NEET Student strick Delhi Jantar mantar अचूक निशानेबाज जंतर मंतर से संसद मार्च 20 जुलाई 2026 को रोकने के लिए तैनात, लोकतंत्र को नोचने वाले न्यूज चैनलों के भेड़ियों और भेड़ों की तमाम दुष्टताओं के बावजूद बच्चों और नौजवानों ने अपनी बात देश और दुनिया तक पहुंचा दी। ये बात छिपी नही रह सकी कि अपनी बात कहने आए सैकड़ों युवा जब घायल थे, दर्जनों खून से लथपथ थे, बच्चियों के कपड़े फाड़ डाले गए थे, उन्हें सड़कों पर घसीटा जा रहा था तो भारत का कायर और निर्लज्ज प्रधानमंत्री संसद से बच्चों को पीठ दिखाकर भाग रहा था। और उसे सवालों से बचाने के लिए बंदूकों की नालें भारत माता की जय और वंदे मातरम का नारा लगाते निहत्थे नौजवानों की तरफ तान दी गई थीं। भारत ने इससे पहले इतना कायर, इतना क्रूर और इतना कमजर्फ प्रधानमंत्री नहीं देखा।इस बात को लिख लीजिए। जंतर-मंतर से आई क्रूरता और बर्बरता की तस्वीरें नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का सालों साल पीछा करेंगी। और न्यूज चैनलों के दरिंदे उसे ढंक नहीं पाएंगे। तुम्हारी चुप्पियां पलायन नहीं है, तुम्हारे आलीशान न्यूज रूम्स और स्टूडियोज के दरिंदों के झुंड में बदल जाने का एलान है।चैनलों के बेशर्म संपादकों, एंकरों, संवाददाताओं तुम जेबें क्यों नहीं काटते, बैंक क्यों नहीं लूटते, डकैती क्यों नहीं करते। इनमें से सबकुछ उससे ज्यादा सम्मानजनक या कम शर्मनाक होता जो तुम अभी कर रहे हो। सैकड़ों बच्चों को कुचले जाते, रौंदे जाते, घसीटे जाते, लहूलुहान होते देखने के बावजूद तुम्हें नींद कैसे आती है। तुम्हारे अपने बच्चे तुम्हारे मुंह पर थूकेंगे एक रोज। कम से कम उनसे डरो।हम पहले समझते थे तुम भी रोटी ही खाते होगे, लेकिन तुम तो आदमखोर हो चुके हो, इंसान खाने लगे हो तुमलोग। थू। Navin Kumar See less

subhashchand4

Bysubhashchand4

Jul 21, 2026
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अचूक निशानेबाज जंतर मंतर से संसद मार्च 20 जुलाई 2026 को रोकने के लिए तैनात
लोकतंत्र को नोचने वाले न्यूज चैनलों के भेड़ियों और भेड़ों की तमाम दुष्टताओं के बावजूद बच्चों और नौजवानों ने अपनी बात देश और दुनिया तक पहुंचा दी। ये बात छिपी नही रह सकी कि अपनी बात कहने आए सैकड़ों युवा जब घायल थे, दर्जनों खून से लथपथ थे, बच्चियों के कपड़े फाड़ डाले गए थे, उन्हें सड़कों पर घसीटा जा रहा था तो भारत का कायर और निर्लज्ज प्रधानमंत्री संसद से बच्चों को पीठ दिखाकर भाग रहा था। और उसे सवालों से बचाने के लिए बंदूकों की नालें भारत माता की जय और वंदे मातरम का नारा लगाते निहत्थे नौजवानों की तरफ तान दी गई थीं। भारत ने इससे पहले इतना कायर, इतना क्रूर और इतना कमजर्फ प्रधानमंत्री नहीं देखा।
इस बात को लिख लीजिए। जंतर-मंतर से आई क्रूरता और बर्बरता की तस्वीरें नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का सालों साल पीछा करेंगी। और न्यूज चैनलों के दरिंदे उसे ढंक नहीं पाएंगे। तुम्हारी चुप्पियां पलायन नहीं है, तुम्हारे आलीशान न्यूज रूम्स और स्टूडियोज के दरिंदों के झुंड में बदल जाने का एलान है।
चैनलों के बेशर्म संपादकों, एंकरों, संवाददाताओं तुम जेबें क्यों नहीं काटते, बैंक क्यों नहीं लूटते, डकैती क्यों नहीं करते। इनमें से सबकुछ उससे ज्यादा सम्मानजनक या कम शर्मनाक होता जो तुम अभी कर रहे हो। सैकड़ों बच्चों को कुचले जाते, रौंदे जाते, घसीटे जाते, लहूलुहान होते देखने के बावजूद तुम्हें नींद कैसे आती है। तुम्हारे अपने बच्चे तुम्हारे मुंह पर थूकेंगे एक रोज। कम से कम उनसे डरो।
हम पहले समझते थे तुम भी रोटी ही खाते होगे, लेकिन तुम तो आदमखोर हो चुके हो, इंसान खाने लगे हो तुमलोग। थू। See less

Yashwant Singh ·Follow

oonrSpdsteuhhm9hg82869606l06871317tgf81lg92thuhfi4hmutlcui18 ·

प्रधानमंत्री संसद से सुरक्षित निकाले गए। हिंदी में इसका मतलब है झोला उठाकर भागे साहेब।

काक्रोच संसद परिसर में घुसने पर उतारू, सारे दरवाज़े बंद करने को दौड़े सुरक्षाकर्मी।

क्यूआरटी तैनात, निशाना साधे जवान अगले आदेश के इंतज़ार में!

जंतर मंतर, इंडिया गेट, कनाट प्लेस, रेल भवन से लेकर पूरे आसपास के अति महत्वपूर्ण इलाकों में फैले काक्रोच!

पुलिस हर जगह काक्रोचों को दौड़ा रही लेकिन काक्रोच कम होने की बजाय बढ़ते ही जा रहे।

कई किस्म के गंभीर आरोपों से घिरी मोदी सरकार अब तक के सबसे मुश्किल दौर में।

नौजवानों का गुस्सा क्या रंग रूप लेगा, किसी को नहीं पता लेकिन जितना दमन होगा उतना गुस्सा बढ़ेगा यूथ का!

नौकरियों से जबरन दूर रखा गया जेनजी अब करो या मरो पर उतारू होता दिख रहा है।

पूरे सीन से कांग्रेस ग़ायब, कांग्रेसी मौनव्रत पर!

#JantarMantar#cockroach#paperleak

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वतर्मान में कावड़ यात्रा से किसे फायदा हो रहा
उसी को जिसने गुलाम बनने पर फूल बरसाए
हक़ मांगने पर लाठियां बच्चो पर भी बरसवाई,
सेल्फ लोड राइफल भी तंनवायी तो चला भी सकते थे
बच्चो ने कानून का पालन किया इसलिए इन्हे भरी बल परयोक करने का मौका नहीं मिलावतर्मान में कावड़ यात्रा से किसे फायदा हो रहा
उसी को जिसने गुलाम बनने पर फूल बरसाए
हक़ मांगने पर लाठियां बच्चो पर भी बरसवाई,
सेल्फ लोड राइफल भी तंनवायी तो चला भी सकते थे
बच्चो ने कानून का पालन किया इसलिए इन्हे भरी बल परयोक करने का मौका नहीं मिला

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