अमेरिका ने कहा है कि वो ईरान को पाषाण युग में पहुंचा देगा। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि वो 6000 साल पुरानी सभ्यता है, उसे 300 साल पुरानी सभ्यता वाले खत्म नहीं कर सकते। उसकी बात सही है लेकिन क्या सच में ईरान खुद को 6000 साल पुरानी संस्कृति मानता है। संकट के समय ईरानियों को संस्कृति और सभ्यता याद आ रही है लेकिन आम दिनों में ज्यादातर मुस्लिम देश इस्लाम के अलावा कुछ और देखने को तैयार नहीं होते। अगर सच में ईरान खुद को 6000 पुरानी सभ्यता से जोड़ता तो वो कभी भी इजराइल का दुश्मन नहीं बन सकता था। इस्लाम के उदय से हज़ार साल पहले एक ईरानी राजा ने यहूदियों को इजराइल में लाकर बसाया था क्योंकि उन्हें वहां से निकाल दिया गया था। उसने उन्हें सुरक्षा का वादा किया था। इस्लाम अपनाने के बाद यही ईरानी यहूदियों को खत्म करने की कोशिश में लग गए। ये लोग इजराइल को कोई देश ही नहीं मानते और यहूदियों के अस्तित्व से इंकार करते हैं। इनका मानना है कि यहूदियों को धरती पर रहने का कोई हक नहीं है। वैसे तो पूरा इस्लामी जगत मानता है कि मुसलमानों के अलावा किसी और को धरती पर रहने का हक नहीं है। अगर उन्हें रहना है तो इस्लाम अपनाना होगा, इसी सोच ने पूरी दुनिया में आग लगाई हुई है। आप मुसलमानों के साथ शांति से नहीं रह सकते क्योंकि वो इस्लाम अपनाने तक आपको इंसान नहीं मानते। अगर आप कुछ नहीं भी करते हैं तो भी वो आपको समाप्त करने की कोशिश में लगे रहते हैं। इंडोनेशिया बेशक एक इस्लामी देश है लेकिन वो खुद को एक पुरानी सभ्यता मानता है इसलिए उसे सनातन से कोई परेशानी नहीं है। इस्लाम अपनाने के बावजूद वो लोग सनातन संस्कृति का पालन कर रहे हैं। उनका मानना है कि हमने धर्म बदला है, संस्कृति नहीं बदली। इसके विपरीत पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और ईरान जैसे देश अपनी संस्कृति भुला चुके हैं। ये लोग इस्लाम से पहले अपने अस्तित्व को नहीं मानते। ईरान के मूलनिवासी पारसी बेहद समझदार लोग हैं, लेकिन इस्लाम अपनाने के बाद कट्टरता ने इनको ऐसा बना दिया है। कुछ हज़ार की जनसंख्या वाले पारसियों ने भारत के निर्माण में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान दिया है लेकिन अपने ही देश को आगे नहीं बढ़ा सके, क्योंकि इन्होंने इस्लाम अपना लिया है। आज ईरानी सत्ता अपना ज्यादातर धन हथियारों के निर्माण पर खर्च कर रही है क्योंकि उसे इजराइल को खत्म करना है। ईरानी सत्ता ने 4-5 बड़े-बड़े आतंकवादी संगठन खड़े कर दिए हैं, जो पूरी दुनिया के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। हमास, हिज़्बुल्लाह, हूती और इराकी शिया मिलीशिया सिर्फ इजराइल के दुश्मन नहीं है, ये उन सबके दुश्मन हैं, जो इस्लाम को नहीं मानते । ये उन मुसलमानों के भी दुश्मन हैं जो कट्टरता से दूर हो रहे हैं। यही कारण है कि ये अरब देशों को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं। आप इजराइल और अमेरिका का समर्थन न करें, कोई बात नहीं, लेकिन ये देश दुनिया को बचाने की जंग लड़ रहे हैं। अमेरिका बेहद स्वार्थी देश है, लेकिन मूर्ख नहीं है। सबको मुसलमान बनाने की कोशिश सबसे बड़ी मूर्खता है, इस मूर्खता को अरब देश छोड़ चुके हैं, लेकिन ईरान अभी भी इस काम में लगा हुआ है। हमारे देश के मुस्लिम ईरान के समर्थन में अपने बर्तन तक बेच रहे हैं ताकि उसको धन दिया जा सके, ये लोग ये काम अपने देश के लिए नहीं कर सकते। इसी सोच और विचारधारा से सारी दुनिया को खतरा है, इस पर विचार करने की जरूरत है।