांसद हैं और तृणमूल की स्टार प्रचारक भी हैं, जो पश्चिम बंगाल चुनावों में ममता बनर्जी जैसी साड़ी और चप्पल पहनकर अपने बेबाक भाषणों से छाई हुई हैं।

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