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भूकंप-बाढ़ या हादसा… कैसे करें तुरंत बचाव? बागपत में सिविल डिफेंस वॉलंटियर के रूप में प्रशिक्षित हुए युवा

जब संकट आएगा, यही युवा बनेंगे सहारा: विशेषज्ञों से प्रशिक्षण पाकर तैयार हुए युवा

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने नागरिक सुरक्षा स्वयं सेवकों को वितरित किए प्रमाण पत्र

बागपत दिनांक 24 मार्च 2026 – किसी भी आपदा के समय शुरुआती कुछ मिनट सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। यदि उस समय आसपास मौजूद लोग सही तरीके से प्रतिक्रिया दे दें तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से जनपद बागपत में नागरिक सुरक्षा कार्यालय की ओर से सात दिवसीय नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका आज समापन हुआ। सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र एवं किट प्रदान की गई।

नागरिक सुरक्षा नियंत्रक एवं जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने स्वयंसेवकों को नागरिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देकर स्वयंसेवा से समाज में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा आपदा प्रबंधन से जुड़ी सीख को अपने गांव-शहर में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। जिलाधिकारी ने कहा कि नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण एक जीवनभर काम आने वाली जिम्मेदारी और संकल्प की शुरुआत है। आज तैयार हो रहे ये युवा किसी भी आपदा के समय फर्स्ट रेस्पॉन्डर बनेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि प्रशिक्षित युवा अपने आसपास के लोगों को भी जोड़ें, उन्हें जागरूक करें और एक ऐसा नेटवर्क तैयार करें, जो किसी भी संकट में तुरंत सक्रिय हो सके।

बाबू कामता प्रसाद जैन महाविद्यालय में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सिविल डिफेंस के लिए चयनित युवाओं को आपदा के समय त्वरित, संगठित और प्रभावी नागरिक प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को यह समझाया गया है कि आपदा आने पर घबराहट नहीं बल्कि समझदारी, संगठन और प्राथमिक उपचार की जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव बन सकती है। अब यही युवा संकट के समय अपने आसपास के लोगों के मददगार बनेंगे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर नागरिक सुरक्षा बागपत के उप नियंत्रक एवं डिप्टी कलेक्टर मनीष कुमार यादव ने स्वयंसेवकों को सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों के दायित्वों की जानकारी दी भूमिका, उद्देश्य और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सिविल डिफेंस केवल एक संगठन नहीं बल्कि नागरिकों की वह सुरक्षा व्यवस्था है जो आपदा, युद्ध, प्राकृतिक संकट या किसी भी आकस्मिक घटना के समय आम लोगों की रक्षा और सहायता के लिए सक्रिय होती है। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को जागरूक बनाना, उन्हें आपदा के समय सही निर्णय लेने में सक्षम बनाना और राहत व बचाव कार्यों में प्रशासन की मदद करना है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के युवा प्रशिक्षित हों तो किसी भी संकट की स्थिति में राहत कार्य तेजी से और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

इस सात दिवसीय प्रशिक्षण में एनडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों सहित अन्य अधिकारियों ने स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने बताया कि आपदा केवल प्राकृतिक घटनाएं ही नहीं होतीं बल्कि मानवीय त्रुटियों, दुर्घटनाओं या तकनीकी विफलताओं से भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए नागरिकों को पहले से तैयार रहना चाहिए। राज्य युवा पुरस्कार विजेता माय भारत स्वयंसेवक अमन कुमार ने प्रशिक्षुओं से स्वयंसेवा क्षेत्र के अनुभव विस्तार से साझा किए। स्वास्थ्य विभाग से डॉ विभाष राजपूत ने फर्स्ट ऐड से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण के दौरान आपदा के विभिन्न प्रकारों और उनसे निपटने के तरीकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप, बाढ़, आग, भवन ध्वस्त होना, सड़क दुर्घटना और अन्य आपदाएं अचानक आ सकती हैं। ऐसे में सबसे जरूरी है कि व्यक्ति घबराए नहीं बल्कि स्थिति को समझते हुए सही कदम उठाए। भारत सरकार की एडवाइजरी के अनुसार प्रत्येक घर में एक फर्स्ट एड किट होना अनिवार्य है। इस किट में पट्टी, एंटीसेप्टिक दवा, कैंची, दस्ताने, दर्द निवारक दवा, गॉज, बैंडेज, थर्मामीटर और आवश्यक दवाइयां होनी चाहिए। यह छोटी-सी तैयारी आपदा या दुर्घटना के समय बहुत बड़ी मदद साबित हो सकती है।

आपदा विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि किसी भी आपदा के समय सबसे बड़ी गलती घबराहट होती है। कई बार लोग बिना सोचे-समझे ऐसे कदम उठा लेते हैं जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसलिए आपदा के समय शांत रहना, आसपास के लोगों की मदद करना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी होता है। स्वयंसेवकों को हेल्पलाइन नंबरों के बारे में भी जानकारी दी गई ताकि आपदा के समय तुरंत सहायता प्राप्त की जा सके।

प्रशिक्षण के दौरान यह भी समझाया गया कि आपदा से बचाव केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि हर नागरिक की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि समाज के लोग जागरूक और प्रशिक्षित हों तो किसी भी संकट की स्थिति में नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में सुरक्षा और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।

रेस्क्यू तकनीक, घायल व्यक्ति को सुरक्षित निकालना, प्राथमिक उपचार देना और आपदा के समय भीड़ को नियंत्रित करने जैसे अभ्यास शामिल रहे। स्वयंसेवकों ने इन अभ्यासों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और आपदा प्रबंधन से जुड़े कौशल सीखे। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं में सेवा और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। जब कोई युवा सिविल डिफेंस स्वयंसेवक बनता है तो वह केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए जिम्मेदार बन जाता है। संकट की घड़ी में वही युवा सबसे पहले आगे बढ़कर लोगों की मदद करता है। वहीं परीक्षा का आयोजन कर स्वयंसेवकों की समझ को भी परखा गया जिसमें उत्तीर्ण होने पर ही प्रमाण पत्र जारी किया गया।

इस अवसर पर अधिकारियों ने युवाओं से अपील की कि वे समाज में जाकर लोगों को आपदा से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करें। यदि हर नागरिक थोड़ी-सी सावधानी और जानकारी रखे तो कई बड़ी दुर्घटनाओं और आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम आयोजन में आपदा विशेषज्ञ अश्विनी कुमार, माय भारत स्वयंसेवक अमन कुमार, प्रशिक्षक पुनिष कुमार, अग्निशमन विभाग से सोनू सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी स्वयंसेवकों को विभिन्न व्यावहारिक अभ्यास कराए।

सूचना विभाग बागपत

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