Spread the love

बागपत 17 सितम्बर 2025-नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश/निर्देश के क्रम में नगर पालिका अधिशासी अधिकारी, कृष्ण कुमार भडाना के निर्देशानुसार पालिका सफाई एवं खाद्य निरीक्षक, संदीप कुमार तिवारी के नेतृत्व में आज दिनांक 17 सितंबर, 2025 को स्वच्छता चैंपियन व स्वच्छ मोहल्ला समिति के सहयोग से स्वछता ही सेवा पखवाड़ा के तहत स्वच्छोत्सव मे स्वच्छता की भागीदारी यमुना पक्का घाट पर स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत विशेष साफ सफाई अभियान चलाया गया है और नगरवासियों को स्वच्छता की भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। इसमें स्वच्छ भारत मिशन सह प्रभारी, श्री आदित्य नारायण, कार्यवाहक सफाई नायक, श्री सुदेश कुमार, एवं निकाय के अन्य समस्त कर्मचारी गण आदि शामिल रहे हैं।

 *सूचना विभाग बागपत*

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

sbobet88

×