Category: Uncategorized

बागपत कलेक्ट्रेट सभागार में विधान परिषद निर्वाचन की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक हुई आयोजित

मतदेय स्थलों पर सभी मूलभूत सुविधाएँ हों सुनिश्चित, पुनरीक्षण प्रक्रिया से पहले तय होंगे मतदान केंद्र निर्वाचन आयोग के मानक अनुसार 16 किमी से अधिक नहीं होगी मतदाता की मतदान…

लोक सेवक अपना कार्य व्यवहार सुधारें अन्यथा उनकी सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा : श्यामलाल

रमेश निषाद के नेतृत्व में मधुबन में हुआ मोस्ट शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम फलजीत निषाद मोस्ट प्रचारक और राहुल कश्यप का मोस्ट आईटी के लिए हुआ चयन सुलतानपुर। आज दिनांक 23-08-2025…

यूपी में चार आईपीएस अफसरों के तबादले, केशव कुमार चौधरी अपर पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट गाजियाबाद बने

लखनऊ ::- यूपी में चार आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए गए हैं। आईपीएस केशव कुमार चौधरी गाजियाबाद कमिश्नरेट के अपर पुलिस आयुक्त बनें। आईपीएस विजय सिंह मीना को सीतापुर…

वीर एकलव्य की गुरु के प्रति निष्ठा परखने/जांचने/प्रदर्शित/चेक करने के लिए सच्चे शिष्य वीर एकलव्य से गुरु द्रोणाचार्य ने अंगूठा मांग लिया!इस टेस्ट/परीक्षण/जांच में वीर एकलव्य खरे उतरे और अपना अंगूठा गुरु द्रोणाचार्य के चरणों में अर्पित कर दिया! तो गुरु द्रोणाचार्य को वीर एकलव्य की निष्ठा से खुश होकर उनके अंगूठे को सर्जरी द्वारा जोड़ देना चाहिए था मगर ऐसा नहीं हुआ!

जबकि गुस्से में शिवजी गणेश जी को पहचान ही नहीं पाए कि श्री गणेश उनके पुत्र हैँ और उन्होंने गुस्से में गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया…

विरप्पन गोंड ने 17 वर्ष की उम्र में जंगलों में अपनी हकूमत कायम कर वहाँ आसपास के मनुवादी शासन-प्रशासन में भय पैदा कर दिया था। श्रीनिवासन ब्राह्मण ने विरप्पन की बहन को प्यार के झांसे में रखकर व गर्भवती बना कर शादी से इन्कार कर दिया तो विरप्पन गोंड ने श्रीनिवासन की हत्या कर और टुकडे-

विरप्पन गोंड ने 17 वर्ष की उम्र में जंगलों में अपनी हकूमत कायम कर वहाँ आसपास के मनुवादी शासन-प्रशासन में भय पैदा कर दिया था। श्रीनिवासन ब्राह्मण ने विरप्पन की…

विरप्पन गोंड ने 17 वर्ष की उम्र में जंगलों में अपनी हकूमत कायम कर वहाँ आसपास के मनुवादी शासन-प्रशासन में भय पैदा कर दिया था। श्रीनिवासन ब्राह्मण ने विरप्पन की बहन को प्यार के झांसे में रखकर व गर्भवती बना कर शादी से इन्कार कर दिया तो विरप्पन गोंड ने श्रीनिवासन की हत्या कर और टुकडे-टुकडे कर मछलियों को खिला दिया था। विरप्पन-गोंडर के प्रभाव के कारण ही वहाँ के आदिवासियों को अत्याचार, बलात्कार, हत्या व शोषण से मुक्ति मिल गयी थी और उन्हें मजदूरी का पूरा पैसा मिलने लगा था, जो मनुवादी शासन-प्रशासन नहीं चाहता था कि आदिवासियों की आर्थिक हालात में फायदा हो।.फिल्म अभिनेता राजकुमार का अपहरण करने के बाद विरप्पन गोंड ने सरकार के सामने राज्य की दस प्रमुख समस्या रखी और मांगे पूरा करने का अल्टीमेटम दिया।मांगे निम्नलिखित थीं ।.1- कावेरी पानी का विवाद जबतक हल नहीं होता तबतक कर्नाटक सरकार तमिलनाडु के लिये प्रतिमाह 250TMC पानी दे।.2- सन 1991 में भडके कावेरी-पानी विवाद में जो तमिल पुलिस फायरिंग में मारे गये थे, उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जावे।.3- स्पेशल टास्क फोर्स की ज्यादतियों की जांच करने वाले सदाशिव-आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ज्यादतियों से पीडित आदिवासियों को प्रति व्यक्ति 10 से 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जावे।.4- टाडा के तहत बन्द 51 आदिवासी कैदियों को फौरन रिहा किया जावे। क्योंकि पुलिस ने अपनी नाकामी की वजह से निर्दोष आदिवासियों को टाडा के तहत बंद कर दिया गया है।5- पुलिस ज्यादतियों में मारे गये 9 अनुसूचित व जनजाति के लोगों को उचित मुआवजा दिया जावे।.6- नीलगीरि की पहाडियों पर चायपत्ती तौडने वाले मजदूरों को प्रति एक किलाग्राम चसय पत्ती पर 15 रुपए दिये जाए ।.7- तमिल कवि और समाज सुधारक थिरुवेल्लुर की प्रतीमा बंगलौर में लगाई जावे.8- तमिल-नेशनल-लिब्रेशन आर्मी के तमिलनाडु जेल में बंद पांच लोगों को रिहा किया जाए।.9- कर्नाटक सरकार तमिल-भाषा को अतिरिक्त राजभाषा का दर्जा दे।.10- मजदूरों की मजदूरी बढाई जाए ।.आदिवासी विरप्पन गोंड को पकडने के लिये सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स बनाई! मगर 150 बेकसूर अनुसूचित व जनजाति के लोगों के हत्यारे रणवीर सेना व उसके मुखिया पर मनुवादी सरकार व मीडिया ने कभी-भी हायतौबा नहीं मचाई । जबकि विरप्पन गोंड ने किसी आदिवासी व अनुसूचित जाति के लोगों की हत्या नहीं की, बल्कि उनकी हत्या की, जो मनुवादी उन्हें पकडने व मारने आये थे और उन मनुवादियों की हत्या की जो अत्याचारी व बलात्कारी थे।.अम्बेडकर मिशन पत्रिका के मुताबिक विरप्पन गोंड एक वीर मूलनिवासी महायोद्धा था और आदिवासियों में बहुत लोकप्रिय था। महानारी फूलनदेवी ने बाईस. ठाकुर मनुवादियों की हत्या कर अपने बलात्कार का बदला लिया और वहीं विरप्पन-गोंडर ने आदिवासी समुदाय की बेहतर सुरक्षा, सामाजिक, शैक्षिणक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान की। वहीं भारतीय मनुवादी मीडिया ने फूलनबाई को दस्यू-सुन्दरी व विरप्पन-गोंडर को चन्दन तस्कर घोषित कर वंचित-समाज के मुंह पर करारा तमाचा जड दिया था। आदिवासी राजा प्रवीरचन्द्र गोंड व अन्य 262 आदिवासी राजाओं का भारत में विलय के दौरान क्या हश्र हुआ, यह कोई नहीं जानता है।.जिस सादगी से विरप्पन गोंड की विधवा पत्नी व दो मासूम लडकियां फटेहाल जिन्दगी जी रही हैं, उन्हें देखकर क्या आप यकीन करेंगे कि उसने करोडों रुपए कमाए हैं। यही स्थिति आदिवासी महा क्रांतिकारी बिरसा-मुन्डा के परिवार की है। मगर अधिकांश वंचित-समाज या तो उन्हें जानता नहीं है और ना ही कभी उन्हें जानने व समझने की कोशिश की है कि तमिल समुदाय आदिवासी हैं।.तमिलनाडु के धर्मपुरी स्थित अस्पताल में विरप्पन की लाश को देखने आये ग्रामीणों ने एसटीएफ से विरप्पन की हत्या किये जाने पर बेहद आक्रोश जताया था। ६२ साल के वेंकटम्माल को लगता है कि उसने अपना बेटा खो दिया है ।.पुलिस ने विरप्पन के रिश्तेदारों को धमकी देते हुए, उसी रात को चारों लाशों को जलाने की कोशिश की, एसटीएफ जल्दबाजी में तीन लाशें जलाने में कामयाब हो गये। मगर मानवाधिकार संस्थाओं के पदाधिकारियों व विरप्पन की पत्नी मुथुलक्ष्मी, भाई मदैयन व आदिवासियों के विरोध के कारण विरप्पन की लाश को दफनाया गया। मगर पुलिस प्रशासन ने आखिरी संस्कार करने की अनुमति नहीं दी। मय्यत के रिश्तेदारों व डाक्टरों से हासिल जानकारी के मुताबिक विरप्पन के हाथपैर कुचले गये थे तथा उसका लिंग मनुस्मृति के नियम के अनुसार काटा गया था। विरप्पन की हथेलियां जली हुई पायी गयी थीं। उसके कुल्हे की हड्डी चूर-चूर पाई गयी, गर्दन पर सुईयां चुभोने के अनगिनत निशान थे। मगर रिश्तेदार यह बात किसी को उजागर नहीं कर पाए। क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं जयललिता सरकार एसटीएफ के हाथों उनका फर्जी एनकाउंटर कर उन्हें विरप्पन का साथी घोषित न कर दे।.दीगर सूत्रों से इकट्ठा की गयी जानकारी के मुताबिक विरप्पन को उनके मुखबिर हुए साथियों ने विरप्पन को धोखे से बेहोशी की दवा दे दी और एसटीएफ के मनुवादी अधिकारियों ने विरप्पन को गिरफ्तार कर बुरी तरह से यातनाएँ देकर मार दिया गया था। एसटीएफ के एनकाउंटर की झूठी कहानी गढी गयी थी। बैंगलोर की प्रेस कान्फ्रेंस में एसटीएफ प्रमुख विजयकुमार ने पत्रकारों व जांच अधिकारियों को खुलेआम धमकाते हुए कहा कि “हम सच्चाई की खोज करने वाली टीमों से निपटना अच्छी तरह से जानते हैं”। ब्राह्मणवादी अखबार दिनारमाला में झूठे नामों से धमकियां दी गयी कि अगर उन्होने सच्चाई की खोज करना जारी रखा तो उन्हें गिरफ्तार होना पडेगा। मरने वालों के रिश्तेदारों को धमकियां दी गयी कि वे सच्चाई की खोज करने वाली टीमों को कुछ नहीं बताएं ।.हाईकोर्ट में मुकदमा दर्ज करने के बाद ही रिश्तेदारों को विरप्पन-गोंडर व अन्य मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल पाई थी। एसटीएफ के अधिकारियों ने जांच एजेंसियों को एम्बुलेंस, घटना स्थल व सबूतों का मौका-मुआयना नहीं करने दिया गया था। मानवाधिकार आयोग की प्रार्थना शासन-प्रशासन ने ठुकरा दी गयी थी।.एसटीएफ ने पूरे जंगल को ही यातना शिवर में बदल दिया गया। एडवोकेट तथा मानवाधिकार कार्यकर्ता मान-बालामुरुगन ने अपनी किताब “सोलागार-डोड्डी ” में क्रूर यातनाओं की तस्वीरें छापी हैं और बताया है कि एसटीएफ किसी भी आदिवासी को पकडकर क्रूर यातनाएं देकर मार डालती है और एनकाउंटर में मरा हुआ घोषित कर देती है। यातनायें देने का विवरण बहुत डरावना है , जिसमें युवतियों से बलात्कार, युवक-युवतियों के अंगभंग करना, योनि अत्याचार, हत्या, विभिन्न भीषण यातनाएं आदि शामिल हैं। कर्नाटक सरकार ने सदाशिव-आयोग की जांच बन्द करवा दी है। क्योंकि कर्नाटक , केन्द्र सरकार व शासन-प्रशासन पर मनुवादी ब्राह्मणों की व्यवस्था कायम है।.उपरोक्त हालात कश्मीर से कन्याकुमारी और असम, पूर्वी, दक्षिणी, उत्तरी व पश्चिमी क्षेत्रों के आदिवासी व अनुसूचित जातियों के लोगों के साथ आज भी कायम हैं। मनुवादी आतंकवाद आज शहरों व नगरों में विभिन्न संस्थाएँ, संगठन, संघ व सेना बनाकर आतंकवादी कार्यवाही कर रही है । क्योंकि किसी न किसी रुप में शासन-प्रशासन, कानून, मीडिया व सेना में मनुवादियों का वर्चस्व है और अधिकांश वंचित-समाज उनकी बन्दरसेना ,वोटबैंक व अंगरक्षक बनी हुई है।.हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कश्मीर में अधिकांश ओबीसी, अनुसूचित जाति व आदिवासी समाज के लोग हैं, जो मनुवादी ब्राह्मणों के अत्याचार, शोषण, हत्या व बलात्कार से पीडित होकर मुसलमान बन गये हैं, जबकि मनुवादी ब्राह्मण वहाँ आज भी शासन-प्रशासन में घूसपेठ किये हुए हैं। पूर्वी, पश्चिम, दक्षिणी व उत्तरी भारत में आदिवासियों को आतंकवादी, उग्रवादी, नक्सलवादी, माओवादी के नाम पर आप्फसा कानून के तहत मारा जा रहा है और समस्त भारत में आदिवासी व अनुसूचित जाति के लोगों का सामाजिक, धार्मिक, मानसिक, आर्थिक व शैक्षणिक रुप से शोषण, हत्या, बलात्कार कर प्रताडित किया जा रहा है।.क्या हम शहर में आकर सुरक्षित हों गये हैं! यह आपका भ्रम मात्र है। क्योंकि शहर, कस्बों व गांवों में भी किसी न किसी रुप में मनुवादी व्यवस्था आपका व आपके बच्चों का सामाजिक, धार्मिक, मानसिक, आर्थिक व शैक्षिणक रुप से शोषण हो रहा है ।.आप प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से मनुवादी ब्राह्मणों के शासन व प्रशासन में बन्दरसेना, वोटबैंक व अंधभक्त बनकर सहयोग कर रहे है?✍️FBP

वीरप्पन

BJP अध्यक्ष पद की दौड़ में क्या शिवराज?

संघ प्रमुख से मुलाकात पर बढ़ी सियासी हलचल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से करीब 45 मिनट तक…

बागपत की 11 बेटियाँ बनीं आंगनबाड़ी की मुख्य सेविकाएँ, जिलाधिकारी ने सौंपे नियुक्ति पत्र

अब बेटियाँ संभालेंगी आंगनबाड़ी की कमान, बाल पोषण और शिक्षा में नई ऊर्जा लाएँगी मुख्य सेविकाएँ बागपत में महिला शक्ति का उदय, शुचिता और पारदर्शिता से मिली नौकरी, बेटियों का…

महिला जिला चिकित्सालय बागपत में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत धूमधाम से मनाया गया कन्या जन्मोत्सव

13 नवजात कन्याओं की माताओं को पौधा, बेबी किट और प्रमाण पत्र देकर किया गया सम्मानित बेटियाँ समाज और राष्ट्र की धुरी, हर परिवार करे शिक्षा व सुरक्षा का वादा:…

जिला कारागार डिस्पेंसरी का औचक निरीक्षण, 11 दवाओं के नमूने जांच को भेजे

बागपत, 26 अगस्त 2025 — जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में औषधि निरीक्षक मोहित कुमार ने मंगलवार को जिला कारागार स्थित डिस्पेंसरी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने…

You missed

पुलिस वालों की ना दोस्ती अच्छी ना Dushmani दुश्मनी, अंकित बालिया बालियान हत्याकांड में नया मोड़: एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता ने पुलिस पर उठाए गंभीर सवालहरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में दो कथित शूटरों मोहित और सुमित के एनकाउंटर के बाद अब सुमित के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, सुमित के पिता धर्मपाल ने कहा कि उनका बेटा करीब ढाई महीने पहले मोहित के संपर्क में आया था। परिवार का कहना है कि इससे पहले सुमित सामान्य जीवन जी रहा था और पिता के साथ मजदूरी करता था। 12वीं की एक परीक्षा पास नहीं होने के बाद वह पिता के साथ काम करने लगा था।परिवार के मुताबिक, मोहित का सुमित के घर आना-जाना शुरू हुआ और परिजन लगातार सुमित को उससे दूर रहने की सलाह देते रहे। लेकिन दोनों के बीच संपर्क बना रहा।26 अगस्त को सुमित के पास फोन आया। परिवार के अनुसार, इसके बाद वह घर से कपड़े लेकर निकला और फिर वापस नहीं आया। मोहित ने परिवार को सिर्फ इतना बताया कि सुमित चला गया है। वह कहां गया और उसके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी परिवार को नहीं दी गई।इसके बाद सुमित शामली में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।अब सुमित के पिता धर्मपाल ने एनकाउंटर की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि शनिवार को यूपी पुलिस उन्हें और उनके छोटे बेटे यशपाल को अपने साथ ले गई थी। देर रात पुलिस उन्हें घर छोड़कर गई और कथित तौर पर भरोसा दिया गया कि सुमित का एनकाउंटर नहीं किया जाएगा।लेकिन इसके बाद सुमित के एनकाउंटर की खबर सामने आई।धर्मपाल का सवाल है कि जब पुलिस ने एनकाउंटर नहीं करने का कथित भरोसा दिया था तो फिर सुमित को मुठभेड़ में क्यों मार दिया गया?हालांकि, सुमित के पिता ने यह भी कहा कि उन्हें अपने बेटे के मारे जाने का दुख नहीं है। उनका कहना है कि अगर सुमित ने गलत किया था तो उसे उसकी सजा मिली।लेकिन कहानी का सबसे गंभीर हिस्सा अब छोटे बेटे यशपाल को लेकर है।धर्मपाल का आरोप है कि पुलिस ने उनके छोटे बेटे यशपाल के साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक, यशपाल का सुमित के अपराध से कोई लेना-देना नहीं है और वह वाई-फाई लगाने का काम करता है।पिता का दावा है कि छोटे बेटे के साथ कथित मारपीट और थर्ड डिग्री के बाद उसकी हालत खराब है। इसी को लेकर धर्मपाल बेहद परेशान हैं।रिपोर्ट के अनुसार, धर्मपाल ने कहा कि वह बेहद मजबूर हो चुके हैं और अगर उनका छोटा बेटा ठीक नहीं हुआ तो वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं।एक तरफ अंकित बालियान के परिवार को इंसाफ मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता पुलिस की कार्रवाई और छोटे बेटे के साथ कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठा रहे हैं।इस पूरे मामले में धर्मपाल के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि क्या सुमित के एनकाउंटर और उसके परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच होगी?अंकित बालियान हत्याकांड की कहानी में अब एक नया मोड़ सामने आ गया है।

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×