जिलाधिकारी की पहल पर ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ मॉडल हुआ शुरू, हर स्कूल अपनाएगा एक मंदिर और कांवड़ सेवा शिविर
बच्चे बदलेंगे मंदिर, मंदिर बदलेंगे समाज… राजकीय स्कूलों के मिशन लाइफ इको क्लब चलाएंगे जीरो वेस्ट अभियान
मंदिरों में रोज जमा होने वाले फूल, प्लास्टिक और कचरे का अब होगा हिसाब, बागपत में बच्चों ने संभाला मिशन
बागपत 04 अगस्त 2026: अब जिले के मंदिरों में सिर्फ आरती, घंटियों और मंत्रोच्चार की गूंज ही नहीं सुनाई देगी, बल्कि स्कूली बच्चों की वह आवाज भी सुनाई देगी, जो श्रद्धालुओं से कहेगी—”पॉलीथिन नहीं, कपड़े का थैला अपनाइए… पूजा के फूल यहां डालिए, इससे खाद बनेगी… प्रकृति की रक्षा भी आस्था जितनी ही जरूरी है।” बागपत प्रशासन ने मंदिरों और कांवड़ सेवा शिविरों को पर्यावरण संरक्षण की ‘ओपन क्लासरूम’ और ‘लिविंग लैब’ में बदलने की अनोखी पहल शुरू की है। प्रकृति माँ के नाम इस जिम्मेदारी की कमान अधिकारियों के बजाय जिले के 23 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के ईको क्लबों को सौंपी गई है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में शुरू किए गए इस विशेष कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय अपने आसपास स्थित कम-से-कम एक मंदिर या कांवड़ सेवा शिविर से जुड़ेगा। यहां “भक्ति भी… प्रकृति भी, आस्था भी… जिम्मेदारी भी” की थीम पर ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ मॉडल विकसित किया जाएगा। यानी बच्चे किताबों में पर्यावरण पढ़ने के साथ-साथ मंदिर परिसर में उसके प्रयोग भी करेंगे और समाज को भी उससे जोड़ेंगे।
इस अभियान की प्रेरणा श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर में विकसित किए गए ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ मॉडल से मिली है। मेले में पहली बार आस्था, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल नवाचार और जनभागीदारी को एक साथ जोड़कर जो प्रयोग किया गया था, अब उसी मॉडल को जिले के सभी सरकारी विद्यालयों के माध्यम से वर्षभर मंदिरों और कांवड़ सेवा शिविरों तक पहुंचाया जाएगा। इस बार अभियान की सबसे बड़ी ताकत प्रशासन नहीं, बल्कि स्कूली बच्चे होंगे।
हर मंदिर बनेगा बच्चों की ‘ग्रीन लैब’
अभियान के तहत विद्यार्थी पहले अपने आसपास के मंदिरों और कांवड़ सेवा शिविरों का सर्वे करेंगे। वे यह पहचानेंगे कि सबसे ज्यादा कचरा कहां बनता है, प्लास्टिक का इस्तेमाल किन जगहों पर हो रहा है, पूजा सामग्री का निस्तारण कैसे किया जा रहा है और स्थानीय स्तर पर किन सुधारों की जरूरत है। इसके बाद प्रत्येक विद्यालय अपना स्थानीय जीरो वेस्ट एक्शन प्लान तैयार करेगा और मंदिर प्रबंधन समितियों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवा संगठनों तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से उसे लागू करेगा।
सिर्फ सफाई नहीं, लोगों की आदत बदलने की तैयारी
यह अभियान केवल मंदिरों की सफाई तक सीमित नहीं रहेगा। विद्यार्थी श्रद्धालुओं को प्लास्टिक और पॉलीथिन छोड़कर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। दुकानदारों, भंडारा संचालकों और कांवड़ सेवा शिविरों के संचालकों से भी प्लास्टिक पैकेजिंग कम करने को लेकर संवाद किया जाएगा। मंदिर परिसरों में स्वागत संदेश, सूचना बोर्ड और जनजागरूकता सामग्री भी विद्यार्थी ही तैयार करेंगे।
प्लास्टिक बैंक, कम्पोस्ट पिट और जल संरक्षण जैसे होंगे प्रयोग
मंदिर परिसरों में कचरे का पृथक्करण, प्लास्टिक बैंक, कम्पोस्ट पिट, पूजा के बाद बची फूल-माला और अन्य जैविक सामग्री से खाद तैयार करना, जलाभिषेक के जल का संरक्षण और पुनः उपयोग, रिसाइक्लिंग तथा स्थानीय स्तर पर रिसोर्स रिकवरी मॉडल जैसे प्रयोग किए जाएंगे। इसके साथ ही भंडारों और सेवा शिविरों में भोजन की बर्बादी रोकने तथा अतिरिक्त भोजन के जिम्मेदार उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
रील, नुक्कड़ नाटक और पोस्टर से चलेगा जागरूकता अभियान
विद्यार्थी पोस्टर, स्लोगन, निबंध, नुक्कड़ नाटक, रील और लघु वीडियो के जरिए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे। साथ ही स्थानीय मंदिरों के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक महत्व का भी दस्तावेजीकरण करेंगे। उत्कृष्ट डिजिटल सामग्री सूचना विभाग बागपत के माध्यम से व्यापक स्तर पर साझा की जाएगी।
प्रत्येक सप्ताह विद्यालयों की प्रार्थना सभा में पर्यावरण संरक्षण और ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ पर चर्चा होगी। ईको क्लब के प्रत्येक सदस्य को ‘ग्रीन एम्बेसडर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं ‘एडॉप्ट ए ट्री’ अभियान के तहत हर विद्यार्थी कम-से-कम एक पौधे के संरक्षण का संकल्प लेगा और मंदिर परिसर में लगाए गए पौधों की देखभाल में भी भागीदारी निभाएगा।
डीएम ने जारी कराई एसओपी, स्कूलों को मिला रोडमैप
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए जिला प्रशासन ने विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी की है। मंगलवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में आयोजित बैठक में सभी 23 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और ईको क्लब प्रभारियों को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार यादव ने इसे सामाजिक व्यवहार परिवर्तन का अभियान बताते हुए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। वहीं माध्यमिक शिक्षा समन्वयक डॉ. सत्यवीर सिंह ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय स्थानीय जरूरतों के अनुसार नवाचारों के साथ इस मॉडल को आगे बढ़ाएगा। सभी विद्यालयों को एक्शन प्लान तैयार करने, नोडल शिक्षक नामित करने, गतिविधियों का नियमित प्रलेखन करने और उत्कृष्ट कार्यों को जिला स्तर पर साझा करने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय की प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। उत्कृष्ट विद्यालयों, ईको क्लबों और विद्यार्थियों को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा, जबकि सफल मॉडलों को अन्य संस्थानों के साथ ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में साझा किया जाएगा।
मंदिरों से शुरू होगी नई सोच
आने वाले दिनों में अगर आप बागपत के किसी मंदिर में दर्शन करने जाएं और कोई स्कूली बच्चा आपसे प्लास्टिक अलग रखने, पूजा के फूल कम्पोस्ट के लिए निर्धारित स्थान पर डालने या जलाभिषेक का पानी व्यर्थ न बहाने की अपील करे, तो हैरान मत होइए। यही इस अभियान का उद्देश्य है। प्रशासन का मानना है कि जब बच्चे अपने गांव के मंदिरों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने की अगुवाई करेंगे, तब बदलाव केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सोच का भी हिस्सा बन जाएगा।