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को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में प्रचार प्रसार करना यह आदिवासी पहचान बचाने या आदिवासियों का विकास करने का मामला नहीं है बल्कि ब्राह्मणों का विदेशीपन छुपाने और मूलनिवासी लोगों में हो रही जागृति को डाइवर्ट करने का षड्यंत्र है

UNO दवारा घोषित World Indigenous day को दुनियां भर के 193 देशों में मनाया गया।परंतु भारत में इसको ही विश्व मूलनिवासी दिवस को विश्व आदिवासी दिवस के रूप मे प्रचारित किया गया।

Indigenous का मतलब होता है
(used about people, animals or plants) living or growing in the place where they are from #originally
(मनुष्‍य, पशु या पौधे) अपने मूल स्‍थान में स्थित; #स्‍वदेशी, स्‍थानीय

वर्ल्ड इंडीजिनस डे का मतलब यह है
कि कोई भी विदेशी ,किसी भी देश के मूलनिवासी लोगों पर शासन नहीं कर सकता।

परंतु भारत में ब्राह्मण जो DNA से प्रमाणित विदेशी हैं
और वह भारत के लोकतंत्र के चारों पिलर पर कब्जा करके मूलनिवासी भारतीयों(OBC/SC/ST और इनसे धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यकों पर रूल(शासन)कर रहा है

युरेशियन ब्राह्मण अपनी पहचान छुपाकर भारत के मूलनिवासी लोगों पर राज कर रहा है, अगर भारत के मूलनिवासी लोगों को उसकी मूल पहचान पता लग जाती है तो ब्राह्मण विदेशी है और हमारे लोगों पर राज कर रहा है यह जागृति भारत के मूलनिवासी लोगों में आसानी से हो जाती है
विश्व मूलनिवासी दिवस को भारत में मूलनिवासी दिवस के रूप में मनाते हैं तो लोगों को यह रियलाइजेशन, यह पहचान हो जाएगी कि हम मूलनिवासी हैं
तो विदेशी कौन हैं ?
इसलिए यह डाइवर्ट करने का मामला है
आदिवासियों को हजारों सालों से ब्राह्मणों नें जंगलों में रहने को मजबूर किया, उनपर वनवासी पहचान थोपने की कोशिश की।
भारत का जो संविधान लिखा गया उसमें आदिवासियों को पांचवीं व छठी अनुसुची के रूप में अपने इलाकों में आदिवासी ही शासक होगा यह प्रावधान है।
परंतु आजाद भारत में विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से आदिवासियों को अपनी ही जल, जंगल, जमीन से बेदखल किया गया।
इससे करोड़ों आदिवासी अपने क्षेत्रों से विस्थापित हुए।
जो लोग विश्व मूलनिवासी दिवस को आदिवासी दिवस के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं
क्या वह आदिवासियों को उनके संवैधानिक अधिकार देने को राजी है ?
नहीं
इसलिए इस बात को समझना भी जरूरी है कि हजारों सालों से आइसोलेशन में रहनेवाले लोगों को अलगीकरण करके अकेले अकेले रखने का मामला भी है।
आदिवासी अपनी जल, जंगल, जमीन के लिए अकेले अकेले, आइसोलेशन में 250-265 सालों से लड़ाई लड़ रहा है और अकेले लड़ने से आदिवासी समुदाय का सत्यानाश हो रहा है।
इस बात को गंभीरता से समझकर आदिवासियों को अपने DNA के भाई ओबीसी, एससी,एस टी और इनसे धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यकों को साथ लेकर संगठित ताकत निर्माण कर अपनी आनेवाली पीढ़ियों के लिए अधिकार बचाना चाहिए।
अन्यथा 7.5% आदिवासी लोग अकेले अकेले अब और सैकड़ों साल जल, जंगल, जमीन के लिए संघर्ष करते रहे तो भी सफल नहीं हो सकते।

आदिवासी ही मूलनिवासी है ऐसा ब्राह्मण कहते हैं, प्रचारित करते हैं तो ब्राह्मणों के दवारा भारत पर आक्रमण से पहले सिंधु घाटी सभ्यता के लोग कौन थे ?
जो नगरीय सभ्यता के रूप में रहते थे ?

OBC SC ST हम सब सिंधु घाटी सभ्यता के मूलनिवासी लोग हैं
ब्राह्मणों के भारत पर आक्रमण के बाद ही लोग नगरीय सभ्यता छोडकर जंगलों मे रहने को मजबूर हुए
जिनको आज आदिवासी कहा जाता है
विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का मामला नहीं है
यह षड्यंत्र से आदिवासियों के अलगीकरण का मामला भी है

इसलिए हमें विश्व मूलनिवासी दिवस (World indigenous day) को, विश्व मूलनिवासी दिवस के रूप में मनाने की जरूरत है और लोगों के अधिकारों को जानने, समझने और प्रचारित प्रसारित करने की जरूरत है

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