इतिहास के पन्नों में तीन नाम दर्ज हो चुके हैं ममता, नवीन और नीतीश! कल को जब भारतीय राजनीति का इतिहास लिखा जाएगा, तो छात्र तीनों को पढ़कर पूछेंगे – “सर, ये मध्यकालीन राजा थे क्या?”

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नहीं भाई, ये लोकतंत्र के “ट्रांसफर विंडो” के सबसे महंगे खिलाड़ी थे। अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए इन्होंने BJP को पूर्वी भारत का “VIP एंट्री पास” दे दिया।

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बंगाल की बात करें तो 2000 से पहले BJP वहाँ एक भी सीट जीतने के काबिल नहीं थी। ममता बनर्जी अगर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बनने का लालच न करतीं, तो आज बंगाल में BJP का संगठन ही नहीं खड़ा होता। लेकिन लालच तो लालच होता है ना? मंत्री पद मिल गया, और बदले में BJP को बंगाल का दरवाजा खोल दिया।

ओडिशा में नवीन पटनायक का भी वही हाल था समाजवादी पिता के पुत्र नवीन को BJP की हर अदा अच्छी लगती थी। हालांकि ममता और नवीन पटनायक ने अंतिम समय में अच्छी लड़ाई लड़ी – जैसा हर गलती करने वाला करता है। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

और नीतीश कुमार? अरे भाई, वो तो इन दोनों के सामने “कमजोर दिल का राजकुमार” थे। 1-2 बार तो लड़े भी, लेकिन BJP का उन पर एहसान इतना था कि लड़ाई शुरू होते ही हार मान ली।

अब इनकी विदाई पर ज़्यादा सहानुभूति की ज़रूरत नहीं है, इन्हें तैयार ही किया गया था इस काम के लिए ही

SIR में वोट कटने की बातें तो ठीक हैं, लेकिन ममता ने 15 साल तक माकपा के कैडरों के साथ जो सलूक किया, क्या वो लोकतंत्र था?

सिंगूर का प्रोपगैंडा? कोटेश्वर राव जैसे माओवादी नेता की मदद लेकर सत्ता में आईं पार्टी ने फिर सत्ता मिलते ही उनके साथ क्या किया?

TMC, JDU और BJD – ये तीनों पार्टियाँ लोकतंत्र की “ट्रांजिशनल पार्टी” थीं।
उनका काम बस BJP को पूर्वी भारत में घुसाने का था। इन्हें मजदूरी एडवांस में मिल चुकी थी –अब इनका उद्देश्य पूरा हो गया।

अब असली खेल शुरू होता है। यहां से
लेफ्ट और कांग्रेस का जनसंघर्ष ही तय करेगा BJP कितने दशक तक इन राज्यों पर राज करेगी।

अब कहानी यहां खत्म नहीं होती, असली मोड़ यहीं से शुरू होता है। इतिहास गवाह है कि जब भी सत्ता एकतरफा मजबूत दिखती है, वहीं से प्रतिरोध की जमीन तैयार होती है। सवाल अब भारतीय जनता पार्टी का नहीं, सवाल विपक्ष की इच्छाशक्ति का है। क्या कांग्रेस और वाम दल फिर से जमीन पर उतरेंगे, गांव-गांव, मजदूर-किसान के बीच अपनी पकड़ बनाएंगे? या फिर राजनीति सिर्फ सोशल मीडिया और बयानबाज़ी तक सीमित रहेगी!

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