।। संसार में कुछ भी नित्य नहीं है ।।
यह शरीर नश्वर है, युवावस्था क्षणभंगुर है और प्रत्येक परिस्थितियाँ निरंतर बदलती रहती हैं।
जिन सम्बन्धियों को हम अपना मानते हैं न, ये सब प्रारब्धानुसार हमें इस सांसारिक जीवन में संप्राप्त होते हैं। और कभी न कभी इनसे वियोग होना भी सुनिश्चित है, और इसी प्रकार धन, भवन, भौतिक संसाधनों को भी हमें समझना चाहिए। इस संसार में कुछ भी नित्य नहीं है।
आत्मा ही एकमात्र नित्य तत्त्व है; शेष सब अनित्य और क्षणिक हैं।
अतः संतोषपूर्वक भगवान को स्मरण करते हुए जीवन के प्रत्येक क्षण को प्रसन्नता पूर्वक जियें।
आसक्ति छोड़कर समभाव से कर्म करें, यही गीता का सार है।
आज का दिन शुभ मंगलमय हो।