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पुलिस वालों की ना दोस्ती अच्छी ना Dushmani दुश्मनी, अंकित बालिया बालियान हत्याकांड में नया मोड़: एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता ने पुलिस पर उठाए गंभीर सवालहरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में दो कथित शूटरों मोहित और सुमित के एनकाउंटर के बाद अब सुमित के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, सुमित के पिता धर्मपाल ने कहा कि उनका बेटा करीब ढाई महीने पहले मोहित के संपर्क में आया था। परिवार का कहना है कि इससे पहले सुमित सामान्य जीवन जी रहा था और पिता के साथ मजदूरी करता था। 12वीं की एक परीक्षा पास नहीं होने के बाद वह पिता के साथ काम करने लगा था।परिवार के मुताबिक, मोहित का सुमित के घर आना-जाना शुरू हुआ और परिजन लगातार सुमित को उससे दूर रहने की सलाह देते रहे। लेकिन दोनों के बीच संपर्क बना रहा।26 अगस्त को सुमित के पास फोन आया। परिवार के अनुसार, इसके बाद वह घर से कपड़े लेकर निकला और फिर वापस नहीं आया। मोहित ने परिवार को सिर्फ इतना बताया कि सुमित चला गया है। वह कहां गया और उसके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी परिवार को नहीं दी गई।इसके बाद सुमित शामली में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।अब सुमित के पिता धर्मपाल ने एनकाउंटर की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि शनिवार को यूपी पुलिस उन्हें और उनके छोटे बेटे यशपाल को अपने साथ ले गई थी। देर रात पुलिस उन्हें घर छोड़कर गई और कथित तौर पर भरोसा दिया गया कि सुमित का एनकाउंटर नहीं किया जाएगा।लेकिन इसके बाद सुमित के एनकाउंटर की खबर सामने आई।धर्मपाल का सवाल है कि जब पुलिस ने एनकाउंटर नहीं करने का कथित भरोसा दिया था तो फिर सुमित को मुठभेड़ में क्यों मार दिया गया?हालांकि, सुमित के पिता ने यह भी कहा कि उन्हें अपने बेटे के मारे जाने का दुख नहीं है। उनका कहना है कि अगर सुमित ने गलत किया था तो उसे उसकी सजा मिली।लेकिन कहानी का सबसे गंभीर हिस्सा अब छोटे बेटे यशपाल को लेकर है।धर्मपाल का आरोप है कि पुलिस ने उनके छोटे बेटे यशपाल के साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक, यशपाल का सुमित के अपराध से कोई लेना-देना नहीं है और वह वाई-फाई लगाने का काम करता है।पिता का दावा है कि छोटे बेटे के साथ कथित मारपीट और थर्ड डिग्री के बाद उसकी हालत खराब है। इसी को लेकर धर्मपाल बेहद परेशान हैं।रिपोर्ट के अनुसार, धर्मपाल ने कहा कि वह बेहद मजबूर हो चुके हैं और अगर उनका छोटा बेटा ठीक नहीं हुआ तो वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं।एक तरफ अंकित बालियान के परिवार को इंसाफ मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता पुलिस की कार्रवाई और छोटे बेटे के साथ कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठा रहे हैं।इस पूरे मामले में धर्मपाल के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि क्या सुमित के एनकाउंटर और उसके परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच होगी?अंकित बालियान हत्याकांड की कहानी में अब एक नया मोड़ सामने आ गया है। ​उजड़ते गाँव, टूटती साँसें: हिंडन-कृष्णा बेल्ट में कैंसर का तांडव और सोता प्रशासन जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी की रैली के बाद किए गए “शुद्धिकरण” का खुलकर बचाव करते हुए पूछा है, “अगर कार्यक्रम के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया गया, तो इसमें गलत क्या था?” उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी की रैली के बाद किए गए “शुद्धिकरण” का खुलकर बचाव करते हुए पूछा है, “अगर कार्यक्रम के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया गया, तो इसमें गलत क्या था?”

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पुलिस वालों की ना दोस्ती अच्छी ना Dushmani दुश्मनी, अंकित बालिया बालियान हत्याकांड में नया मोड़: एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता ने पुलिस पर उठाए गंभीर सवालहरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में दो कथित शूटरों मोहित और सुमित के एनकाउंटर के बाद अब सुमित के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, सुमित के पिता धर्मपाल ने कहा कि उनका बेटा करीब ढाई महीने पहले मोहित के संपर्क में आया था। परिवार का कहना है कि इससे पहले सुमित सामान्य जीवन जी रहा था और पिता के साथ मजदूरी करता था। 12वीं की एक परीक्षा पास नहीं होने के बाद वह पिता के साथ काम करने लगा था।परिवार के मुताबिक, मोहित का सुमित के घर आना-जाना शुरू हुआ और परिजन लगातार सुमित को उससे दूर रहने की सलाह देते रहे। लेकिन दोनों के बीच संपर्क बना रहा।26 अगस्त को सुमित के पास फोन आया। परिवार के अनुसार, इसके बाद वह घर से कपड़े लेकर निकला और फिर वापस नहीं आया। मोहित ने परिवार को सिर्फ इतना बताया कि सुमित चला गया है। वह कहां गया और उसके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी परिवार को नहीं दी गई।इसके बाद सुमित शामली में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।अब सुमित के पिता धर्मपाल ने एनकाउंटर की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि शनिवार को यूपी पुलिस उन्हें और उनके छोटे बेटे यशपाल को अपने साथ ले गई थी। देर रात पुलिस उन्हें घर छोड़कर गई और कथित तौर पर भरोसा दिया गया कि सुमित का एनकाउंटर नहीं किया जाएगा।लेकिन इसके बाद सुमित के एनकाउंटर की खबर सामने आई।धर्मपाल का सवाल है कि जब पुलिस ने एनकाउंटर नहीं करने का कथित भरोसा दिया था तो फिर सुमित को मुठभेड़ में क्यों मार दिया गया?हालांकि, सुमित के पिता ने यह भी कहा कि उन्हें अपने बेटे के मारे जाने का दुख नहीं है। उनका कहना है कि अगर सुमित ने गलत किया था तो उसे उसकी सजा मिली।लेकिन कहानी का सबसे गंभीर हिस्सा अब छोटे बेटे यशपाल को लेकर है।धर्मपाल का आरोप है कि पुलिस ने उनके छोटे बेटे यशपाल के साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक, यशपाल का सुमित के अपराध से कोई लेना-देना नहीं है और वह वाई-फाई लगाने का काम करता है।पिता का दावा है कि छोटे बेटे के साथ कथित मारपीट और थर्ड डिग्री के बाद उसकी हालत खराब है। इसी को लेकर धर्मपाल बेहद परेशान हैं।रिपोर्ट के अनुसार, धर्मपाल ने कहा कि वह बेहद मजबूर हो चुके हैं और अगर उनका छोटा बेटा ठीक नहीं हुआ तो वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं।एक तरफ अंकित बालियान के परिवार को इंसाफ मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता पुलिस की कार्रवाई और छोटे बेटे के साथ कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठा रहे हैं।इस पूरे मामले में धर्मपाल के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि क्या सुमित के एनकाउंटर और उसके परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच होगी?अंकित बालियान हत्याकांड की कहानी में अब एक नया मोड़ सामने आ गया है।

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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