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हे जग जीत डॉ जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी
तू ना होते तो अंबेडकर नहीं होते
अंबेडकर ना होते तो संविधान ना होता
संविधान ना होता तो देश आजाद ना होता
देश आजाद ना होता तो हम सब गुलाम होते
गांधी के व्यूह रचना से अंबेडकर हारे
संविधान निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेसी नारायण ने हराया
मिठाइया बेटी RSS कांग्रेसी के पड़ाव में
डंका बजा बजा के कांग्रेसी खुश हुए
नेहरू ने बोला संविधान के रोशनदान बन्द किए
हताश हो के अंबेडकर बंगाल चले गए
दादा जोगेंद्र ने पूछे पूना पेक्ट से संतुष्ट ना हुए
रोते हुए अंबेडकर ने दुखड़ा सुना दिए
निषादवंश का बेटा बहुत द्रवित हो गए
आवेश में जीती सीट से रिजाइन कर गए
त्याग संघर्ष से शरतचंद्र बोस कांग्रेसी को फिर हरा दिए
खुलना जैसोर से अंबेडकर को पुनः जितवा दिए
गांधी नेहरू को लगा झटका जब संविधान लिखने को गए
खुद दादा जोगेंद्र मण्डल जी संविधान पाक को लिख दिए

महान त्यागी तपस्वी संघर्षशील महायोद्धा कर्मयोगी पाकिस्तान के संविधान निर्माता तत्कालीन बंगाल सरकार के मंत्री तीन बार विधायक बनने वाले महान दार्शनिक तर्कशील महान विद्वान तीन विषयों में Phd कोलकाता यूनिवर्सिटी से सम्मानित विश्वविद्यालय विदुषी देश में समाज के पहले विद्वान डॉ जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी पिता श्री रामदयाल मंडल निषाद माता श्री संध्या रानी मंडल निषाद जी एक कृषक मछुआरा कैवर्त परिवार में जन्म 29 जनवरी 1904 में मास्तरीकड़ा गांव जिला बारीसाल आज बंगला देश में हुआ था

जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी प्रतिभा के धनी थे पढ़ने में मेधावी छात्र थेउनसे स्कूल में शिक्षकगण भी परेशान रहते थे* वारिसाल जिला के क्रिश्चन स्कूल से हाईस्कूल परीक्षा सम्पूर्ण बंगाल में टॉप किए थे उसके बाद कोलकाता यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिए समाज विज्ञान के ऑनर्स में यूनिवर्सिटी ऑफ मेरिट किए उसके बाद Phd किए हिस्ट्री ऑफ जियोलॉजी में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से Phd किए LLM में phd लन्दन से किए उस वक्त डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी को तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री 1930 डोनल्ड रैमजे के आमंत्रण पर house of Commons में सम्मानित बार एट लॉ एंड phd से सम्मानित किया गया था
डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी ने बंगाल प्रिवेंसियल चुनाव 1935 में भाग लिया निर्दलीय 18 सीट जीत कर फजलुल्ला हक को समर्थन दे कर अपने समाज के लिए तीन शर्त रखे थे
1 बंगाल में शिक्षा के लिए दलित पिछड़ों अल्पसंख्यकों को 5 लाख का बजट दिए जाए उनके लिए स्कूल कालेज खोला जाय
2 मंत्रिमंडल में तीन मंत्री बनाए जाए तीन स्थान अच्छा विभाग दिए गए
3 गांव में हॉस्पिटल बनाया जाय रोड बनाए जाए सेना में पुलिस में दलित पिछड़ों अल्पसंख्यकों को भर्ती कराया जाए
डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी ने बंगाल के भद्र मानुष को कमर तोड़ने के लिए लड़ते रहे
डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी ने कांग्रेस हिंदू महासभा के गठबंधन को बैक फूट पड़ रखे थे
पढ़ाई के दौरान में ही सुभाष चंद्र बोस से लन्दन में मुलाकात हुआ था बंग मित्रो सम्मान से लन्दन में उन्हें नवाजा गया था लेकिन कुलीन मानस के कारण जम नहीं पाए थे उन्हें दलित समाज से समझा गया था लेकिन वो केवर्त केवट मल्लाह मछुवाड़ा समाज से थे लेकिन बंगाल में उनके कारण इस समाज को बंगाल उड़ीसा असम त्रिपुरा में दलित समाज के कटेगी में रखा गया है!
डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी प्रथम गोलमेज सम्मेलन 1930 ,1931 1932 में साइमन कमीशन द्वारा आमंत्रण पत्र लन्दन में गए थे उनके साथ लाहौर के डा सुरेन्द्र ढींगरा राय साहब रामचरण निषाद जी शिवदयाल सिंह चौरसिया सर छोटू राम डा अंबेडकर उस गोल मेज सम्मेलन में भाग लेने गए थे
जब वे गोल मेज सम्मेलन में गए थे उस वक्त डा जोगेंद्र नाथ मंडल जी वोट का धिनियम में वोट का अधिकार अधिनियम बनाए जाए राजनीति में सुरक्षित मताधिकार अधिनियम राजनैतिक आरक्षण और शिक्षा में शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाए जाए इस तीन मुद्दों पर डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी डा सुरेन्द्र ढींगरा जी और राय साहब बाबू रामचरण निषाद जी डा जयपाल सिंह मुंडा चारों नेतृत्व एक स्वर में आवाज बुलन्द किए थे जिसके कारण सर साइमन कमीशन ने Communal Award दो वोट का अधिकार प्रस्ताव हाउस ऑफ कॉमन्स में महारानी क्यूंन मेरी और तत्कालीन प्रधानमंत्री डोनल्ड रैमजे ने गांधी एंड कंपनी के विच हस्ताक्षर करवा कर सम्पूर्ण भारत में 12 सितम्बर 1932 को लागू करवाए थे सर साइमन कमीशन ने भारत का स्वर्णिम दस्तावेज दो वोट का अधिकार दोहरी मताधिकार अधिनियम राजनैतिक में 85 प्रतिशत इस देश के असली मालिकों को आरक्षण दिए थे लेकिन डा अंबेडकर ने गांधी जी से मिलकर 24 सितम्बर 1932 को चुपके चुपके पूना के यर्वदा जेल में सविता मालवीय मदन मोहन मालवीय C Raj गोपालाचारी के विच कम्युनल अवॉर्ड में सशोधित करके 31 •50 प्रतिशत में से 7 •50 प्रतिशत आदिवासियों को रखा दलित को 15 प्रतिशत रखा अल्पसंख्यक को 10 •50 प्रतिशत को राजनैतिक आरक्षण खत्म किए गए पिछड़ों को 24 प्रतिशत आदिवासियों में निषाद केवट मल्लाह बिंद कश्यप बनपर गोढ़ी कोल गंगोता सोरहिया बनपर चाय मुरियारी ख़ुनौट मंडल तुरहा चंद्रवसी खरवार नोनिया सभी कश्यप निषादराज वंशजों को हटा कर पिछड़ों के सूची में जोड़ कर 52 प्रतिशत राजनीति आरक्षण खत्म किए गए सर साइमन कमिशन में 85 प्रतिशत असली मालिकों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया था उसे गांधी जी अंबेडकर जी दोनों मिल कर Communal Award को खत्म कर के सामान्य चुनाव में बदल दिया था 15 प्रतिशत अपर कास्ट के सीटों पर सभी लोगों को चुनाव लड़ने की सिस्टम बनाया गया था जिसे डा अंबेडकर जी ने गांधी जी से समझौता कर के Communal Award में संशोधित कर के 85 प्रतिशत देश के असली मालिकों को स्वर्णों का गुलाम बना दिया था जिससे आज देश के 85 प्रतिशत असली मालिकों का जीवन नर्क बन चुका है दान अंबेडकर जी को जब संविधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से 22 अप्रैल 46 को गांधी जी ने चक्रव्यूह रचना रच कर गांधी जी ने अपने शिष्य नारायण काजोलकर को मुम्बई पश्चिम से अंबेडकर जी के खिलाफ़ में लड़वा कर अंबेडकर जी को हरा दिया था तो कांग्रेस RSS दोनों ने जश्न मनाया था नेहरू जी ने सन्मार्ग पत्रिका अखबार में बयान दिए थे की आंबेडक अब संविधान सभा निर्वाचन क्षेत्र मुंबई पश्चिम से हार गए हैं अब उनके लिए संविधान का रोशनदान भी बन्द हो चुका है वह संविधान कैसे लिखेगा डा अंबेडकर जी संविधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से हारने बाद बहुत दुखी हो कर डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी के पास खुलना जैसोर गए थे दुखी मन से डा जोगेंद्र नाथ मंडल जी से अनुरोध करने गए थे डा जोगेंद्र नाथ मंडल जी ने डा अंबेडकर जी को बोले थे आज गांधी जी आपके लिए बुरा हो गए है 24 सितम्बर 1932 को गांधी जी आपको अच्छा लगा था आप उन्हीं से अनुरोध करते जाकर हमारे यहां क्यों आए हों डा अंबेडकर माफ़ी मांगते हुए आंसू बहा रहे थे
डा अंबेडकर के आसू के बहते हुए निषादवंश के योद्धा पिघल गए उन्होंने कहे थे डा अंबेडकर को पूना पेक्ट करके तुमने देश के सम्पूर्ण 85 प्रतिशत असली मालिकों को गुलाम बना दिए हो गांधी जी अपने स्वर्णों के लिए स्वर्णों के राज पाट के लिए काम कर रहे हैं उसके झांसे में आ कर सर साइमन कमीशन द्वारा दिया गया भारत का स्वर्णिम का सौदा कर दिए हो देश के आने वाली नस्ल और वर्तमान नस्लें गुलाम हो गया है इसका एक ही इलाज है मैं अपने सीट से इस्तीफा दे रहा हूं उस सीट से पुनः तुझे संविधान सभा निर्वाचन क्षेत्र खुलना जैसोर से पर्चा भरा कर जितवा कर संविधान लिखने के लिए दिल्ली भेज रहा हूं 25 जून 1946 को पुनः खुलना जैसोर से संविधान सभा निर्वाचन क्षेत्र उप चुनाव हुआ डा अंबेडकर के विरोध में कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव शरदचंद्र बोस सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई चुनाव लड़ रहे थे उनके प्रचार में कांग्रेस के जगजीवन राम कामराज नाडार अध्यक्ष मदन मोहन मालवीय गांधी जी बल्लभ भाई पटेल नेहरू जी सभी कांग्रेसी शीर्ष नेतृत्व एडी चोटी का जोड़ डा अंबेडकर जी को हरवाने में लगे हुए थे क्योंकि खुलना जैसोर सामान्य निर्वाचन क्षेत्र था लेकिन निषाद राज का सपूत डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी ने सामाजिक सद्भावना से प्रचार किए डा अंबेडकर को जीत मिला डा अंबेडकर जीत कर दिल्ली गए संविधान लिखने के लिए उस वक्त भी डा जोगेंद्र नाथ मंडल जी ने डा अंबेडकर जी को 1932 के पूना पेक्ट में हुए सामाजिक क्षति को पूर्ति के लिए डा अंबेडकर ने उप चुनाव में खुलना जैसोर की जनता से वायदा किए थे की मै जीत कर अगर जाऊंगा तो संविधान लिखुऊंगा तो Communal Award को संविधान में शामिल करूंगा संविधान को जब देश के नाम से समर्पित करूंगा तो उससे पहले डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी को संविधान दिखा दूंगा डा अंबेडकर जी उप चुनाव खुलना जैसोर से जीत कर चले गए डा जोगेंद्र नाथ मंडल जी भारत के वटबाड़े में दिल मसोस कर पाकिस्तान चले गए वहां जाकर पाकिस्तान का संविधान लिखे उन्होंने अपनी कलम से पाकिस्तान में जाकर इतिहास लिख दिए लाहौर के अखबार में डा जोगेंद्र नाथ मंडल जी ने पढ़े डा अंबेडकर 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू व प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जी को देश के नाम समर्पित करेंगे
डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी ने लाहौर से कानून मंत्री के हैसियत से पत्र जारी किए थे की 15 जनवरी 50 को मैं दिल्ली आ रहा हूं मैंसंविधान पढ़ने के लिए दिल्ली आ रहा हूं आप दिल्ली में ही रहना डा अंबेडकर ने पत्र पढ़ कर डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी के आने से एक दिन पहले 14 जनवरी 50 को सवारमती आश्रम अहमदाबाद के लिए दिल्ली से रवाना हो गए डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी 15 जनवरी 50 को दिल्ली आए पाकिस्तानी दूतावास में रुके उसके बाद 27 अलीपुर रोड स्थित निवास पर पहुंचे तो उन्हें डा अंबेडकर जी के सहयोगी नानक चंद रट्टू मिले लगातार डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी 15 जनवरी से 22 जनवरी 50 तक दिल्ली और आस पास के होटलों में देखते रहे लेकिन सात दिन तक नहीं आए अंत में वे 22 जनवरी 50 को एक पत्र डा अंबेडकर को संबोधित करते हुए लिखे थे*

डा अंबेडकर तुम्हे मैं 24 सितम्बर 1932 को ही समझ चुका था की Communal Award सुरक्षित मताधिकार अधिनियम राजनैतिक आरक्षण भारत का स्वर्णिम आने वाला भविष्य है उसेसे समझौता कर के जघन्य अपराध किए थे जिसे कोई माफ नहीं कर सकता था? लेकिन देश वटबाड़ा के कारण एक मौका प्रायश्चित करने के लिए तुम्हें दे कर सुधारने का मौका दिया था लेकिन फिर भी मुझसे और देश की गरीब आवाम से वायदा किए थे विश्वास करके एक मौका मिला था उसे भी गवां दिया तुम्हारा देश की गरीब आवाम 85 प्रतिशत क्या बिगाड़ा था? जिसे आजाद देश में गुलाम नागरिक बना दिए जब देश के आवाम को तुम्हारी असलियत होगा तो गांधी और तुम्हारी एक भी स्टेचू नहीं मिलेगा तुमने धोखा दिया है इस देश के आदिवासी दलित पिछड़ों अल्पसंख्यकों को जो कभी माफ नहीं करेगा

 *।   । डा जोगेंद्र नाथ मंडल   ।।निषाद कानून मंत्री पकिस्तान।।*

22 जनवरी 50 को डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी पाकिस्तान चले गए डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी ने सच्चे मन से समाज की सेवा में तत्पर रहते हुए पाकिस्तान के कानून मंत्री बन कर सेवा करते हुए अंत में 5 अक्टूबर 1950 को लियाकत अली खान से मतभेद होने के कारण पुनः भारत आ गए उन्होंने दमदम हवाई अड्डे के पास झोपड़पट्टी में गुमनाम के रूप में रहने लगे महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिसने कभी भी किसी के पास जाकर हाथ फैलाए नहीं टाटा के प्रमुख रतन टाटा ने उन्हें बिहार से सांसद में जाने के लिए खुद दमदम हवाई अड्डे के झोपड़पट्टी में मिलने के लिए गए थे रतन टाटा बिहार के प्रथम CM श्री कृष्ण सिंह के कहने पर ऑफर देने गए थे वे स्वाभिमानी महापुरुष थे उन्होंने रतन टाटा को एक खूब शुरत पंक्ति कहे थे

रहिमन वो नर मर चुके जो कहूं मांगे ना जाय
उससे पहले वो मेरे जिन मुख निकसै नाए
उन्होंने रतन टाटा को कहा था जहां जिस सांसद में पूना पेक्ट करके देश के 85 प्रतिशत आवाम को गुलाम बनाने वाले बैठा हो उसका मैं हिस्सा नहीं बन सकता हूं जो गुलामी के मेडल दे कर बैठा है खुद हार कर कानून मंत्री किसी के कृपापत्र बन कर बैठा है वहां अपने आप को ग्लानि महशूस करने के लिए नहीं जा सकता हूं मुझ पर आप लोग कृपा ना करें इसके लिए ऋणी रहूंगा ऐसे महान त्यागी वैज्ञानिक विचारधारा बाले महात्मा डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी थे
*

डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी जब भारत में कोलकाता में आए थे उस वक्त डा अंबेडकर जी ने डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी को बोले थे मल्ला जोगेंद्र नाथ फिर भारत आ गए हैं उनका आरती उतार लीजिए

** RSS के सर संचालक गोलबोलकर ने डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी का नागपुर कोलकाता के बेलूर मठ मुंबई सूरत व दिल्ली के झंडेवाला लेन में उनका पुतला फूंकते हुए जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद गद्दार वापस जाओ का नारा दिया था कांग्रेस चुप्पी लगा 6गई थी

डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी ने प्रथम लोक सभा चुनाव 1952 को जब हो गया था उसके बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू जी विधिवत प्रधानमंत्री बन गए उसके बाद डा जोगेंद्र नाथ मंडल जी ने एक पत्र नेहरू जी को लिखे ट्राइब हैबिचूअल क्रिमिनल एक्ट को सांसद के द्वारा पारित करके खत्म करने के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में 30 अगस्त 62 को किए थे दूसरे दिन 31 अगस्त 62 को नेहरू जी ने सांसद के विशेष सत्र बुला कर सर्व सम्मति से ट्राइब क्रिमिनल एक्ट खत्म किए थे
लेकिन डा अंबेडकर जी कानून मंत्री रहते हुए भी कभी भी Trible Criminal Act को खत्म करने का कोशिश भी नहीं किए थे

डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी के जीवन संघर्षमय रहा जीवनपर्यंत लड़ते रहे लेकिन समझौता शोहरत पाने के लिए नहीं किए थे 5 अक्टूबर 1968 को दमदम हवाई अड्डे के झोपड़पट्टी में टीबी से मुक्ति पा कर संदेश दिया थे

झुकना नहीं
रुकना नहीं
थकना नहीं
संघर्ष करते रहना
स्वाभिमान से एक दिन का जीवन
सौ वर्षों से जीवन सर्वश्रेष्ठ है
जय निषाद राज साहब आनन्द निषाद जी का प्रस्तुति समर्पित है आधुनिक भारत का इतिहास का अंश हैं

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दोस्तो अभी देश के पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं परिणाम भले ही 4 तारीख को आएं लेकिन जिस प्रकार से पोल सामने आये हैं उनको देखकर लगता है देश के विपक्षी नेता जो आज शीर्ष स्तर की राजनीती कर रहे हैं देश और देश की जनता को BJP RSS से आजादी नहीं दिला पाएंगे और जब तक देश की सत्ता में BJP रहेगी युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा महंगाई दिन पर दिन बढ़ती जाएगी घोटालों की जांच में भी घोटाले होंगे नेता और अधिकारी भ्रस्टाचार की सीमाओं को लाघते नजर आएंगेदोस्तो कल हमारे प्रधानमंत्री नें गंगा एक्सप्रेस का उद्धघाटन किया लेकिन यह विकास नहीं जनता को हमेशा हमेशा के लिए लूटने का व्यवसाय त्यार किया है जगह जगह टोल टैक्स और टोल टैक्स के लिए भी देश की जनता के करोड़ों रु. फास्टटैग के नाम पर एडवांस में लिए जाते हैंआज दुनिया की 300 यूनिवर्सिटी में एक भी भारत में नहीं हैलेकिन दुनिया के टॉप 10 मंदिरों में 8 भारत में हैं टॉप 10 मस्जिदों में 3 भारत में हैं क्या करेगा देश का युवादेश के नेता और साधू संत बलात्कारी होते जा रहे हैं डॉलर के मुकाबले रुपया दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा हैदोस्तो अब देश की व्यवस्था देश के मौजूदा नेता ठीक नहीं कर सकतेदेश की व्यवस्था ठीक करने के लिए देश के नेताओं को देश की राजनीती से हटाना होगादोस्तो इसके लिए उ.प्र. के संभल कलेक्ट्रेट से कांग्रेस कार्यकर्ता PACL KBCL कल्पतरू सहारा प्रोग्रीम साईराम साइप्रसाद निमवस जैसी तमाम कम्पनियों के निवेशकों के लिए 17 अगस्त 26 को शुरू होगा मोदी सरकार के विरुद्ध आंदोलनदोस्तो देश की सम्पूर्ण व्यवस्था को बदलने के लिए जरूरी है देश के मौजूदा टॉप नेताओं को देश की राजनीती से बाहर करनाधन्यवादआपका अपना विनोद साथीजिला उपाध्यक्षसंभल कांग्रेस उ.प्र.जिला संयोजकठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवारसंभल8791674785 9720026990 wजय हिन्द जय भारत जय कांग्रेस

छतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआरों की बदहाल स्थिति: प्रकोष्ठों की सक्रियता पर उठे सवालगनेश रैकवार | छतरपुरछतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआ समाज की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है। तालाबों और जल संसाधनों पर कथित कब्जों के बीच समाज अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा बनाए गए मछुआ प्रकोष्ठों की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने निषाद एवं मछुआ समाज को संगठनात्मक रूप से जोड़ने के लिए प्रकोष्ठों का गठन किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी सक्रियता को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।जिले में भाजपा मछुआ प्रकोष्ठ के जिला संयोजक आशीष रैकवार तथा कांग्रेस की ओर से अरविंद रैकवार की नियुक्ति के बाद भी समाज के लोगों का आरोप है कि अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस बदलाव या प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।समाज के युवाओं का कहना है कि कई बार ज्ञापन, शिकायतें और आंदोलन के बावजूद न तो तालाबों पर कथित अवैध कब्जों की स्थिति में सुधार हुआ और न ही समितियों की पारदर्शी जांच आगे बढ़ पाई। इससे युवाओं में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।इधर, राजनीतिक स्तर पर मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों में बदलाव के बावजूद जिला स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस बार योग्य और जमीनी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिलेगी या फिर व्यवस्था केवल सिफारिशों पर ही चलती रहेगी?इसी बीच “ऑल इंडिया फिशरमैन कांग्रेस” की सक्रियता को लेकर भी जिले में चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे लगभग निष्क्रिय बताते हुए इसे “कागजी संगठन” तक सीमित मान रहे हैं।युवा रैकवार समाज का कहना है कि पिछले महीनों में दिए गए ज्ञापनों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे राजनीतिक दलों और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बड़े नेताओं की चुप्पी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।समाज का कहना है कि वर्षों से चल रही हक की लड़ाई आज भी वहीं की वहीं खड़ी है, जबकि तालाबों और समितियों में कथित अनियमितताओं और कब्जों के मामलों की जांच की मांग लगातार की जा रही है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व इस बढ़ते असंतोष को कैसे संबोधित करता है और क्या वाकई जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव देखने को मिलेगा या नहीं।— आगे के अंक में: किस समिति में सबसे बड़े फर्जीवाड़े के आरोप, पूरी रिपोर्ट

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