सेवा, सुरक्षा और स्मार्ट तकनीक के संग शुरू होगी कांवड़ यात्रा, जीरो वेस्ट महोत्सव का संदेश देगा बागपत
जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा, क्यूआर आधारित कांवड़ यात्रा एप से एक क्लिक पर मिलेगी हर सुविधा
30 जुलाई से शुरू होगा ऐतिहासिक परशुरामेश्वर पुरा महादेव मेला, 15 निजी अस्पताल रहेंगे 24×7 तैयार
हर जोन-सैक्टर पर अफसरों की निगरानी, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और वायरलेस नेटवर्क से होगी पल-पल की मॉनिटरिंग
बागपत, 29 जुलाई 2026। श्रावण मास की शुरुआत के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी आस्था यात्राओं में शामिल परशुरामेश्वर पुरा महादेव कांवड़ यात्रा और ऐतिहासिक मेले का आगाज गुरुवार से होने जा रहा है। लाखों शिवभक्तों के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस बार सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, यातायात और जनसुविधाओं की ऐसी बहुस्तरीय व्यवस्था तैयार की है, जिसमें श्रद्धालुओं को अधिकतम सुविधा मिले। आज बागपत कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अस्मिता लाल और पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने सभी विभागों, जोनल एवं सेक्टर मजिस्ट्रेटों तथा नोडल अधिकारियों के साथ घंटों चली समीक्षा बैठक में तैयारियों को अंतिम रूप दिया और स्पष्ट संदेश दिया कि कांवड़ यात्रा केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सेवा और समन्वय का भी महापर्व है।
प्रशासन की रणनीति इस बार यात्रा के प्रत्येक चरण को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने पर केंद्रित है। बैठक में पेयजल, बिजली, पार्किंग, चिकित्सा, सफाई, खाद्य सुरक्षा, परिवहन, संचार, पुलिस व्यवस्था और आपदा प्रबंधन सहित प्रत्येक व्यवस्था की अलग-अलग समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी स्तर पर समन्वय की कमी नहीं दिखनी चाहिए और प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों के प्रति पूरी तरह उत्तरदायी रहेगा।
पहले सोमवार पर रहेगा फोकस
प्रशासन का विशेष फोकस 3 अगस्त को पड़ने वाले पहले सोमवार पर रहेगा, जब सबसे अधिक संख्या में शिवभक्तों के पहुंचने की संभावना है। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि पहले सोमवार को अपने-अपने क्षेत्रों में स्वयं मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करें। किसी भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई हो और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए।
इस बार कांवड़ यात्रा में प्रशासन की डिजिटल पहल भी श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत बनी है। सूचना विभाग द्वारा विकसित क्यूआर आधारित ‘कांवड़ यात्रा एप’ को पूरे कांवड़ मार्ग पर उपलब्ध कराया गया है। श्रद्धालु कांवड़ यात्रा एप के क्यूआर कोड को स्कैन कर अथवा linktr.ee/KanwarYatra2026 से अपने मोबाइल पर कंट्रोल रूम, आपातकालीन हेल्पलाइन, मेडिकल, पुलिस सहायता, फायर स्टेशन, पार्किंग, शौचालय, पेयजल, चिकित्सा शिविर और अन्य आवश्यक सेवाओं की जानकारी तत्काल प्राप्त कर सकेंगे।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस बार चिकित्सा व्यवस्था को काफी मजबूत बनाया गया है। कांवड़ मार्ग पर 15 निजी अस्पतालों को चिन्हित किया गया है, जो चौबीसों घंटे उपचार के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और मेला क्षेत्र में मेडिकल टीमों की तैनाती रहेगी। विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों पर अतिरिक्त बेड, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, आवश्यक दवाएं और मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस भी लगातार सक्रिय रहेंगी। शिविरों में एक्सपायरी दवाओं पर पूरी तरह रोक रहेगी और नियमित जांच कराई जाएगी।
कांवड़ यात्रा के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सभी विद्युत पोल, लाइन और ट्रांसफार्मरों की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। जहां आवश्यक होगा वहां वैकल्पिक बिजली व्यवस्था और जनरेटर भी उपलब्ध रहेंगे। विद्युत लाइनों के नीचे किसी भी शिविर की अनुमति नहीं दी जाएगी। खुले तारों और लोहे के ढांचों को सुरक्षित बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि करंट जैसी घटनाओं की संभावना पूरी तरह समाप्त की जा सके। इसी प्रकार पेयजल व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सभी हैंडपंपों की मरम्मत, पानी की टंकियों और पाइपलाइन की जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग पर चौबीसों घंटे जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी टीमें लगातार उपलब्ध रहेंगी।
कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बहुस्तरीय बनाया गया है। पूरे मेला क्षेत्र और प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी। पुलिस पेट्रोलिंग, डायल-112, वायरलेस संचार व्यवस्था, बम निरोधक दस्ता, अग्निशमन दल और भीड़ नियंत्रण टीमों को सक्रिय रखा जाएगा। इस बार 100 सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को भी प्रशासन ने जिम्मेदारी दी है। वहीं संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। महिला कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं और किसी भी विवाद, अफवाह या असामाजिक गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
इतने बड़े आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग को कई सुपर जोन, जोन और सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में जोनल एवं सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी तथा संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी तैनात रहेंगे। इनके अतिरिक्त रिजर्व मजिस्ट्रेट और रिजर्व स्टाफ भी रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत अतिरिक्त व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।
पूरे आयोजन की निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम संचालित होगा। यहां से सभी जोन और सेक्टरों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाएगा। किसी भी सूचना, दुर्घटना, चिकित्सा आपातस्थिति या कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को अलर्ट किया जाएगा। वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से प्रत्येक अधिकारी को एक-दूसरे से लगातार जोड़े रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बिना प्रशासनिक अनुमति के कोई भी कांवड़ शिविर संचालित नहीं होगा। शिविरों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता और सुरक्षा मानकों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। शिविरों में सेवा की भावना के साथ कार्य करने पर जोर दिया गया है।
श्रद्धालुओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्य विभाग को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। कांवड़ मार्ग और मेला क्षेत्र के सभी होटल, ढाबे और खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण होगा। मिलावट पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी प्रतिष्ठानों पर क्यूआर कोड और संचालक का मोबाइल नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य रहेगा, जबकि भोजनालयों में रेट लिस्ट भी लगानी होगी। कांवड़ यात्रा की धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए कांवड़ मार्ग पर मांस की दुकानें बंद रहेंगी। शराब की दुकानों को पूरी तरह ढकने और नियमानुसार संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने संबंधित विभागों को लगातार निगरानी रखने को कहा है।
मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग पर सफाई व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। नियमित फॉगिंग, कूड़ा उठान, मोबाइल शौचालय, जल निकासी, नालियों की सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था रहेगी। मार्गों पर सफाई दल चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सके। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कांवड़ मार्ग पर कहीं भी बेसहारा गौवंश नहीं दिखना चाहिए। इसके लिए पशुपालन विभाग और संबंधित अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कच्चे मार्गों की मरम्मत, बैरिकेडिंग और रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि बारिश या अन्य परिस्थितियों में भी श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
कांवड़ मार्ग पर झाड़ियों की कटाई-छंटाई, पेड़ों की लटकती शाखाओं को हटाने तथा जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। विशेष रूप से कच्चे मार्गों और जंगल से गुजरने वाले हिस्सों में वन विभाग की टीम लगातार सक्रिय रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग स्थलों का व्यवस्थित संचालन किया जाएगा। यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बसों की व्यवस्था भी की जाएगी। प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से काम करेंगे ताकि आम लोगों और श्रद्धालुओं दोनों को कम से कम असुविधा हो।
बैठक के समापन पर जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि परशुरामेश्वर पुरा महादेव मेला, बागपत जिले की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी सेवाभाव, संवेदनशीलता और बेहतर समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाए। वहीं पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के प्रति सहयोगात्मक और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन का लक्ष्य है कि लाखों शिवभक्त सुरक्षित वातावरण में सुगमता के साथ जलाभिषेक कर सकें और बागपत का यह ऐतिहासिक आयोजन शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्था का उदाहरण बने।
इस अवसर पर मेला मजिस्ट्रेट/एसडीएम दिग्विजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह, परियोजना निदेशक राहुल वर्मा, समस्त एसडीएम,सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
सूचना विभाग बागपत