राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य पर गृह मंत्रालय करेगा सम्मानित, मुंबई में होगा अलंकरण
सुशासन में भाषा का योगदान: बागपत को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, भारत सरकार ने की घोषणा
बागपत, 02 अगस्त 2026। राजभाषा के क्षेत्र में बागपत ने राष्ट्रीय स्तर पर नई उपलब्धि हासिल की है। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए बागपत जनपद की नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) को ‘सर्वश्रेष्ठ’ श्रेणी में सम्मानित करने का निर्णय लिया है। देशभर में कार्यरत 592 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के कार्यों के मूल्यांकन के बाद इस वर्ष कुल 197 नराकास समितियों को सम्मान के लिए चुना गया है, जिनमें 57 समितियां ‘सर्वश्रेष्ठ’, 27 ‘उत्कृष्ट’ तथा 113 ‘प्रशंसनीय’ श्रेणी में चयनित हुई हैं।
राजभाषा विभाग के अनुसार विभिन्न समितियों का मूल्यांकन राजभाषा सूचना प्रबंधन प्रणाली पर उपलब्ध कराए गए आंकड़ों तथा निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया। इसमें राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, सदस्य कार्यालयों के समन्वय, राजभाषा गतिविधियों, नवाचारों और वर्षभर किए गए कार्यों का आकलन किया गया।
नागरिकों तक उनकी भाषा में पहुंचे सरकारी सेवाएं, यही है नराकास का उद्देश्य
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन केंद्र सरकार के कार्यालयों, राष्ट्रीयकृत बैंकों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किया जाता है। इन समितियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूचना-पट्ट, नामपट्ट, आवेदन पत्र, कार्यालयी प्रपत्र, पत्राचार, मुहर फाइल, वेबसाइट, डिजिटल सेवाएं, नागरिक सूचना, सार्वजनिक घोषणाएं और अन्य आवश्यक सामग्री हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हो। इससे नागरिक अपनी भाषा में सरकारी सेवाओं, योजनाओं और सूचनाओं को अधिक आसानी से समझ सकें तथा प्रशासन अधिक पारदर्शी, सुगम और जन-केंद्रित बन सके। साथ ही सदस्य कार्यालयों के बीच समन्वय स्थापित कर राजभाषा कार्यों में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान भी किया जाता है। समिति समय-समय पर सदस्य कार्यालयों का मार्गदर्शन भी करती है ताकि राजभाषा संबंधी नियमों का पालन एकरूपता के साथ सुनिश्चित किया जा सके।
समीक्षा, प्रशिक्षण और समन्वय से बनी अलग पहचान
बागपत में केनरा बैंक क्षेत्रीय कार्यालय के संयोजन में संचालित नराकास ने पिछले वर्षों में राजभाषा गतिविधियों को व्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाया। समिति द्वारा नियमित अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठकें, उपसमितियों का गठन, राजभाषा कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, हिंदी प्रतियोगिताएं तथा ‘कालिंदी धारा’ पत्रिका का नियमित प्रकाशन किया गया। इन पहलों से सदस्य कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ और कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग को नई गति मिली।
डिजिटल नवाचार भी बना उपलब्धि का आधार
समिति ने राजभाषा गतिविधियों को डिजिटल माध्यमों से भी जोड़ा। इसी क्रम में ‘हिंदी सेतु’ पहल विकसित की गई, जिसके माध्यम से राजभाषा से जुड़े नियम, दिशानिर्देश, प्रशिक्षण सामग्री और अन्य उपयोगी संसाधनों को एक मंच पर उपलब्ध कराया गया। इस डिजिटल नवाचार का विकास सूचना मित्र एवं माय भारत स्वयंसेवक अमन कुमार ने किया। समिति का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के उपयोग से सदस्य कार्यालयों में राजभाषा संबंधी संसाधनों तक पहुंच और अधिक सरल हुई है।
सामूहिक प्रयासों का परिणाम है सम्मान
समिति के अध्यक्ष मिन्हाजुल .कमर तथा सचिव अभयनाथ मिश्र ने कहा कि यह सम्मान नराकास से जुड़े सभी सदस्य कार्यालयों, अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता एवं सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि समिति आगे भी गृह मंत्रालय की राजभाषा नीति के अनुरूप कार्यालयों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग, सदस्य संस्थानों के बीच समन्वय तथा नवाचार आधारित पहलों को निरंतर आगे बढ़ाती रहेगी। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा यह सम्मान 14-15 सितंबर 2026 को मुंबई के सिडको प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान प्रदान किया जाएगा। 15 सितंबर को आयोजित सम्मान समारोह में देशभर से चयनित नराकास समितियों को सम्मानित किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष मिन्हाजुल कमर तथा सचिव अभयनाथ मिश्र यह सम्मान प्राप्त करेंगे। इस उपलब्धि पर संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे सभी सदस्य कार्यालयों के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
सूचना विभाग बागपत