पुरा महादेव में भगवान शिव को अर्पित हर पुष्प-अर्पण का सम्मान, प्रकृति का भी ध्यान
आस्था के केंद्र श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर में जीरो वेस्ट महोत्सव से उभर रहा जिम्मेदार आस्था का नया मॉडल
बागपत, 06 अगस्त 2026 — भारत के पर्व और त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामूहिक जीवन के उत्सव रहे हैं। भगवान शिव स्वयं प्रकृति के अधिपति और आराध्य माने जाते हैं। ऐसे में उनकी आराधना के बाद प्रकृति का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है। इसी विचार को व्यवहार में उतारते हुए बागपत का श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव अब धार्मिक मेलों की एक नई परिभाषा गढ़ता दिखाई दे रहा है। यहां आयोजित जीरो वेस्ट महोत्सव में संदेश साफ है— भक्ति भी, प्रकृति भी.. आस्था भी, जिम्मेदारी भी..
सावन मेले में जहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव को पुष्प, मालाएं, दूध, जल, चादर, कलावा, बेलपत्र, शहद आदि पूजा सामग्री अर्पित करते हैं, वहीं अब इन पवित्र अर्पणों के सम्मानजनक एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की विशेष व्यवस्था भी की गई है। मंदिर परिसर में तैनात कर्मी और स्वयंसेवक श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित फूल-मालाओं तथा अन्य जैविक पूजा सामग्री को सामान्य अपशिष्ट से अलग एकत्र कर रहे हैं, ताकि उनका पर्यावरण अनुकूल और उपयोगी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। यह पहल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक आयोजनों में व्यवहार परिवर्तन का भी प्रयास है। संदेश दिया जा रहा है कि भगवान को अर्पित प्रत्येक पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है, इसलिए उसका सम्मानजनक प्रबंधन भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यही सोच जीरो वेस्ट महोत्सव की आधारशिला बन रही है।
जिलाधिकारी बागपत आईएएस अस्मिता लाल का कहना है कि भारत के पर्व और त्योहार सदियों से खुशहाली, समृद्धि और आनंद के प्रतीक रहे हैं। ऐसे आयोजनों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाकर ही उनकी मूल भावना को और सशक्त किया जा सकता है। भगवान शिव प्रकृति के अधिपति हैं, इसलिए उनकी आराधना के साथ प्रकृति का संरक्षण भी हमारी आस्था का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।
जीरो वेस्ट महोत्सव मॉडल के अंतर्गत जैविक पूजा सामग्री के पृथक संग्रह, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कम्पोस्ट निर्माण, पुनः उपयोग की संभावनाओं तथा जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष कार्य किया जा रहा है। बागपत प्रशासन का प्रयास केवल मेले के दौरान सफाई बनाए रखना नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजनों की सोच बदलना है। यही कारण है कि जीरो वेस्ट महोत्सव को जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में विकसित किया गया है, जहां श्रद्धालु, मंदिर प्रबंधन, स्वयंसेवक, विभिन्न विभाग और स्थानीय नागरिक मिलकर जिम्मेदार आस्था का नया मॉडल तैयार कर रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञ भी मानते हैं कि धार्मिक आयोजनों में उत्पन्न जैविक सामग्री का वैज्ञानिक प्रबंधन सर्कुलर इकोनॉमी और सतत जीवनशैली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जब श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण साथ चलते हैं, तो धार्मिक आयोजन केवल उत्सव नहीं रहते, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाले जनआंदोलन बन जाते हैं। पुरा महादेव में शुरू हुई यह पहल अब केवल एक मंदिर या एक मेले तक सीमित नहीं है। भक्ति भी, प्रकृति भी.. आस्था भी, जिम्मेदारी भी.. का संदेश बागपत को धार्मिक मेलों की नई सोच देने के साथ-साथ देशभर के धार्मिक स्थलों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बनने की ओर बढ़ रहा है।
सूचना विभाग बागपत