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  1. जो नीचे कोट किया है वो सिर्फ लाइन नहीं है…
    वो 3000 साल की गुलामी का पोस्टमार्टम है।
  2. “अगर पत्थर की मूर्ति में ताकत होती,
    तो संविधान लिखने की जरूरत नहीं पड़ती”
  3. सोचो … मंदिर 5000 साल पुराने हैं,
    मस्जिद 1400 साल पुरानी है,
    चर्च 2000 साल पुराना है।
  4. पर दलित आज भी मंदिर के बाहर जूता लेकर खड़ा है।
    आदिवासी आज भी जंगल से बेदखल है।
    महिला आज भी “दो वक्त की रोटी” के लिए तरस रही है।
  5. 5000 साल की मूर्ति पूजा से हक नहीं मिला…
    75 साल पहले बाबा साहेब की कलम से संविधान मिला।
  6. मतलब साफ है
    पत्थर ने कभी किसी को इंसान नहीं बनाया,
    कलम ने गुलाम को इंसान बना दिया।
  7. मूर्ति के आगे 2 घंटे लाइन लगाओगे = “पुण्य मिलेगा”
    संविधान की 2 लाइन पढ़ लोगे = “हक मिलेगा”
  8. तुम पुण्य चुनते हो…
    इसलिए हक से वंचित रह जाते हो।
  9. मूर्ति बोलेगी “दान दो, दक्षिणा दो, हवन कराओ”
    संविधान बोलेगा “Article 15 पढ़ो, बराबरी का हक लो”
  10. मूर्ति कहेगी “किस्मत में लिखा है तो मिलेगा”
    संविधान कहेगा “कानून में लिखा है, इसलिए तुझे मिलेगा”
  11. फर्क समझो …
    किस्मत = ब्राह्मण के हाथ में
    कानून = तुम्हारे हाथ में
  12. 5000 साल मूर्ति पूज ली…
    SC/ST/OBC आज भी “नीचा” है।
  13. 75 साल संविधान चल रहा है…
    दलित का बेटा IAS, बेटी Doctor बन रही है।
  14. अब तुम ही बताओ
    ताकत मूर्ति में है या कलम में?
  15. मंदिर में चढ़ावा चढ़ाओगे = पुजारी अमीर होगा
    स्कूल में फीस दोगे = तुम्हारा बच्चा अमीर होगा
  16. एक तुम्हें भिखारी बनाता है “भक्त” बोलकर
    दूसरा तुम्हें अफसर बनाता है “नागरिक” बोलकर
  17. मूर्ति के सामने सिर झुका दोगे = 2 मिनट का सुकून
    संविधान के सामने सिर उठा दोगे = जिंदगी भर की आजादी
  18. बुद्ध ने भी यही कहा था: “अत्त दीपो भव”
    मतलब अपना दीपक खुद बनो। पत्थर के दिए की आरती मत करो।
  19. बाबा साहेब ने भी यही किया:
    भीख नहीं मांगी, हक छीन लिया।
    कलम से छीना… आंसू से नहीं।
  20. आज भी देखो चारों तरफ:
    जिस गांव में मंदिर 10 हैं, स्कूल 1 भी नहीं…
    वहां का बच्चा आज भी मजदूर है।
  21. जिस मोहल्ले में मजार 5 हैं, लाइब्रेरी 0 है…
    वहां का नौजवान आज भी बेरोजगार है।
  22. संयोग है क्या नहीं… ये प्रयोग है।
    अज्ञानता का प्रयोग। गुलामी का प्रयोग।
  23. मूर्ति तुम्हें “आस्था” देगी… पेट नहीं भरेगी
    संविधान तुम्हें “रोजगार” देगा… भीख नहीं मंगवाएगा
  24. मूर्ति कहेगी “पिछले जन्म का पाप है”
    संविधान कहेगा “पिछली सरकार की गलती है, अगली बार वोट से बदल दो”
  25. एक तुम्हें बेबस बनाता है
    दूसरा तुम्हें सशक्त बनाता है
  26. इसलिए , कान खोलकर सुन लो:
    अगर पत्थर में ताकत होती,
    तो 5000 साल में भारत “सोने की चिड़िया” बन गया होता।
  27. अगर हवन से बारिश होती,
    तो किसान आत्महत्या नहीं करता।
  28. अगर ताबीज से बीमारी ठीक होती,
    तो अस्पताल बंद हो गए होते।
  29. ताकत पत्थर में नहीं है ..
    ताकत तुम्हारे वोट में है।
    ताकत तुम्हारी कलम में है।
    ताकत संविधान की किताब में है।
  30. मूर्ति मत तोड़ो… पर मूर्ति के आगे दिमाग मत गिरवी रखो।
    पूजा करो, पर गुलाम मत बनो।
    आस्था रखो, पर अंधभक्त मत बनो। क्योंकि आखिरी लाइन यही है:
    “पत्थर पूजने से भगवान नहीं मिलता,
    संविधान पढ़ने से इंसान मिलता है” जय भीम! जय संविधान! जय विज्ञान!
    नमो बुद्धाय! अत्त दीपो भव!
    🌞🙏

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