क्या सचमुच लोग चोरी रोकना चाहते हैं? अगर रोकना ही चाहते हैं तो अपनी-अपनी जाति-धर्म के चोरों का साथ क्यों दे रहे हैं?
चोरों की बनायी हुई व्यवस्था का समर्थन क्यों कर रहे हैं?
सारे लोग अपनी-अपनी जाति के चोरों के साथ मजबूती से खड़े हो जायें और हर चुनाव में अपनी-अपनी जाति और अपने-अपने मजहब के चोरों का हाथ मजबूत करते रहें, तो क्या चोरी रुकेगी?
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को लूटने के लिए जिस व्यवस्था को लागू किया था उसी व्यवस्था को, कुछ संशोधनों के साथ, आज भी क्यों चला रहे हैं?
ईस्ट इंडिया कंपनी की बनायी हुई लुटेरी व्यवस्था को संविधान का लबादा ओढ़ाकर शोषक वर्ग लूट जारी रखे हुए है बल्कि पहले के मुकाबले बहुत जघन्यतम् तरीके से लूट रहा है। मँहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सूदखोरी, जमाखोरी, मिलावटखोरी, जुआखोरी, … लूट के हथकण्डे नहीं तो क्या हैं?
टैरिफ, टैक्स, जैसी कानूनी लूट का समर्थन लोग क्यों कर रहे हैं?
बड़े पूँजीपतियों के पास देश की आधी से अधिक पूंजी बिना कानूनी चोरी के कैसे इकठ्ठा हुई है?
ये भगत सिंह का भारत है या अमेरिकी साम्राज्यवादी सुपर पावर के नेतृत्व में ईस्ट इंडिया कंपनी का नया भारत है?
रजनीश भारती
जनवादी किसान सभा
