तुमने माफ़ी मांग ली क्योंकि तुम बड़े दिल वाली हो, वरना मौजूदा प्रधानमंत्री और उनकी पंटर सेना ने तो इससे भी ज़्यादा गंदी गालियां दी हैं। उन्होंने आज तक माफ़ी नहीं मांगी है।
तुम सिर्फ़ 15 साल की हो। नादानी में गाली दे सकती हो। तुमने जिसे मां की गाली दी, उसने तो ख़ुद एक राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए किसी और की मां को गाली दी थी। उसने विपक्षी दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को ‘जर्सी गाय’ बोला था। राहुल गांधी को ‘हाइब्रिड बछड़ा’ कहा था।
तुम्हें ऐसे इंसान से संस्कारों पर लेक्चर लेने की जरूरत नहीं है, जिसने पिछले 12 सालों में गालियों का सामान्यीकरण किया है और गालीबाज़ों को बढ़ावा दिया है। ये वो प्रधानमंत्री है जो सोशल मीडिया पर गंदी-गंदी गालियां बकने वालों को फॉलो करता है।
तुम माफ़ी न भी मांगतीं तो भी कोई दिक्कत नहीं थी। भाजपा सांसद रमेश बिधुड़ी ने संसद के अंदर विपक्षी सांसद को ‘भ*वे’ बोला। माफ़ी मांगी क्या?
भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने नेशनल टीवी पर लाइव शो में कांग्रेस प्रवक्ता की मां को ‘*डी’ बोला।
तेलंगाना के भाजपा विधायक ने भरी जनसभा में एक समुदाय विशेष के लोगों को मां की गाली देते हुए ‘मा*रचो*’ बोला। उसके ऊपर 100 से ज़्यादा केस दर्ज हैं। ख़ास बात ये है कि जून 2025 में उसने ही भाजपा छोड़ी, भाजपा ने उसे नहीं निकाला। उसने भी कभी माफ़ी नहीं मांगी।
अरे प्रधानमंत्री के दाहिने हाथ यानी गृहमंत्री ने ख़ुद सदन के अंदर ‘साले’ शब्द का इस्तेमाल किया और रौब के साथ स्पीकर से कह दिया कि इसे सदन की कार्यवाही से हटा देना। लेकिन माफ़ी नहीं मांगी।
भाजपा से ही जुड़े #सत्यम_पंडित ने तो पिछले हफ़्ते ही सीजेपी में प्रोटेस्ट में जा रहे दो छात्रों को मां-बहन की गंदी-गंदी गालियां दीं। अब तक माफ़ी नहीं मांगी। ऊपर से कह रहा है कि मैंने सही किया।
#निशिकांत_दुबे ने पिछले दिनों संसद के अंदर आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री को अय्याश बोला, लेकिन माफ़ी नहीं मांगी।
रिद्धिमा शर्मा नाम की बेहया औरत महात्मा गांधी को गंदी-गंदी गालियां देती है। फिर भी उसे भाजपा की बैठकों में केंद्रीय मंत्रियों से मिलने बुलाया जाता है। एक तरफ़ वो गांधी को पूजने का पाखंड करते हैं तो दूसरी तरफ़ गालियां दिलवाते हैं। ये हैं उनके संस्कार।
भाजपा से जुड़े लोग और इसके समर्थक आए दिन अपने विरोधियों को मां-बहन से जुड़ीं गंदी गालियां देते हैं। महिलाओं को बलात्कार की धमकी देते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री को कभी फ़र्क़ नहीं पड़ा।
ख़ुद की मां पर आई तो तिलमिलाने लगे। अगर गालियों से इतनी ही समस्या है तो प्रधानमंत्री को कभी भाजपा समर्थकों और अंधभक्तों के नाम एक संबोधन जारी करके उनसे कहना चाहिए कि अपने विरोधियों को गाली देना बंद करें। जब तक ऐसा नहीं करते, तब तक उनका संस्कार और संस्कृति की बात करना अपने आप में एक गाली है। दोगलापन है।
रुचिका, मेरी छोटी बहन। तुम तो इन सबके सामने बहुत छोटी सी गुड़िया हो। ये बुड्ढे-ठुड्डे संवैधानिक पद पर बैठे लोग जब बेशर्मी के साथ सरेआम गालियां दे सकते हैं तो बचपने में तुमने भी दे दीं तो कोई गुनाह नहीं कर दिया।
रुचिका, तुम्हारी समझ का स्तर उस इंसान से लाख गुना अच्छा है जो ख़ुद दूसरों की मां को गाली देकर गालियों पर ज्ञान देने आ जाता है। उस इंसान ने तो आज तक माफ़ी नहीं मांगी। इसलिए कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री से अधिक समझदार तुम हो। वो तो सत्ता के नशे में चूर हैं।
6000 करोड़ से बनाई अपनी भगवान सरीखी इमेज की धज्जियां उड़ने से वो बुढ़ापे में बौखला गए हैं।
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रुचिका, तुमने कोई गलती नहीं की थी। तुम्हें शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। हमें तुम पर गर्व है। तुम साहसी हो। बस इस तानाशाह सत्ता से डर गई हो।
तु
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