थाना कुर्रा, जनपद मैनपुरी से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना का सवाल बन चुका है।
राजू कश्यप जी की दुखद मृत्यु के बाद, जब उनका शव 16 तारीख को बरामद हुआ, तब मौके पर कई तरह की चर्चाएँ और सवाल उठे। इसी दौरान 14 फरवरी को स्वतंत्र पत्रकार अतुल कश्यप ने मौके पर पहुंचकर परिवार का पक्ष भी रखा और प्रशासन, विशेषकर एसपी ग्रामीण राहुल मिठास जी का पक्ष भी सामने रखा। यानी उन्होंने दोनों पक्षों को दिखाते हुए अपनी पत्रकारिता की जिम्मेदारी निभाई।
लेकिन इसके बाद उन्हीं पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
यह सवाल खड़ा होता है —
अगर पत्रकार पीड़ित परिवार की आवाज नहीं उठाएगा, तो कौन उठाएगा?
यह मुद्दा किसी एक पत्रकार का व्यक्तिगत मामला नहीं है। यह उन संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता को संरक्षण देते हैं। यदि निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर कार्रवाई होती है, तो इससे समाज में एक भय का माहौल बन सकता है।
हम माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से निवेदन करते हैं कि इस पूरे प्रकरण का निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर त्रुटि हुई है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह समय है जागरूक रहने का।
यह समय है संविधान के मूल्यों को मजबूत करने का।
यह समय है सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता के साथ खड़े होने का।
आज अगर एक आवाज दबेगी, तो कल किसी और की भी दब सकती है।
हम न्याय की मांग करते हैं — निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं — और कानून के दायरे में रहकर सच के साथ खड़े रहने की अपील करते हैं।
आज स्वतंत्र पत्रकार अतुल कश्यप के साथ प्रदेश के समस्त कश्यप समाज ,राजनेताओं, विधि सलाहकारों संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष एवं समस्त समाज को खड़ा होना चाहिए नहीं तो एक सच्चे पत्रकार की आवाज को दबाने पर फिर कोई कभी पीड़ित की आवाज को नहीं उठाएगा।
धन्यवाद।
जय संविधान
जय भारत
जय हिंद 🇮🇳