
नितिन कुमार सिंह, बागपत/खेकड़ा। आजाद हिन्द फौज की पहली महिला जासूस नीरा आर्य ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अपने गद्दार पति की हत्या करके उस समय लाखों महिलाओं को विधवा होने से बचाया था। यह उद्गार खेकड़ा, जिला बागपत में नीरा आर्य स्मारक एवं पुस्तकालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री राजश्री चौधरी ने व्यक्त किए।
उल्लेखनीय है कि नीरा आर्य स्मारक एवं पुस्तकालय की स्थापना मधु धामा और तेजपालसिंह धामा ने व्यक्तिगत रूप से 2024 में की थी, जिसमें बागपत जिले के सभी स्वतंत्रता सेनानियों का प्रामाणिक डाटा सुरक्षित रखा गया है एवं छात्रों के लिए हजारों दुर्लभ पुस्तकें संग्रहित की गई हैं।

राजश्री चौधरी ने नेताजी सुभाष की आजादी से पहले जान बचाने के लिए नीरा आर्य का शुक्रिया भी अदा किया और पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नम आंखों से कहा कि यदि नीरा आर्य अपने पति की हत्या न करती तो उनका पति नेताजी सुभाष की हत्या कर देता और फिर देश आजाद नहीं हो पाता, क्योंकि हमें आजादी वास्तव में आजाद हिन्द फौज के कारण ही मिली है। राजश्री के भाषण के बीच में जब एक गाय के रंभाने की आवाज आई तो उन्होंने अपना भाषण गाय पर केंद्रित करते हुए कहा कि देश में गायों के वध, तस्करी और अवैध व्यापार पर शत-प्रतिशत प्रतिबंध होना चाहिए।

राजश्री चौधरी ने भारत सरकार से मांग की कि नीरा आर्य की जीवनगाथा स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाई जानी चाहिए।
आजाद हिंद फौज (INA) के एक सम्मानित सेनानी, जिनकी उम्र 102 वर्ष है, लेफ्टिनेंट आर. माधवन पिल्लई ने नीरा आर्य को श्रद्धांजलि देते हुए कदम कदम बढ़ाए जा गीत गुनगुनाया और नीरा आर्य को बीती सदी की सबसे बहादुर वीरांगना बताया। लेफ्टिनेंट आर. माधवन पिल्लई का जन्म 13 मार्च 1926 को बर्मा (अब म्यांमार) में हुआ था और उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में 1 नवंबर 1943 को आजाद हिंद फौज की सदस्यता ली थी। वे भी खेकड़ा में आजाद हिन्द फौज की अपनी साथी नीरा आर्य को श्रद्धांजलि देते हुए भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि हमने जंग के मैदान में अपना लहू बहाकर आजादी हासिल की थी।
शहीद भगत सिंह के साथ फांसी का फंदा झूलने वाले अमर बलिदानी शहीद सुखदेव के पौत्र अनुज थापर ने अपने संबोधन में कहा कि देश की आजादी के लिए नीरा आर्य के योगदान को कभी भूला नहीं जा सकता।
खेकड़ा की चेयरमैन नीलम धामा ने इस अवसर पर लोगों को आश्वासन दिया कि वे खेकड़ा की महान बेटी नीरा आर्य के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थल का नामकरण के लिए प्रस्ताव अवश्य लाएंगी और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देंगी।

कार्यक्रम में एक दर्जन से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में खेकड़ा एवं आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।
