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मेरे मन में सवाल आया कि बच्ची ने घर आकर क्यों नहीं बताया ये सब? मेरे बेटे के साथ कुछ भी ऐसा होता है तो घर आने के बाद एक नहीं दो शिकायत करता है, एक कि फलां बच्चे ने ये किया और दूसरा मैम को बताया तो उन्होंने क्या और कितना एक्शन लिया, या नहीं लिया।

मैंने उसके दिमाग में बैठा रखा है कि दुनिया में उसे कोई भी परेशान करेगा तो मम्मा उसका बैंड बजा देगी। कॉलोनी में कुछ लड़के परेशान करते थे। दो बार रोते हुए घर आया। मुझे लगा कि इतना नहीं हो सकता। एक दिन मैं इसके पीछे गई। एक लगभग पंद्रह साल का लड़का इस पर चिल्लाया, बॉल को हाथ लगाया तो हाथ तोड़ दूंगा। इतना सुनते ही मेरे सब्र की सारी सीमा पार हो गई। मैंने सामने आकर कहा हाथ लगाकर दिखा। पूरे ग्रुप को अच्छे से पालिश किया। फिर जेंटल आंटी बनकर सबसे अभिनंदन को सॉरी कहलवाया और उसके बाद सब इसे अच्छे से खिलाने लगे।

बचपन में किसी दुकानदार ने यदि इसे इग्नोर कर दिया तो मैंने हमेशा सारी बात बीच में रोककर बोला कि इसकी सुनो, ये आपका कस्टमर है, मैं नहीं।

स्कूल में एक टीचर ने बिना गलती के चिल्ला दिया और ऐसी बात बोली जो नहीं बोलनी थी। बेटे ने घर आकर बताया। मैंने टीचर को फोन किया। बोली I am having my lunch. मैंने कहा, I don’t care because my son is not eating. He did not do anything, I did that. Now you dare to shout at me.

इसके बाद इस मामले को ऊपर तक बताया। और किस भाषा में बताया होगा कि प्रिंसिपल ने एक घंटा प्राइमरी विंग की टीचर को पालिश किया।

ऐसी अनगिनत घटनाएं हैं। अब मुद्दे पर आते हैं। उस बच्ची ने ये सब घर आकर अपने पैरेंट्स को बताने का इंतजार क्यों नहीं किया? अवश्य ही वो पहले शिकायत कर चुकी होगी और उसे घर से भी कोई ठोस सॉल्यूशन नहीं मिला होगा। तभी अंतिम बार उसने मौत को चुना। उसे लगा होगा कि उसके माता पिता इतने सक्षम नहीं हैं कि इस मामले को सुलझा पाएं।

अब सवाल है कि अपने बच्चों के लिए हमें किस हद तक जाना चाहिए? जवाब है कि बच्चों के सामने कोई हद ही नहीं होनी चाहिए। सामाजिक छवि, स्कूल, टीचर का सम्मान, पड़ोसी से संबंध, रिश्ते, लोग क्या कहेंगे आदि सब ख्यालों को सब चूल्हे भाड़ में झौंक दीजिए और बस वो कीजिए जो आपके बच्चे के लिए अच्छा हो। मुझे बिल्कुल गलत नहीं लगा जब शाहरुख खान वानखेड़े के कर्मचारी से लड़े। उसने उनके बच्चे को धक्का दे दिया था। मैं भी यही करती और आपको भी यही करना चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करते तो जानवर आपसे ज्यादा अच्छे हैं। क्योंकि वफादार कहे जाने वाले पालतू कुत्ते भी बच्चों के लिए अपने मालिक तक को काट लेते हैं।

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