आओ आज खेलों की दुनिया की दो महान घटनाएं, जो स्वर्णिम इतिहास बन गईं, उनकी चर्चा करते है l पहली घटना 02 दिसंबर 2022 की है स्पेन में एक क्रॉस कंट्री रेस का आयोजन किया जा रहा था l
केनिया के सुप्रसिद्ध धावक अबेल मुताई दौडते वक्त अंतिम लाइन से कुछ मीटर ही दूर थे और उनके सभी प्रतिस्पर्धी पीछे थे। अबेल ने स्वर्ण पदक लगभग जीत ही लिया था, इतने में कुछ गलतफहमी के कारण वे अंतिम रेखा समझकर एक मीटर पहले ही रुक गए।
उनके पीछे आनेवाले स्पेन के इव्हान फर्नांडिस के ध्यान में आया कि अंतिम रेखा समझ नहीं आने की वजह से वह पहले ही रुक गए।
उसने चिल्लाकर अबेल को आगे जाने के लिए कहा लेकिन स्पेनिश नहीं समझने की वजह से वह नही हिला।
आखिर मे इव्हान ने उसे धकेल कर अंतिम रेखा तक पहूंचा दिया ।
इस कारण अबेल को इस रेस में प्रथम तथा इव्हान को दूसरा स्थान मिला।
पत्रकारों ने इव्हान से पूछा तुमने ऐसा क्यों किया ?
मौका मिलने के बावजूद तुमने प्रथम स्थान क्यों गंवाया ? इव्हान ने कहा, मेरा सपना है कि हम एक दिन ऐसी मानवजाति बनाएं जो एक दूसरे को मदद करेगी ना कि उसकी भूल से फायदा उठाएगी।
मैने प्रथम स्थान नहीं गंवाया। पत्रकार ने फिर कहा लेकिन तुमने कीनियाई प्रतिस्पर्धी को धकेलकर आगे किया। इस पर इव्हान ने कहा, वह प्रथम था ही, यह प्रतियोगिता उसी की थी। पत्रकार ने फिर कहा, लेकिन तुम स्वर्ण पदक जीत सकते थे l तुम समझते हो उस जीतने का क्या अर्थ होता।
मेरे पदक को सम्मान मिलता ? मेरी मां ने मुझे क्या कहा होता ? संस्कार एक पीढी से दूसरी पीढी तक आगे जाते रहते है।
मैने अगली पीढी को क्या दिया होता ?
दूसरों की दुर्बलता या अज्ञान का फायदा न उठाते हुए उनको मदद करने की सीख मेरी मां ने मुझे दी है।
अब दूसरी घटना पर आते हैं l ये घटना टोक्यो ऑलंपिक 2020 की है, जिसका आयोजन कोरोना महामारी कारण 2021 में किया गया l पुरुषों की हाई जम्प फाइनल था। फाइनल में इटली के जियान मारको टेम्पबरी का सामना क़तर के मुताज़ इसा बर्शिम से हुआ।
दोनों ने 2.37 मीटर की छलांग लगाई और बराबरी पर रहे ! उसके बाद ओलंपिक अधिकारियों ने उनमें से प्रत्येक को तीन और प्रयास दिए l लेकिन वे 2.37 मीटर से अधिक तक नहीं पहुंच पाए। उन दोनों को एक और प्रयास दिया गया, लेकिन उसी वक़्त टाम्पबेरी पैर में गंभीर चोट के कारण वह अंतिम प्रयास से पीछे हट गए।
ये वो क्षण था जब मुताज़ बरशिम के सामने कोई दूसरा विरोधी नहीं था औऱ उस पल वह आसानी से अकेले स्वर्ण पदक को जीत सकते थे, जो किसी भी खिलाड़ी का जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है l
लेकिन बर्शिम के दिमाग में कुछ घूम रहा था औऱ फ़िर कुछ सोचकर उसने एक अधिकारी से पूछा, अगर मैं भी अंतिम प्रयास से पीछे हट जाऊं तो क्या हम दोनों के बीच गोल्ड मैडल साझा किया जा सकता है ?
कुछ देर बाद एक आधिकारी जाँच कर पुष्टि करता है और कहता है, हाँ बेशक गोल्ड आप दोनों के बीच साझा किया जाएगा ।
बर्शिम ने ज्यादा देर सोच विचार नहीं किया l और उसने आखिरी प्रयास से हटने की घोषणा कर दी।
यह देख इटली का प्रतिद्वन्दी ताम्बरी दौड़ा और मुताज़ बरसीम को गले लगा कर चिल्लाया ! दोनों भावुक होकर रोने लगे। लोगों ने जो देखा वह खेल भावना की पराकाष्ठा थी, दूसरे खिलाड़ी भी भावुक हो गए। यह अवर्णनीय खेल भावना को प्रकट करता है जो धर्मों, रंगों और सीमाओं को अप्रासंगिक बना देता है l
इंसान का चरित्र किसी भी मैडल से बड़ा है l
बस आज इतना सा सवाल है, हम कहाँ खडे है? ट्रैक एंड फिल्ड की दौड़ से जिन्दगी की दौड़ बिल्कुल अलग है l जिंदगी की दौड़ का असली विजेता वहीँ है जो दूसरों की जीत का कारण बनता है l
सुप्रभात 🙏